ढाई साल में ‘मध्यावधि चुनाव’, हार मिली तो घर बैठेंगे, बीजेपी के वो नेता, जो जज साहब को कॉल कर चर्चा में आए

कटनी: मध्य प्रदेश की राजनीति में अपनी बेबाकी और संपदा के लिए मशहूर विजयराघवगढ़ विधायक संजय सत्येंद्र पाठक ने एक बार फिर सियासी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। विधायक पाठक ने सार्वजनिक मंच से घोषणा की है कि वे अपने 5 साल के कार्यकाल के आधे समय यानी ढाई साल पूरे होने पर अपनी ही विधानसभा में सेल्फ मध्यावधि चुनाव कराएंगे। उन्होंने साफ किया है कि यदि क्षेत्र की 51 फीसदी जनता ने उनके पक्ष में मतदान नहीं किया, तो वे तत्काल अपने पद से इस्तीफा दे देंगे।

बूथ पर लगेगी मतपेटी

यह कोई सामान्य जनमत संग्रह नहीं, बल्कि पूरी तरह से आधिकारिक चुनाव की तर्ज पर आयोजित प्रक्रिया होगी। विधायक संजय पाठक के अनुसार, विजयराघवगढ़ के हर बूथ पर मतदान पेटी रखी जाएगी। क्षेत्र के करीब डेढ़ से दो लाख मतदाता इस प्रक्रिया में हिस्सा लेंगे। खास बात यह है कि यह पूरी कवायद विधायक की अपनी लोकप्रियता और कार्यशैली की समीक्षा के लिए है।

क्यों लिया यह फैसला?

संजय पाठक का यह कदम केवल भावनात्मक नहीं बल्कि एक सोची-समझी पॉलिटिकल अकाउंटेबिलिटी का हिस्सा है। पाठक यह संदेश देना चाहते हैं कि वे कुर्सी से नहीं, बल्कि जनता के भरोसे से बंधे हैं। हाल ही में वह अपनी पत्नी और बेटे से जुड़े मामले में जज साहब को फोन करने को लेकर चर्चा में आए। अदालत ने उन पर क्रिमिनल एक्ट लगाने के निर्देश दिए। विधायक ने इसके लिए माफी भी मांगी लेकिन अदालत का कहना है कि उन्हें अदालत में खड़े होकर माफी मांगनी चाहिए।

जनता और विपक्ष की नजरें

कैमोर में हुई इस घोषणा के बाद स्थानीय राजनीति गरमा गई है। जहां समर्थकों में उत्साह है, वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह भाजपा के भीतर अपनी ताकत दिखाने का एक तरीका भी हो सकता है। ढाई साल बाद होने वाली इस वोटिंग के नतीजे यह तय करेंगे कि 2028 के चुनाव में पाठक की राह कितनी आसान या मुश्किल होने वाली है।

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