राज्यसभा चुनाव: डरे हुए तो NDA के नेता भी थे, वोट अलॉटमेंट का हिसाब-किताब देख साफ पता लग रहा

पटना: बिहार में राज्य सभा की पांचों सीटों पर जीत हासिल कर NDA के रणनीतिकार अपनी पीठ थपथपा सकते हैं, लेकिन एक सच यह भी है कि परिणाम की घोषणा के पहले अनजाने भय से सबसे ज्यादा सत्ता पक्ष के रणनीतिकार ग्रसित थे। परिणाम की घोषणा से पहले उन्हें भी आशंका थी कि कोई क्रॉस वोटिंग कर सकता है, किसी का वोट अमान्य भी हो सकता है या फिर कोई वोटिंग के दिन गायब रह सकता है। यह चिंता इसलिए भी थी कि जरा सी चूक से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को निर्धारित विधायकों का वोट नहीं मिला तो चुनाव कहीं हार न जाएं। NDA के रणनीतिकारों के इस अनजाने भय की कहानी कोई और नहीं बल्कि उम्मीदवारों के लिए अलॉट किए गए वोट ही कह रहे हैं। जानिए किसे कितने वोट अलॉट किये गए और क्यों?

मुख्यमंत्री को 44 वोट

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को राज्य सभा भेजने के लिए इनके रणनीतिकार कोई चूक की गुंजाइश रखने वाले नहीं थे। इनको लेकर पहले ही संशय की स्थिति बनी हुई थी। चर्चा यह थी कि कई विधायक नीतीश कुमार को राज्यसभा नहीं भेजना चाहते थे। उनकी भावना यह थी कि उन्हें बिहार में रह कर ही विकास के कार्य को आगे बढ़ाना चाहिए। ऐसे में NDA के रणनीतिकारों ने इस आशंका को देखते मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए 44 वोट अलॉट किए। ऐसा करने के पीछे तर्क यही था कि कहीं किसी का वोट गड़बड़ाया तो जीत के लिए निर्धारित संख्या 41 से कम न हो। इसी मनोभाव से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को 44 मत ,उपेंद्र कुशवाहा को 42 और रामनाथ ठाकुर को भी 42 मत। पांचवीं सीट शिवेश राम को 30 वोट अलॉट किए गए थे।

शक के दायरे में थे रालोमो के विधायक

राजनीतिक गलियारों में तो यह पहले से ही चर्चा रही कि उपेंद्र कुशवाहा से उनके विधायक नाराज थे। इस नाराजगी का कारण उपेंद्र कुशवाहा के द्वारा अपने पुत्र दीपक प्रकाश को मंत्री पद सौंपा जाना था। इस कारण से बाजपट्टी से रामेश्वर महतो, दिनारा से युवा विधायक आलोक सिंह और मधुबनी से माधव आनंद खुलकर असंतोष की लाइन पर चले गए थे। इन पर महागठबंधन की विशेष नजर थी। ऐसे में NDA के रणनीतिकारों ने वोट अलॉटमेंट करते समय यह ध्यान रखा कि ज्यादा-ज्यादा सीट अलॉट कर पांचवीं सीट को दूसरे वरीयता के सहारे जीता जाए

हम और लोजपा के विधायकों पर भी था शक

शक के दायरे में तो हम और लोजपा रामविलास के भी कुछ विधायक थे। हम के दो विधायकों (ज्योति देवी और दीपा मांझी) को ले कर तो वोट के दौरान एक वीडियो भी दिखा जिसमें दोनों तेजस्वी यादव के कमरे से AIMIM विधायकों के साथ ही बाहर निकल रही हैं। हालांकि बाद में सफाई भी आई कि यह औपचारिक मुलाकात थी। इसी तरह से लोजपा रामविलास के कई विधायकों के संपर्क में रहने के दावे भी किए गए। यही सब वजह थी कि सम्मानजनक जीत के हकदार बनने के लिए NDA के रणनीतिकारों ने वोट अलॉट करने में भी पूरी सावधानी बरती और आखिर में सफलता पा ली।

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