बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस की विदाई का वक्त आया, प्रोफेसर से प्रशासक तक, 18 महीनों की विरासत, आगे क्या करेंगे?

ढाका: बांग्लादेश की 300 में से 299 सीटों के लिए वोटिंग शुरू हो चुकी है। अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद ये पहला संसदीय चुनाव है और इसपर दुनियाभर की खासकर, दक्षिण एशियाई देशों की काफी नजर है। हालांकि 35 प्रतिशत से ज्यादा वोटिंग हिस्सेदारी रखने वाली शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग को चुनाव नहीं लड़ने दिया गया है, फिर भी लोगों को उम्मीद है कि ये चुनाव देश में लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को मजबूत करेगा। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में ये चुनाव कराए जा रहे हैं, जिन्होंने निष्पक्ष चुनाव करवाने का वादा किया है, लेकिन बड़ा सवाल ये है कि खुद मोहम्मद यूनुस आज के इलेक्शन के बाद क्या करेंगे?

12 फरवरी यानि आज के चुनावों के बाद मोहम्मद यूनुस का मुख्य मकसद नई चुनी हुई सरकार को सत्ता का तेज ट्रांसफर करना होगा। उन्होंने लगातार कहा है कि चीफ एडवाइजर के तौर पर उनकी भूमिका एक अंतरिम "ट्रांज़िशन के गार्डियन" की है और उन्होंने स्थायी राजनीतिक ऑफिस की मांग करने से इनकार कर दिया है। मोहम्मद यूनुस ने कहा है कि चुनावी नतीजों का ऐलान होने के बाद वो नई सरकार को सारी शक्तियां सौंप देंगे।

जुलाई नेशनल चार्टर-2025 लागू करवाने की कोशिश
मोहम्मद यूनुस आज के चुनाव के बाद जुलाई नेशनल चार्टर-2025 को लागू करवाने की कोशिश करेंगे, जिसका फैसला भी आज ही होना है। अगल लोगों का वोट ‘हां’ में मिलता है तो इसके जरिए कुछ कानूनी सुधार पैकेज लागू करने की कोशिश होगी। 
  • भारत जैसे देशों की तर्ज पर दो सदनों वाली संसद का निर्माण करना
  • प्रधानमंत्री कार्यालय के लिए शत्तियों की सीमा तय करना
  • प्रधानमंत्री के लिए दो कार्यकाल लागू करना या 10 सालों का प्रस्ताव
  • शेख हसीना के खिलाफ हुए प्रदर्शन को संवैधानिक मान्यता देना

फिलहाल उनका प्रशासन चुनाव के बाद के समय में व्यवस्था बनाए रखने पर ध्यान दे रहा है, खासकर जब बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाला गठबंधन सत्ता के लिए मुकाबला कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक नई सरकार को शक्तियां सौंपने के बाद मोहम्मद यूनुस का इरादा ‘यूनुस सेंटर’ और ग्रामीण बैंक में अपने काम की तरफ पर लौटने का है और वे सोशल बिजनेस और गरीबी हटाने पर फोकस करेंगे।

हालांकि मोहम्मद यूनुस ने खुद राष्ट्रपति बनने की बातों को खारिज कर दिया है। लेकिन बांग्लादेश में चर्चा है कि राष्ट्रीय सहमति के आधार पर उन्हें बांग्लादेश के अगले राष्ट्रपति के लिए उम्मीदवार बनाया जाए। ऐसा करने का मकसद ये बताया जा रहा है कि नई सरकार को देश में मान्यता मिलने के साथ साथ स्थिरता आ सके।

मोहम्मद यूनुस को बांग्लादेश में कैसे जाना जाएगा?
मोहम्मद यूनुस को बांग्लादेश में ध्रुवीकरण करने वाले नेता के तौर पर याद रखा जाएगा। हालांकि फिर भी उन्होंने कई बातों के लिए याद रखा जाएगा। जैसे:-

बांग्लादेश को संभाला: उन्होंने अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार के गिरने के बाद अंतरिम सरकार के मुखिया के तौर पर देश को संभाला, देश को गृहयुद्ध में फंसने से रोका और टूटने से बचाया। इसके अलावा उन्हें जुलाई नेशनल चार्टर-2025 के लिए याद किया जाएगा, जिसमें बांग्लादेश संसदीय प्रणाली के लिए कुछ बड़े सुधार हैं। जैसे संसद में दो सदन, प्रधानमंत्री को बेलगाम होने से बचाने के लिए उसकी शक्ति को नियंत्रित करना।

डिप्लोमेटिक इंजीनियर: 
मोहम्मद यूनुस ने अपनी अंतर्राष्ट्रीय इज्जत का इस्तेमाल बांग्लादेश की इकोनॉमी को संभालने के लिए किया। उन्होंने IMF और वर्ल्ड बैंक से मदद हासिल की। टैरिफ कम करने के लिए अमेरिका से बात की। इसके अलावा उन्होंने चीन और पाकिस्तान से गहरे संबंध बनाए, जबकि भारत के साथ उन्होंने संबंध काफी खराब कर लिए हैं।

कट्टरपंथ को बढ़ावा दिया: मोहम्मद यूनुस भले ही शांति के लिए नोबेल पुरस्कार हासिल कर चुके हैं, लेकिन उनकी भी मानसिकता वही इस्लामिस्ट की ही निकली। उन्होंने जमात-ए-इस्लामी के तमाम चरमपंथी नेताओं को जेल से बाहर कर दिया और बांग्लादेश को एक कट्टर इस्लामिक देश बनाने के रास्ते पर ला खड़ा कर दिया है। हिंदुओं के साथ मारपीट, उनके घर जलाना और कई बार उनकी हत्या करना बांग्लादेश में अब आम हो चुका है। उन्होंने हिंदू हिंसा रोकने के लिए कुछ नहीं किया। बल्कि महसूस ऐसा हो रहा है कि ऐसा सबकुछ उनके इशारे पर ही किया जा रहा है।

बांग्लादेश में मोहम्मद नेतृत्व के शासनकाल में महंगाई थोड़ी कम हुई है, लेकिन बेरोजगारी भयानक स्तर पर बढ़ी है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर संघर्ष कर रहा है, कपड़ा इंडस्ट्री बदहाली के दौर से गुजर रही है और उनका ‘नया बांग्लादेश’ बनाने का वादा लोगों की पहुंच से काफी बाहर है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि मोहम्मद यूनुस तो चले जाएंगे, लेकिन नई सरकार अगर लोगों की उम्मीद पर खरा उतर नहीं पाएगी, इकोनॉमी को नहीं बचा पाएगी और सबसे अहम बात ये कि अगर कपड़ा इंडस्ट्री को बचाने में नाकाम रहती है तो देश में डगमगा सकता है।

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *