चांदी ने गंवाई इस साल की पूरी बढ़त, क्या रह गया भाव, खरीदने का सही समय है

नई दिल्ली: चांदी की कीमत में पिछले साल 170% तेजी आई थी और जनवरी में भी यह 74% उछली थी। लेकिन हाल में इसकी कीमत में काफी गिरावट आई है और उसके इस साल की पूरी बढ़त गंवा दी है। पिछले साल इसकी क्लोजिंग लेवल 2.41 लाख रुपये प्रति किलो था लेकिन अभी यह 2.38 लाख रुपये पर ट्रेड कर रहा है। तीन महीने पहले इसकी कीमत 4.39 लाख रुपये पहुंच गई थी लेकिन उसके बाद इसमें करीब 2 लाख रुपये की गिरावट आई है। अचानक आई इस गिरावट ने जानकारों और निवेशकों को सकते में डाल दिया है। सवाल यह है कि क्या यह चांदी खरीदने का सही समय है?

जानकारों का कहना है कि चांदी की कीमत में गिरावट के तीन बड़े कारण हैं। पहला कारण पश्चिम एशिया संकट है। अमूमन संकट के समय सोने और चांदी की कीमत में तेजी आती है क्योंकि इन्हें सुरक्षित निवेश समझा जाता है। लेकिन इस बार यह धारणा गलत साबित हुई है क्योंकि दुनिया में बढ़ रहे तनाव और पश्चिम एशिया में जारी लड़ाई के बावजूद सोने और चांदी की कीमत में गिरावट आई है।

क्यों गिरी चांदी?

कच्चे तेल की कीमत में तेजी और बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव ने शुरुआत में फाइनेंशियल मार्केट्स में जोखिम से बचने का व्यापक माहौल पैदा कर दिया था। इससे निवेशकों ने नकदी जुटाना शुरू कर दिया और सभी प्रकार के एसेट्स में लेवरेज्ड पोजीशन कम करने लगे। इस कारण सुरक्षित समझी जाने वाली सोने जैसी एसेट्स में भी शॉर्ट-टर्म सेलिंग का दबाव देखा गया।

दूसरी वजह यह रही कि डॉलर की मजबूती और फेडरल रिजर्व के रुख के कारण सिल्वर जैसी नॉन-यील्डिंग एसेट्स की अपील कम हुई है। डॉलर के मजबूत होने से दूसरी करेंसी वालों के लिए चांदी महंगी हो गई। इससे इसकी निवेश डिमांड और फिजिकल डिमांड में गिरावट आई है। प्रॉफिट-बुकिंग से भी चांदी की कीमत में गिरावट आई है। मिडिल ईस्ट में संघर्ष बढ़ने के कारण चांदी की कीमत में उतार चढ़ाव बढ़ी है। ऐसे में ट्रेडर्स मुनाफावसूली में लग गए।

क्या कह खरीदने का सही समय है?

टाटा म्यूचुएल फंड ने एक रिपोर्ट में कहा, "सपोर्टिव फंडामेंटल्स और बाजार की अनिश्चितताओं को देखते हुए चांदी में निवेश करना चाहिए। डॉलर में तेजी या तनाव कम होने के कारण कीमतों में आने वाली कोई भी गिरावट से चांदी में निवेश किया जा सकता है।" रिपोर्ट में कहा गया है कि कीमतों में तेजी के बाद गिरावट आना स्वाभाविक है और इससे कीमती धातुओं के लिए लॉन्ग टर्म बुलिश आउटलुक पर कोई असर नहीं पड़ता। हालिया गिरावट के बावजूद चांदी के फंडामेंटल्स मजबूत बने हुए हैं।चांदी की इंडस्ट्रियल मांग मजबूत है और लगातार बढ़ रही है। चांदी की कुल खपत में इंडस्ट्रियल डिमांड की हिस्सेदारी 60 फीसदी से ज्यादा है। कई सेक्टर में इसका यूज बढ़ रहा है। साथ ही चीन में इसकी इनवेस्टमेंट डिमांड बनी हुई है। इससे लॉन्ग टर्म में चांदी की कीमत उच्च स्तर पर बने रहने की उम्मीद है। एमसीएक्स पर 5 मई की डिलीवरी वाली चांदी की कीमत आज कारोबार के दौरान 2,36,370 रुपये तक गिरी। पिछले सत्र में यह 2,41,824 रुपये पर बंद हुई थी। इस तरह इसमें करीब 5,400 रुपये की गिरावट आई।

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