भोपाल, इंदौर और नर्मदापुरम में आयोजित होंगे सिंघाड़ा, मखाना व सब्जी महोत्सव

 भोपाल। वर्ष 2026 कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इसमें किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए किसानों को उद्यानिकी फसलों के साथ पशुपालन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी कड़ी में तय किया गया है कि पुष्प के बाद अब सिंघाड़ा, मखाना और सब्जी महोत्सव किए जाएंगे।

ये भोपाल, इंदौर और नर्मदापुरम में होंगे। इसमें उद्यमी, निर्यातक, तकनीकी मार्गदर्शकों को आमंत्रित किया जाएगा जो किसानों को परंपरागत खेती के स्थान पर इन फसलों की खेती के लाभ बताएंगे।

चार जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर मखाना उत्पादन

जलीय फसल होने के कारण जिन किसानों की भूमि पर तालाब है या गहरे खेत, वे मखाने की फसल में अनुदान योजना का लाभ ले सकते हैं। प्रदेश के चार जिलों नर्मदापुरम, बालाघाट, छिंदवाड़ा और सिवनी में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर मखाना उत्पादन का काम किया जा रहा है। इसके तहत 150 हेक्टेयर क्षेत्र में मखाना की खेती विकसित की जाएगी, जिस पर लगभग 45 लाख रुपये का खर्च आएगा।

कुल लागत का 40 प्रतिशत तक अनुदान मिलेगा

किसानों को 75 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर या कुल लागत का 40 प्रतिशत तक अनुदान मिलेगा। अब तक 99 किसानों ने ऑनलाइन आवेदन किए हैं। उद्यानिकी विभाग किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन के साथ-साथ बीज, प्रशिक्षण और प्रसंस्करण सुविधाएं भी देगा।

केंद्र सरकार ने मखाना बोर्ड का गठन किया है

इस खेती का विस्तार जबलपुर, कटनी, मंडला, डिंडौरी, रीवा, शहडोल, रायसेन, अनूपपुर, पन्ना और सतना में किया जाएगा। मखाने की मांग न केवल भारत में बल्कि अरब देशों और यूरोप में भी लगातार बढ़ रही है। बढ़ती मांग को देखते हुए ही भारत सरकार ने मखाना उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए मखाना बोर्ड का गठन किया है।

सिंघाड़ा की खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा

इसी तरह सिंघाड़ा की खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। 2025-26 में भोपाल (बिशनखेड़ी), छतरपुर, नर्मदापुरम, रीवा और सतना सहित अन्य जिलों में 1,078 हजार हेक्टेयर में इसकी खेती की गई। अनुमानित उत्पादन 2,739 हजार टन है। इसकी खेती भोपाल (बिशनखेड़ी), छतरपुर, नर्मदापुरम, रीवा और सतना जिलों के तालाबों व जलभराव वाले खेतों में की जाती है।

मखाना और सिंघाड़ा महोत्सव नर्मदापुरम में प्रस्तावित

सरकार ने तय किया है कि किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए उद्यानिकी फसलों को प्रोत्साहित किया जाएगा। मई के तीसरे सप्ताह में मखाना और सिंघाड़ा महोत्सव नर्मदापुरम में प्रस्तावित है। सिंघाड़ा, मखाना के साथ सब्जी की खेती को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।

सब्जी महोत्सव अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में इंदौर में

प्रदेश में सब्जी का क्षेत्र लगातार बढ़ रहा है। यह 2022-23 में 11.88 लाख हेक्टेयर था, जो 2025-26 में 13.36 लाख हेक्टेयर से अधिक हो गया। उत्पादन जहां 236 लाख टन था, वह अब 257 लाख टन पहुंच गया।

इसे और बढ़ाकर किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए पोषण से भरपूर ब्रोकली, चेरी टमाटर, सलाद पत्ता, रंगीन शिमला मिर्च को उज्जैन, शाजापुर, देवास, आगर मालवा, रतलाम, मंदसौर, नीमच, इंदौर, धार, झाबुआ, आलीराजपुर, खरगोन, बड़वानी, खंडवा, बुरहानपुर, ग्वालियर, अशोकनगर, दतिया, शिवपुरी और गुना में प्रोत्साहित किया जाएगा। सब्जी महोत्सव अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में इंदौर में किया जाएगा।

तालाब या दो-तीन फीट गहरे पानी वाले खेत में हो सकती है खेती

मखाना की खेती के लिए तालाब या फिर दो-तीन फीट गहरे पानी वाले खेत होना आवश्यक है। ऐसे किसान, जो तालाब खेती के लिए लीज पर लेते हैं या फिर जिनके खेतों में पानी भरा रहता है, वे इस खेती को कर सकते हैं। दिसंबर-जनवरी में बीज बोया जाता है और लगभग छह माह में फसल तैयार हो जाती है। फूल लगने के बाद फल पकने पर बीज तालाब की सतह पर गिरते हैं, जिन्हें निकालकर सुखाया और भुना जाता है।

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *