‘श्रीकृष्ण पाथेय’ के लिए सरकार ने बढ़ाया पहला चरण, मालवा में स्थल चिह्नित करने के लिए हुआ सर्वे
भोपाल: श्रीराम वन गमन पथ से जुड़े स्थलों को चिह्नित करने में लगी राज्य सरकार ने श्रीकृष्ण पाथेय बनाने के लिए स्थल चिह्नित करने का काम प्रारंभ कर दिया है। पहले चरण में मालवा में भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े स्थलों की पहचान की गई है। इसमें उज्जैन के सांदीपनि आश्रम के अतिरिक्त इंदौर जिले में स्थित परशुराम की जन्मस्थली जानापाव और धार में आमझेरा सहित अन्य स्थल शामिल हैं।
सांदीपनि आश्रम को केंद्र बनाकर प्रदेश भर में पाथेय विकसित किया जाएगा। यह भगवान कृष्ण से जुड़े स्थलों, संस्कृति, विचार और विरासत से जोड़ने वाला पथ होगा। श्रीकृष्ण की लीलाओं, जीवन मूल्य, दर्शन, ज्ञान, उपदेश और संदेशों को देश-दुनिया में पहुंचाया जाएगा। दुबई सहित अन्य देशों में सांस्कृतिक आयोजन होंगे।कृष्ण पाथेय के लिए स्थलों के चयन हेतु गठित 12 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति द्वारा मालवा क्षेत्र में यह सर्वे किया गया है। समिति अलग-अलग चरणों में प्रदेश भर में भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े स्थलों को चिह्नित करेगी। इसके अंतर्गत धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थानों को पाथेय में शामिल किया जाएगा।
राज्य सरकार ने इसके लिए लगभग आठ माह श्रीकृष्ण पाथेय न्यास का गठन किया था। न्यास की बैठक शीघ्र आयोजित किए जाने की तैयारी है, जिसमें आगे की कार्ययोजना पर निर्णय लिया जाएगा। योजना के अंतर्गत प्रदेश में स्थित भगवान श्रीकृष्ण के सभी मंदिरों का चरणबद्ध तरीके से जीर्णोद्धार भी किया जाना है।
राजस्थान सरकार के साथ मिलकर बनाया जाएगा धार्मिक सर्किट
श्रीकृष्ण पाथेय विकसित करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के बीच दो दौर की बैठक हो चुकी है। इसमें यह तय किया गया है कि दोनों सरकारें एक दूसरे को कृष्ण पाथेय विकसित करने में सहयोग करेंगी। बता दें कि भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े अधिकतर स्थल राजस्थान में हैं, इसलिए ऐसी योजना है कि दोनों राज्यों के प्रमुख स्थलों को जोड़ने वाला टूरिस्ट सर्किट बनाया जाए।
यह काम होंगे श्रीकृष्ण पाथेय न्यास के अंतर्गत
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इंदौर के जानापाव में भगवान कृष्ण, बलराम और परशुराम की मूर्ति स्थापित कर स्थल को धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जाएगा। यहां आयुध विश्वविद्यालय की स्थापना की जा रही है।
- उज्जैन में सांदीपनि गुरुकुल (विश्वविद्यालय) की स्थापना की जाएगी, जिसमें कृष्ण लीलाओं के बारें में भी पाठ्यक्रम होंगे। शोध किए जाएंगे। यहां श्रीकृष्ण लोक बनाया जा रहा है।
- प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्रों में एक या उससे अधिक गीता भवन बनाए जाएंगे। यह सामुदायिक भवन की तरह होगा, जिसमें पुस्तकालय होगा। भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े पुस्तकें अनिवार्य रूप से होंगी। सामाजिक कार्यों के लिए भी भवन उपलब्ध कराए जाएंगे।
- प्रदेश भर में कृष्ण मंदिरों का जीर्णोद्धार किया जाएगा।
- लगभग सभी राज्यों में भगवान कृष्ण की शिक्षा और जन कल्याण के कार्यों का प्रचार-प्रचार सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रतियोगिताएं व अन्य तरह से किया जाएगा।
