ईरान युद्ध पर अमेरिका और इजरायल अब साथ नहीं? गैस फील्ड पर हमले ने सामने ला दी नेतन्याहू और ट्रंप की दरार
तेल अवीव/वॉशिंगटन: अमेरिका और इजरायल की दोस्ती को बेहद ही गहरी माना जाता रहा है। लेकिन ईरान युद्ध के पहले 20 दिनों ने दो पुराने दोस्तों के बीच मतभेदों को उजागर कर दिया है। इसकी शुरुआत ईरान के सबसे बड़े गैसफील्ड पार्स पर इजरायल के हमले से हुई, जिससे खाड़ी में अमेरिका के सहयोगी देश नाराज हो गए। इसके बाद डोनाल्ड ट्रंप को यह कहना पड़ा कि उन्हें इस हमले के बारे में पहले से कुछ पता नहीं था।
ट्रंप और नेतन्याहू में मतभेद
ट्रंप का यह दावा चौंकाने वाला था, खासतौर पर जब अमेरिका और इजरायल एक साथ ईरान पर हमले कर रहे हैं। इस बात को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या अमेरिका और इजरायल ईरान में युद्ध को लेकर पूरी तरह एक साथ हैं या दोनों के बीच विभाजन बढ़ रहा है।
इजरायल और अमेरिका में सबकुछ ठीक नहीं
ट्रंप का नेतन्याहू को हमला करने से रोकने का आदेश देना यह दिखाता है कि इजरायल और अमेरिका में कुछ तो है, जो ठीक नहीं है। दोनों के हमलों के पैटर्न से भी यह पता चलता है। अमेरिका ने अपने हमलों में ईरान की सेना, नेवी और बैलिस्टिक मिसाइल सुविधाओं को निशाना बनाने पर जोर दिया है। इसके उलट इजरायल ने चुन-चुनकर शीर्ष लोगों की हत्याएं की हैं और आम नागरिकों को बुनियादी ढांचों पर बम बरसाए हैं।
क्या इजरायल ने अमेरिका को युद्ध में घसीटा?
इस बीच यह कहा जा रहा है कि ईरान में अमेरिका एक अंतहीन युद्ध में फंसने जा रहा है और इसमें उसे इजरायल ने घसीटा है। हालांकि, इजरायली प्रधानमंत्री ने इन आरोपों को खारिज किया। नेतन्याहू ने कहा कि ‘क्या किसी के दिमाग में ये बात आ सकती है कि कोई राष्ट्रपति ट्रंप को बताए कि उन्हें क्या करना है? कम ऑन।’ अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप भी इस बात से इनकार किया कि इजरायल ने उन्हें मजबूर किया। इस महीने की शुरुआत में ट्रंप ने ऐसे ही एक सवाल के जवाब में कहा था कि हो सकता है कि मैंने उन्हें मजबूर किया हो। ट्रंप ने कहा है कि उनका मानना है कि ईरान पहले हमला करने वाला था।
इजरायल के हाथों हाईजैक अमेरिका
हालांकि, ईरान में सत्ता परिवर्तन लाने की इजरायल की कोशिशों और अहम बुनियादी ढांचों पर हमलों को लेकर अमेरिका के सहयोगी नाराज हैं। उनका कहना है कि वॉशिंगटन ने अपनी विदेश नीति को नेतन्याहू सरकार के हाथों हाईजैक होने दिया है। ओमान के विदेश मंत्री बदर अलबुसैदी ने इस युद्ध में शामिल होने को अमेरिकी प्रशासन की सबसे बड़ी भूल बताया। उन्होंने लिखा, ‘यह अमेरिका का युद्ध नहीं है और ऐसी कोई संभावना नहीं है कि इजरायल और अमेरिका, दोनों को वह मिल सके जो वह चाहते हैं।’
