सीजफायर होते ही भारत के लिए आई गुड न्यूज, विश्व बैंक ने बढ़ा दिया ग्रोथ का अनुमान, दे दी शाबाशी
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर होते ही भारत के लिए गुड न्यूज आई है। विश्व बैंक ने बुधवार को भारत के ग्रोथ के अनुमानों को बढ़ा दिया है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ऐसा किया गया है। उसने पिछले अक्टूबर को भारत के विकास अनुमान को 6.3% रखा था। अब इसे बढ़ाकर 6.6% कर दिया है। इसका कारण मजबूत घरेलू मांग और निर्यात में शानदार प्रदर्शन बताया गया है।
हालांकि, विश्व बैंक ने यह भी कहा कि मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष से पैदा हुई मुश्किलों के कारण पिछले वर्षों की तुलना में विकास की रफ्तार थोड़ी धीमी रहने की उम्मीद है।
विश्व बैंक का ताजा अपडेट और क्या कहता है?
विश्व बैंक के ताजा ‘दक्षिण एशिया आर्थिक अपडेट’ के अनुसार,
- वित्त वर्ष 2025-26 में अर्थव्यवस्था के 7.6% की दर से बढ़ने का अनुमान है।
- वित्त वर्ष 2024-25 में भारत की आर्थिक विकास दर 7.1% थी।
- भारत की ग्रोथ मजबूत घरेलू मांग और निर्यात से सहारा मिलेगा।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विकास दर का अनुमान थोड़ा ज्यादा यानी 6.9% लगाया है।
GST कटौती का फायदा दिखना शुरू होगा
रिपोर्ट में बताया गया है कि गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) में कटौती से वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में उपभोक्ता मांग को बढ़ावा मिलने की संभावना है। हालांकि, वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की ऊंची कीमतें महंगाई बढ़ा सकती हैं। साथ ही इसके चलते परिवारों की खर्च करने की क्षमता भी सीमित होने का डर है।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘भारत में मजबूत मांग, खाने-पीने की चीजों की कीमतों का सामान्य होना और ऊर्जा की बढ़ती कीमतें वित्त वर्ष 2026-27 में महंगाई को ऊपर ले जा सकती हैं।’
ये दिख रही हैं मुश्किलें
बढ़ती अनिश्चितता और उत्पादन लागत में बढ़ोतरी के कारण निवेश में भी धीमी रफ्तार से बढ़ोतरी की संभावना है। भले ही भारत के निर्यात को अमेरिका और यूरोपीय संघ (ईयू) जैसे बाजारों तक बेहतर पहुंच से फायदा मिल सकता है। लेकिन, प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में विकास की धीमी रफ्तार इन फायदों को कम कर सकती है।
पूरे दक्षिण एशिया के लिए अनुमान घटाया
पूरे दक्षिण एशिया में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 2025 के 7% से घटकर 2026 में 6.3% रहने का अनुमान है। इसका मुख्य कारण वैश्विक ऊर्जा बाजारों में आई रुकावटें हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि 2025 में उम्मीद से ज्यादा मजबूत विकास दर का मुख्य श्रेय भारत की घरेलू मांग और श्रीलंका की अर्थव्यवस्था में आई तेजी को जाता है।
विश्व बैंक के दक्षिण एशिया के उपाध्यक्ष जोहान्स ज़ुट ने कहा, ‘मुश्किल वैश्विक माहौल के बावजूद दक्षिण एशिया के विकास की संभावनाएं मजबूत बनी हुई हैं।’
दक्षिण एशियाई देशों ने दूसरी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के औसत के मुकाबले दोगुनी औद्योगिक नीतियां लागू कीं। लेकिन, उनके नतीजे मिले-जुले रहे।
इस मामले में भारत दुनिया के टॉप 10 देशों में शामिल
रिपोर्ट में बताया गया है कि 2022 से 2025 के बीच शुरू की गई नई औद्योगिक नीतियों की संख्या के मामले में भारत दुनिया के शीर्ष 10 देशों में शामिल रहा।
विश्व बैंक समूह की दक्षिण एशिया की मुख्य अर्थशास्त्री फ्रांजिस्का ओन्सॉर्गे ने कहा, ‘औद्योगिक नीतियों के मामले में दक्षिण एशिया की मिली-जुली सफलता का एक कारण इस क्षेत्र के कुछ देशों में नीतियों को लागू करने की सीमित क्षमता, वित्तीय गुंजाइश और बाजार का छोटा आकार होना है।’
