PM मोदी बोले- 25 करोड़ भारतीय गरीबी से बाहर निकले

पीएम नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को संसद परिसर में 28वें कॉमनवेल्थ स्पीकर्स और प्रेसाइडिंग ऑफिसर्स कॉन्फ्रेंस (CSPOC) का उद्घाटन किया। पीएम मोदी ने कहा कि आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। पिछले कुछ सालों में 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकले हैं।

पीएम मोदी ने कॉन्फ्रेंस में कहा कि भारत में UPI दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल पेमेंट सिस्टम है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन प्रोड्यूसर है। दुनिया का नंबर-2 स्टील प्रोड्यूसर है। दुनिया का तीसरा बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है। दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा एविएशन मार्केट है। दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है। दुनिया का तीसरा बड़ा मेट्रो रेल नेटवर्क है।

सम्मेलन की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला संभाल रहे हैं। इसमें कॉमनवेल्थ के 42 देशों से 61 स्पीकर्स और प्रेसाइडिंग ऑफिसर्स शामिल हो रहे हैं। सम्मेलन 14 से 16 जनवरी यानी तीन दिनों तक चलेगा।

पीएम मोदी के संबोधन की 5 बड़ी बातें

  • भारत में लोकतंत्र की पहचान है कि वह आखिरी व्यक्ति तक फायदे पहुंचे। हम लोक कल्याण की भावना से हर व्यक्ति के लिए बिना किसी भेदभाव से काम कर रहे हैं। इसी लोक कल्याण की भावना के कारण बीते कुछ सालों में भारत में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं।
  • जब भारत आजाद हुआ तब उस दौर में आशंका व्यक्त की गई थी कि इतनी विविधता में भारत में लोकतंत्र टिक नहीं पाएगा लेकिन भारत ने विविधता को अपने लोकतंत्र की ताकत में बदल दिया है।
  • कोविड-19 महामारी के दौरान जब पूरी दुनिया संकट का सामना कर रही थी, भारत भी कई चुनौतियों का सामना कर रहा था। इसके बावजूद उन कठिन परिस्थितियों में भी भारत ने 150 से अधिक देशों को दवाइयां और वैक्सीन उपलब्ध कराई। यह हमारे सिद्धांत को दर्शाता है- ‘पहले लोग, पहले मानवता।’
  • आप जिस स्थान पर बैठे हैं, वह भारत के लोकतांत्रिक सफर का महत्वपूर्ण स्थल है। स्वतंत्रता के अंतिम सालों में इसी सेंट्रल हॉल में संविधान सभा की बैठकें हुई थीं। स्वतंत्रता के बाद 75 साल तक यह भारत की संसद रही। देश के भविष्य से जुड़े कई निर्णय इसी हॉल में लिए गए। लोकतंत्र को समर्पित इस स्थल का नाम ‘संविधान सदन’ रखा गया है।
  • भारतीय लोकतंत्र का एक और मजबूत स्तंभ महिलाओं का प्रतिनिधित्व है। हमारे देश की प्रथम नागरिक राष्ट्रपति महिला हैं। दिल्ली की मुख्यमंत्री भी महिला हैं। ग्रामीण और स्थानीय निकायों में भारत में लगभग 15 लाख महिला निर्वाचित प्रतिनिधि हैं। ये लगभग 50 प्रतिशत नेतृत्व का प्रतिनिधित्व करती हैं, जो वैश्विक स्तर पर अभूतपूर्व है।
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