MP में सरकारी दफ्तरों का हाल- बेहाल, 10 बजे के बाद भी साहब नदारद; अस्पतालों में मरीज परेशान
भोपाल। राजधानी भोपाल में सहित जिलों के शासकीय कार्यालयों में समय पर उपस्थिति को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है। शुक्रवार सुबह 10 बजे के बाद भी कई प्रमुख दफ्तरों में अधिकारी-कर्मचारी नदारद मिले। नवदुनिया टीम ने राजधानी के कलेक्ट्रेट, लोकसेवा केंद्र, नगर निगम मुख्यालय, हाउसिंग बोर्ड और जय प्रकाश चिकित्सालय परिसर का निरीक्षण किया, जहां अधिकांश कुर्सियां खाली रहीं। जिलों में भी कलेक्ट्रेट सहित अन्य विभागों में ऐसे ही हालात रहे। यहां लोग परेशान नजर आए। सबसे ज्यादा परेशानी अस्पतालों में नजर आई, जहां मरीज और उनके परिजन बेहाल दिखे।नवदुनिया ने पहले ही कर दिया था सचेत
नवदुनिया ने शुक्रवार के अंक में वल्लभ भवन में औचक निरीक्षण की खबर प्रकाशित कर पहले ही आगाह किया था कि हम दफ्तरों से नदारद और लेट-लतीफ अधिकारियों-कर्मचारियों की फोटो सहित खबरें दिखाएंगे। मुख्यमंत्री जी, आपके औचक निरीक्षण से प्रेरित होकर नवदुनिया भी यह मुहिम शुरू कर रहा है। हम ऐसे अधिकारियों की तस्वीरें और सबूत पेश करेंगे, ताकि उन पर कार्रवाई से प्रदेश में सुशासन मजबूत हो सके।
जनता परेशान
जेपी अस्पताल परिसर : स्वास्थ्य विभाग के कई राज्य व जिला स्तरीय कार्यालयों में बायोमेट्रिक उपस्थिति में भी देरी।
राजधानी में ये हाल
कलेक्ट्रेट में औचक निरीक्षण : समय 10.05 बजे: कलेक्ट्रेट में स्थित खाद्य, शस्त्र, भू-अभिलेख व निर्वाचन शाखा में कर्मचारी अनुपस्थित मिले। 11 बजे तक कर्मचारी आते रहे।
नगर निगम मुख्यालय : 10 बजे के बाद तक अधिकारियों के केबिन खाली, एडीसी हर्षित तिवारी व एडीसी मुकेश शर्मा के कक्ष सूने।
जिलों का हाल
अशोकनगर: सरकारी टाइम टेबल फेल। कई कार्यालयों में अधिकारी-कर्मचारी देरी से पहुंचे, कुछ जगह ही समय पर उपस्थिति दिखी।
गुना: सरकारी दफ्तरों में अधिकारी व कर्मचारियों की लेटलतीफी जारी रही। 10 से 11 बजे तक अधिकतर शाखाएं खाली ही नजर आईं।
राजगढ़: एडीएम, एसडीएम, तहसीलदार समेत कई अधिकारियों के चैंबर बंद मिले। डीएसओ और जनपद सीईओ भी अनुपस्थित रहे।
नर्मदापुरम: सुबह 10 बजे के बाद भी सरकारी कार्यालयों में अधिकारी-कर्मचारी अनुपस्थित रहे। अस्पतालों में मरीज भी परेशान दिखे।
हरदा: कलेक्टर सहित कई अधिकारी समय पर नहीं पहुंचे। प्रमुख कार्यालयों में स्टाफ अनुपस्थित रहे। कुर्सियां और कक्ष खाली नजर आए।
सागर: सुबह 10:30 बजे पुराने कलेक्ट्रेट स्थित एसडीएम और तहसील कार्यालय में केवल एक भृत्य व एक बाबू उपस्थित मिला।
विदिशा: कई सरकारी कार्यालयों में सवा दस बजे अधिकारी-कर्मचारी अनुपस्थित मिले। कुर्सियां खाली रहीं, कुछ ही विभागों में समय पर उपस्थिति दिखाई दी।
सीहोर: जिले में मुख्यमंत्री के आदेशों के बावजूद अधिकारी-कर्मचारी अनुपस्थित रहे। दफ्तरों में सन्नाटा पसरा रहा और जनता काम के लिए परेशान होती रही।
बैतूल: कलेक्ट्रेट में अधिकारी बैठकों में व्यस्त रहे और कर्मचारी नदारद। दफ्तरों में सन्नाटा रहा, जिससे काम कराने आए लोग परेशान हुए। कई लौटकर चले भी गए।
कार्रवाई की तैयारी
सामान्य प्रशासन विभाग ने भी एक दिन पहले उपस्थिति की जांच की थी, जिसमें 10;30 से 11 बजे कर कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए थे। अब देर से आने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।
इन देशों में समय प्रबंधन सबसे बेहतर
जापान: सरकारी कर्मचारी समय से पहले आफिस पहुंचते हैं। देर से आना सामाजिक रूप से गलत माना जाता है।
जर्मनी: देर से कार्यस्थल पहुंचना प्रोफेशनल गलती माना जाता है। सरकारी प्रक्रियाएं तय समय पर।
सिंगापुर: सरकारी आफिस अत्यंत व्यवस्थित। डिजिटल सिस्टम से समय बर्बादी कम। देरी या लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई।
स्विट्जरलैंड: सटीक कार्य संस्कृति, समय पर सेवा देना सरकारी मानक।
फिनलैंड: कर्मचारियों पर भरोसा, पर जवाबदेही मजबूत। समय पालन स्वभाव का हिस्सा।
