भोपाल मेट्रो: अंडरग्राउंड ट्रैक की भारी लागत से बिगड़ेगा गणित

भोपाल, भारत माता चौराहे से लिली टॉकीज चौराहे तक भोपाल मेट्रो को अंडरग्राउंड बनाने की मांग पर फिलहाल मप्र मेट्रो प्रबंधन में सहमति नहीं बन पाई है। इसकी सबसे बड़ी वजह अंडरग्राउंड ट्रैक की भारी लागत और पहले से शुरू हो चुका निर्माण कार्य बताया जा रहा है। 22 जनवरी को पुलिस कंट्रोल रूम में हुई बैठक में भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने करीब 5.5 किमी लंबे इस रूट को अंडरग्राउंड करने की मांग रखी थी। उनका तर्क था कि यदि यहां वायाडक्ट बना तो राजभवन, न्यू मार्केट, मुख्यमंत्री निवास और लाल परेड ग्राउंड सहित पूरा वीआईपी जोन प्रभावित होगा।

मेट्रो सूत्रों का कहना है कि एलिवेटेड से अंडरग्राउंड ट्रैक में जाने के लिए पूरे अलाइनमेंट में बदलाव करना पड़ेगा। तकनीकी मानकों के अनुसार हर 100 मीटर में ट्रैक को सिर्फ 3 मीटर नीचे ले जाया जा सकता है। ऐसे में जमीन से 10-12 फीट नीचे मेट्रो ले जाने के लिए यह प्रक्रिया कई बार दोहरानी पड़ेगी। 2018 में केंद्र सरकार से मंजूर डीपीआर के आधार पर अलाइनमेंट, फंडिंग पैटर्न और टेंडर शर्तें तय हो चुकी हैं। एक साल से अधिक समय से काम चल रहा है। अब डीपीआर में बदलाव करने से पूरी परियोजना 2-3 साल पीछे जा सकती है और लागत भी काफी बढ़ेगी। यदि ब्लू लाइन में किसी तरह का बदलाव करना है तो पहले मेट्रो बोर्ड, फिर राज्य सरकार और अंत में केंद्र सरकार से मंजूरी लेना जरूरी होगा। फिलहाल प्रबंधन की राय में अंडरग्राउंड मेट्रो तकनीकी और आर्थिक रूप से व्यवहारिक नहीं है।

मेट्रो का तर्क- खर्च 200 करोड़/किमी बढ़ जाएगा एलिवेटेड मेट्रो में प्रति किमी करीब 150 करोड़ का खर्च आ रहा है। इसमें सिविल व सिस्टम वर्क शामिल हैं। मेट्रो प्रबंधन के अनुसार भारत माता से लिली टॉकीज के बीच पथरीले इलाके में अंडरग्राउंड ट्रैक बनाने पर लागत 350 करोड़ रु. प्रति किमी तक पहुंच जाएगी। इसके लिए केंद्र की अलग से मंजूरी जरूरी होगी।

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