भोपाल में परंपरा और पर्यावरण का अनूठा मेल, 2000 से अधिक स्थानों पर गोकाष्ठ से हुआ होलिका दहन

भोपाल। राजधानी में सोमवार रात ‘रंगोत्सव’ का आगाज उत्साह और उमंग के साथ हुआ। शहर के दो हजार से अधिक स्थानों पर शुभ मुहूर्त रात 1:26 से 2:38 बजे के बीच होलिका दहन किया गया। कुछ स्थानों पर प्रदोष काल शाम 6:22 से 8:53 बजे तक भी होली जलाई गई और अच्छे स्वास्थ्य व सुख-समृद्धि की कामना की गई।

होलिका दहन के साथ ही धुलेंडी के रंगोत्सव की औपचारिक शुरुआत हो गई। इस बार खास बात यह रही कि शहरवासियों ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए लकड़ी की बजाय गोकाष्ठ (गोबर से बनी लकड़ी) से होली जलाना प्राथमिकता में रखा। न्यू मार्केट, रोशनपुरा, नेहरू नगर, वैशाली नगर और कोलार सहित कई क्षेत्रों में देर रात तक उत्सव का माहौल बना रहा। शाहपुरा स्थित शैतानसिंह चौराहा और पुराने शहर के कर्फ्यू वाली माता मंदिर के पास लोकगीतों और नृत्य के बीच होलिका पूजन हुआ।

बाजारों में रौनक, घरों में पकवानों की खुशबू

सोमवार को बाजारों में होली की खरीदारी के लिए भीड़ उमड़ी रही। बच्चों में पिचकारियों और रंगों को लेकर खासा उत्साह दिखा। घरों में गुझिया और पारंपरिक पकवानों की खुशबू के बीच देर रात तक होलिका दहन की रस्में निभाई गईं। लोगों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर पर्व की शुभकामनाएं दीं।

चंद्रग्रहण के कारण चार मार्च को धुलेंडी

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार तीन मार्च को सूर्योदय से संध्या तक पूर्णिमा तिथि रहेगी और दोपहर 3:20 से शाम 6:47 बजे तक चंद्रग्रहण रहेगा। सूतक काल सुबह 6:20 बजे से प्रारंभ होगा। सूतक में रंग-गुलाल खेलना शुभ नहीं माना जाता, इसलिए धुलेंडी का पर्व चार मार्च को मनाया जाएगा। पुराने शहर में रंगारंग चल समारोह निकलेगा और मंदिरों में विशेष आयोजन होंगे।

होली दूज और रंग पंचमी

धुलेंडी के अगले दिन पांच मार्च को होली दूज मनाई जाएगी। इस दिन भाई दूज और यम द्वितीया पर्व भी रहेगा। कायस्थ समाज द्वारा चित्रगुप्त पूजा का आयोजन किया जाएगा। आठ मार्च को रंग पंचमी के साथ होली महोत्सव का समापन होगा। नए और पुराने शहर से रंगारंग चल समारोह निकलेंगे और पूरे दिन रंग-गुलाल का उत्साह रहेगा।

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