हॉस्टल में 12 साल की मासूम से 4 महीने तक होता रहा शोषण, सब्जी पहुंचाने वाला ही बना दरिंदा
भोपाल। सागर जिले के खुरई स्थित सरकारी छात्रावास में 12 वर्षीय आदिवासी बालिका के साथ दुष्कर्म हुआ है। छात्रावास में सब्जी पहुंचाने वाला एक दरिंदा पिछले चार महीने से आठवीं में पढ़ने वाली बालिका का शोषण कर रहा था, लेकिन छात्रावास का पूरा सिस्टम सोया पड़ा रहा।
नर्मदापुरम और सागर संभाग के जिलों में बालिका छात्रावासों की सुरक्षा का जायजा लिया तो परेशान करने वाली स्थिति सामने आई। सरकारी कागजों में बालिकाओं की सुरक्षा का जो सिस्टम चाकचौबंद है, वह जमीन पर बिखरा हुआ है। हालात ऐसे हैं कि कागजी सिस्टम में बेटियां पूरी तरह सुरक्षित नहीं दिख रहीं।
प्रदेश में वर्तमान में केवल कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावासों की संख्या 408 है, जहां लगभग 58,200 छात्राएं निवासरत हैं। वहीं आदिवासी बालिका छात्रावास, एससी-एसटी और ओबीसी छात्राओं के लिए अलग से छात्रावासों की संख्या हजारो मे है।
प्रत्येक छात्रावास में अधीक्षिका, सहायक अधीक्षिका, पुरुष चौकीदार, रसोइया और सहायिका सहित अन्य स्टाफ की व्यवस्था का प्रविधान किया गया है, लेकिन कई स्थानों पर अंशकालीन कर्मचारियों की तैनाती है, जिन्हें मामूली वेतन और सुविधाएं मिली हुई हैं।
कई स्थानों पर छात्रावास अधीक्षिका ने अपनी जगह किसी और को देखरेख के लिए तैनात कर रखा है। स्टाफ की उपलब्धता और निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल उठते रहे हैं। उच्च अधिकारियों द्वारा जिला स्तर पर छात्रावासों का निरीक्षण नहीं किया जाता है।
छात्रावासों में वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण और छात्राओं से संवाद का प्रविधान है, लेकिन कई स्थानों पर निरीक्षण निर्धारित समयानुसार नहीं हो पाता। इससे छात्रावासों की वास्तविक स्थिति और छात्राओं की समस्याएं समय पर सामने नहीं आ पाती हैं। स्कूल शिक्षा विभाग सागर जिले के इस घटना के बाद बालिका छात्रावासों में सुरक्षा आडिट और निगरानी व्यवस्था आनलाइन पोर्टल शुरू करेगा, जिससे मुख्यालय स्तर पर निगरानी हो सकेगी।
सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं व्यवस्थाएं
अधिकांश छात्रावासों में चारदीवारी का निर्माण सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं है। छात्रावासों में 24 घंटे सुरक्षाकर्मी की व्यवस्था हर जगह नहीं है। कुछ छात्रावासों में सीसीटीवी लगाए गए हैं, लेकिन उनकी नियमित निगरानी नहीं होती। रखरखाव में कमी देखी जा रही है।
काउंसलर्स नहीं होने से नहीं हो पाती काउंसलिंग
छात्राओं की मानसिक और भावनात्मक सुरक्षा के लिए काउंसलिंग की व्यवस्था तो निर्धारित है, लेकिन अधिकांश छात्रावासों में यह नियमित रूप से नहीं हो रही। कई स्थानों पर केवल विशेष शिविरों या निरीक्षण के दौरान ही काउंसलिंग कराई जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि छात्रावासों में स्थायी काउंसलर की नियुक्ति आवश्यक है।
शिकायतों का नहीं होता है निराकरण
छात्रावासों में शिकायत पेटी, वार्डन को सीधे शिकायत, हेल्पलाइन और जिला स्तर पर शिकायत निवारण व्यवस्था का प्रविधान है। इसके बावजूद कई मामलों में शिकायतों के समाधान में देरी होने की शिकायतें सामने आती रही हैं।
बालिकाओं की सुरक्षा के लिए यह होना था
छात्रावास में प्रवेश-निकास रजिस्टर बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर प्रतिबंध
महिला अधीक्षिका की अनिवार्य नियुक्ति
छात्राओं की रात्रिकालीन उपस्थिति दर्ज करना
छात्रावास परिसर में सीसीटीवी का प्रविधान
आपातकालीन संपर्क व्यवस्था-वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण
छात्राओं के लिए शिकायत निवारण प्रणाली-छात्राओं की बराबर काउंसलिंग
सागर की इस घटना के बाद छात्रावासों की सुरक्षा के लिए आनलाइन मानीटिरंग सिस्टम तैयार किया जाएगा। अधिकारियों को छात्रावासों की सतत निगरानी के आदेश दिए गए हैं।- डा. संजय गोयल, सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग
