MP में दूरस्थ क्षेत्र के मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी को विशेष भत्ता देने का इसी महीने हो सकता है निर्णय

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश के सभी जिलों में मेडिकल कॉलेज प्रारंभ करने की बात कई बार कह चुके हैं, लेकिन इसमें बड़ी चुनौती चिकित्सा शिक्षक (फैकल्टी) के रिक्त पदों को भरना है। इसके लिए सरकार विशेष पहल करने जा रही है। दूरस्थ क्षेत्र के मेडिकल कालेजों में पदस्थ होने वाले फैकल्टी को वेतन-भत्ते में जोड़कर लगभग 20 प्रतिशत तक अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।

इसके लिए इसी माह कैबिनेट में प्रस्ताव लाने की तैयारी है। स्वास्थ्य विभाग भी देख रहे उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने सोमवार को एक बैठक में अधिकारियों को कैबिनेट के लिए प्रस्ताव तैयार कर भेजने के लिए कहा है। अब अधिकारी यह मंथन करने में लगे हैं कि दूरस्थ क्षेत्र के लिए मापदंड क्या रखा जाए।

सीटे बढ़ाने की योजना

एक अधिकारी के अनुसार इसमें उन जिलों को शामिल किया जा सकता है जो छोटे और पिछड़े हैं और जिनमें आदिवासी विकासखंडों की संख्या अधिक है। इसी वर्ष शुरू हुए सिंगरौली और श्योपुर के मेडिकल कॉलेज भी इसमें सम्मिलित हो सकते हैं। दोनों कॉलेजों में फैकल्टी की स्थिति बहुत खराब है।

सिंगरौली में 116 पदों के विरुद्ध मात्र 20 फैकल्टी हैं। लगभग यही स्थिति श्योपुर मेडिकल कॉलेज की है। इन कालेजों में एमबीबीएस की 100-100 सीटें हैं। सरकार अगले शैक्षणिक सत्र से सीटें बढ़ाकर 150-150 करने की योजना बना रही है लेकिन चुनौती वर्तमान सीटों की मान्यता ही यथावत रखने की है।

सीहोर, बुधनी, दमोह और छतरपुर में मेडिकल कॉलेज के लिए भेजा प्रस्ताव

चिकित्सा शिक्षा संचालनालय ने सीहोर जिले के बुधनी, दमोह और छतरपुर में शैक्षणिक सत्र 2026-27 से मेडिकल कॉलेज प्रारंभ करने के लिए नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) को प्रस्ताव भेजा है। इसके अगले सत्र में पांच कॉलेज और प्रारंभ करने की योजना है।

सभी जगह फैकल्टी की भर्ती चुनौती होगी। बता दें, प्रदेश के सभी 19 शासकीय मेडिकल कॉलेजों को मिलाकर फैकल्टी के 50 प्रतिशत ही कार्यरत हैं। फैकल्टी की कमी से भावी डाक्टरों की पढ़ाई तो प्रभावित होती ही है, रोगियों को समय पर और सभी विशेषज्ञता में उपचार भी नहीं मिल पाता है।

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