कोरोना काल के बाद MP में 60 प्रतिशत बढ़ा पंजीयन राजस्व, 5 साल में 68 लाख रजिस्ट्रियां, सरकार के खजाने में आए 51,799 करोड़ रुपये

भोपाल। कोरोना काल की मार झेलने के बाद हर कोई अपने घर का सपना लिए हुए बैठा था, जिसको काफी हद तक लोगों ने पूरा भी कर लिया है। एक तरफ जहां पंजीयन विभाग बीते तीन साल से प्रॉपर्टी की दरों में औसत वृद्धि कर रहा है तो वहीं लोग भी अपने बजट के अनुसार जमीन, घर, प्लॉट आदि की खरीदारी कर रहे हैं। ऐसे में लोगों का सपना तो पूरा हुआ ही, साथ ही विभाग को भी अच्छा राजस्व प्राप्त हुआ है। जिससे प्रदेश में पंजीयन राजस्व में 60 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

बीते पांच साल में करीब 68 लाख 75 हजार रजिस्ट्रियों से करीब 51 हजार 799 करोड़ रुपये राजस्व मिला है। बता दें कि प्रदेश में एक लाख पांच हजार स्थानों में से 65 हजार स्थानों पर 16 प्रतिशत तक प्रॉपर्टी की दरों में बढ़ोतरी की गई है। जानकारी के अनुसार कोरोना काल 2020 -21 में महामारी के कारण सभी तरह के कारोबार या तो स्थिर हो गए थे या फिर पूरी तरह से बंद हो गए थे। जैसे-जैसे कोरोना काल का समय बीता और सबकुछ सामान्य होने लगा तो लोगों ने प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त में रुचि दिखाना शुरू किया।

यही कारण रहा कि वित्तीय वर्ष 2021-22 में 11 लाख 42 हजार 187 रिकॉर्ड रजिस्ट्री हुईं, जिनसे पंजीयन विभाग को आठ हजार 160 करोड़ रुपये का राजस्व मिला। ऐसे में एक बड़ी महामारी के बाद इतनी बड़ी संख्या में प्रॉपर्टी की खरीद- फरोख्त होना रियल एस्टेट कारोबार में उछाल आना दर्शाता है। इसके बाद हर वित्तीय वर्ष में लगातार रजिस्ट्रियों व राजस्व का आंकड़ा बढ़ता गया और पंजीयन विभाग को अच्छा राजस्व मिला है। बीते वित्तीय वर्ष 2025-26 में 14 लाख 58 हजार 194 रजिस्ट्रियों से करीब 13 हजार 67 करोड़ रुपये विभाग को मिले हैं।

रजिस्ट्री करवाने पर चुकाना होता है 12.5 प्रतिशत शुल्क

मध्यप्रदेश में प्रापर्टी की रजिस्ट्री करवाने पर शहरी क्षेत्र में 12.5 प्रतिशत शुल्क चुकाना होता है।जिसमें 9.5 प्रतिशत स्टांप ड्यूटी और तीन प्रतिशत पंजीकरण शुल्क शामिल है। जबकि महिलाओं के नाम पर रजिस्ट्री करवाने पर कुल 10.5 प्रतिशत ही कुल शुल्क चुकाना पड़ता है।इसी तरह ग्रामीण क्षेत्र में पुरुषों के रजिस्ट्री करवाने पर 9.5 प्रतिशत और महिलाओं के रजिस्ट्री करवाने पर 7.5 प्रतिशत शुल्क चुकाना होता है।

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