शाह की जगदलपुर में 4 मुख्यमंत्रियों के साथ मीटिंग

जगदलपुर, बस्तर में पहली बार मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक चल रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हो रही इस हाई-प्रोफाइल बैठक में छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मौजूद हैं।

इस बैठक में नक्सल उन्मूलन, राज्यों के बीच इंटेलिजेंस शेयरिंग, आदिवासी कल्याण, अंतरराज्यीय विवादों के निपटारे और डिजिटल गवर्नेंस पर चर्चा हो रही है। साथ ही रेल नेटवर्क के अपग्रेडेशन पर भी फोकस रखा गया है।

राज्य की बदली तस्वीर दिखाने की कोशिश

बस्तर लंबे समय तक नक्सल हिंसा के कारण देशभर में चर्चा का केंद्र रहा है। ऐसे में केंद्र सरकार की यहां क्षेत्रीय परिषद की बैठक करवाना केवल प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं माना जा रहा, बल्कि यह एक बड़ा राजनीतिक और रणनीतिक संदेश भी है।

इससे यह बताने की कोशिश है कि बस्तर अब सिर्फ नक्सल प्रभावित इलाका नहीं, बल्कि विकास और प्रशासनिक गतिविधियों का नया केंद्र बन रहा है।

जिस इलाके में कभी बड़े नेताओं के दौरे सुरक्षा कारणों से सीमित रहते थे, वहां अब चार राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय मंत्रियों की मौजूदगी यह संकेत दे रही है कि सुरक्षाबलों की कार्रवाई और सरकार की रणनीति से हालात में बदलाव आया है।

नक्सलवाद पर सख्त संदेश देने की तैयारी

गृहमंत्री शाह लगातार यह कह चुके हैं कि केंद्र सरकार नक्सलवाद को खत्म करने के लिए निर्णायक रणनीति पर काम कर रही है।

पिछले कुछ महीनों में बस्तर संभाग में सुरक्षाबलों की कार्रवाई तेज हुई है और कई बड़े नक्सली कमांडर मारे गए या गिरफ्तार किए गए हैं। 31 मार्च 2026 को बस्तर को नक्सलवाद मुक्त घोषित कर दिया गया है।

विकास, समन्वय और सीमावर्ती मुद्दों पर होगी चर्चा

मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक में राज्यों के बीच आपसी समन्वय, कानून व्यवस्था, सीमा विवाद, परिवहन, बिजली, जल संसाधन और आंतरिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

खासकर नक्सल प्रभावित रहे इलाकों में संयुक्त रणनीति और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल पर भी फोकस रह सकता है।

बस्तर को नई पहचान देने की कोशिश

गृह मंत्री के दौरे और परिषद की बैठक को बस्तर की नई छवि से भी जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि अब बस्तर केवल संघर्ष की पहचान नहीं रहेगा, बल्कि पर्यटन, निवेश, विकास और प्रशासनिक गतिविधियों के नए केंद्र के रूप में उभरेगा।

यही वजह है कि बैठक के बाद गृह मंत्री का प्रेस कॉन्फ्रेंस भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे केंद्र सरकार बस्तर को लेकर अपना विजन सामने रख सकती है।

गुंडाधुर की धरती बनेगी तीर्थस्थल

बता दें कि बस्तर दौरे के पहले दिन यानी सोमवार को अमित शाह ने कहा था कि बस्तर के लोगों का 50 सालों में जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई हम 4-5 सालों में करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि जब तक बस्तर विकसित नहीं होगा, तब तक हमारा संकल्प अधूरा रहेगा।

आज (18 मई) का दिन ऐतिहासिक है, क्योंकि पिछले 6 महीनों के काम के बाद अब यह पूरा क्षेत्र आदिवासियों से भरा दिखाई दे रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि इसी धरा से अंग्रेजों के खिलाफ जंग लड़ने का काम अमर शहीद गुंडाधुर ने किया था।

शाह ने कहा कि एक दौर वह भी था जब यहां एक साथ 6 पुलिसवालों की हत्या कर दी जाती थी, स्कूल उजाड़ दिए जाते थे और गरीबों का राशन तक छीन लिया जाता था। नक्सलियों का खौफ ऐसा था कि वे मासूम बच्चों को उनके बचपन में ही जबरन उठा ले जाते थे।

गृह मंत्री ने आगे कहा कि अब सरकार ने कड़े कदम उठाकर बस्तर से इस गनतंत्र को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। इसके साथ ही अब इस ऐतिहासिक धरती को एक तीर्थस्थल के रूप में विकसित करने का काम शुरू किया जा रहा है।

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