राहत व पुनर्वास कार्यों की समीक्षा, पीड़ितों को सहायता और नियुक्ति प्रक्रिया में तेजी लाए : कलेक्टर ध्रुव

दंतेवाड़ा । कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव की अध्यक्षता में जिला कार्यालय के डंकनी सभाकक्ष में जिला स्तरीय राहत एवं पुनर्वास समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में पूर्व में 16 फरवरी 2026 को दिए गए निर्देशों के पालन की समीक्षा करते हुए नक्सल प्रभावित परिवारों, आत्मसमर्पित नक्सलियों तथा पुनर्वास से जुड़े विभिन्न मामलों पर विस्तार से चर्चा हुई। 

बैठक में जानकारी दी गई कि आत्मसमर्पित नक्सलियों के चिकित्सा प्रतिपूर्ति हेतु कार्यालयीन आदेश जारी कर 5 लाख 31 हजार 234 रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। वहीं नक्सल पीडि़त परिवारों को राहत प्रदान करने के तहत एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए स्वर्गीय आयतु कुंजाम के पुत्र संजीव कुंजाम को शासकीय सेवा में नियुक्ति देने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है, जिसके लिए संबंधित विभाग को पत्र प्रेषित किया गया है। इसके साथ ही पुनर्वास नीति के अंतर्गत भू-खण्ड सुविधा के मामले में भी प्रगति हुई है। इसके अलावा नक्सल हिंसा में मृतक जोगा पोडि़याम की पत्नी बागी पोडि़यामी को दंतेवाड़ा में आवास हेतु 8 लाख रुपये की राशि, नक्सली हिंसा में मृत स्व. मनार अकाली की पत्नी मोतीबाई तथा स्व. हड़मा हेमला के परिजनों को 5-5 लाख रुपये की सहायता राशि स्वीकृत कर राहत प्रदान की गई है।

इसके अलावा आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास को मजबूती देते हुए लाईवलीहुड कॉलेज में प्रशिक्षणरत 135 युवाओं को प्रशिक्षण अवधि के स्टायपेण्ड के रूप में लगभग 24 लाख रुपये से अधिक की राशि उनके बैंक खातों में अंतरित की गई है। वहीं नक्सल हिंसा में गंभीर रूप से घायल बीजापुर निवासी जुरूराम कतलाम के उपचार के लिए मां दंतेश्वरी संजीवनी सहायता कोष से 1.50 लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता भी स्वीकृत की गई है। बैठक में यह भी बताया गया कि पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पित नक्सलियों को प्रोत्साहन देने के लिए विभिन्न आदेशों के माध्यम से कुल मिलाकर करोड़ों रुपये की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत की गई है, जिसमें 33 आत्मसमर्पित नक्सलियों को 76 लाख रुपये से अधिक की राशि तथा शस्त्र सहित आत्मसमर्पण करने वालों को अतिरिक्त प्रोत्साहन भी शामिल है।

बैठक में इसके साथ ही नवीन आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर बैठक में नवीन आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा भी की गई। इस दौरान न्याय प्रणाली को अधिक सुदृढ़ और समयबद्ध बनाने पर विशेष जोर दिया गया। न्याय श्रुति योजना के तहत सभी संबंधित कार्यालयों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा उपलब्ध कराने, मामलों में निर्धारित 60 और 90 दिनों की समय-सीमा के भीतर न्यायालय में अभियोग प्रस्तुत करने तथा गंभीर अपराधों में फोरेंसिक जांच की अनिवार्यता सुनिश्चित करने तथा इस्तगासा धारा-126, 135 जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक के दौरान अपर कलेक्टर राजेश पात्रे, एडिशनल एसपी जीतेन्द्र  खुंटे   सहित अन्य संबधित विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

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