कौन हैं अमरेंद्र कुमार पांडेय? जिनकी गिरफ्तारी पर कोर्ट ने लगाई रोक, मामला भी जान लीजिए

गोपालगंज: जनता दल यूनाइडेट (जेडीयू) के विधायक अमरेंद्र कुमार पांडेय उर्फ पप्पू पांडेय और उनके सीए राहुल तिवारी को आज मंगलवार को कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। गोपालगंज व्यवहार न्यायालय के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश-3 ने पप्पू पांडेय और उनके सीए की गिरफ्तारी पर फिलहाल के लिए रोक लगा दी है। आइए जानते हैं कौन हैं अमरेंद्र कुमार पांडेय उर्फ पप्पू पांडेय? और क्या है मामला…

पहले जानते हैं आज कोर्ट में क्या हुआ?

गोपालगंज व्यवहार न्यायालय में जेडीयू विधायक की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद मनन कुमार मिश्रा ने पक्ष रखा। उन्होंने अपने मुवक्किल के बचाव में तर्क दिया कि यह विशुद्ध रूप से एक पुराना भूमि विवाद है, जिसे आपराधिक रंग देने की कोशिश की गई है। इस मामले में शिकायतकर्ता ने पहले ही सिविल सूट फाइल किया हुआ है। ऐसे में यह मामला पुलिसिया कार्रवाई के बजाय कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है।

अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद केस डायरी का अध्ययन करने का निर्णय लिया है। विधायक के साथ-साथ उनके भाई सतीश पांडेय और अन्य आरोपियों से जुड़े मामलों की सुनवाई भी 7 मई को निर्धारित की गई है। अदालत ने तब तक के लिए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। यानी पुलिस अब 7 मई तक पप्पू पांडेय को गिरफ्तार नहीं कर सकेगी।

अमरेंद्र कुमार पांडेय उर्फ पप्पू पांडेय से जुड़ा मामला क्या?

कुचायकोट विधानसभा सीट से दबदबा रखने वाले अमरेंद्र कुमार पांडेय उर्फ पप्पू पांडेय, उनके भाई सतीश पांडेय और सीए राहुल तिवारी के खिलाफ भू-माफियाओं को संरक्षण देने और जमीन कब्जाने के गंभीर आरोप में गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था। जमीन का ये मामला कुचायकोट थाना क्षेत्र के बेलवा गांव से जुड़ा है। इस मामले में कुचायकोट थाने में मामला दर्ज है। पुलिस इसी मामले में विधायक की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही थी, लेकिन अब कोर्ट के उनकी गिरफ्तारी पर अस्थायी रोक लगा दी है।

कौन हैं अमरेंद्र कुमार पांडेय उर्फ पप्पू पांडेय?

अमरेंद्र कुमार पांडेय गोपालगंज की कुचायकोट सीट से जदयू के कद्दावर विधायक हैं। अपने क्षेत्र में लोगों के बीच वो ‘पप्पू पांडेय’ के नाम से मशहूर हैं। उनका और उनके परिवार का क्षेत्र में खासा राजनीतिक प्रभाव है, हालांकि वे अक्सर विभिन्न विवादों और कानूनी पचड़ों के कारण सुर्खियों में बने रहते हैं।

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