रणवीर सिंह नहीं कर पाएंगे फिल्में? बैन का मतलब क्या? FWICE बोली- 4 लाख सिने कर्मचारी अब उनके साथ नहीं

बॉलीवुड एक्टर रणवीर सिंह और फिल्म ‘डॉन 3’ को लेकर चल रहा विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) ने सोमवार को कहा कि उसके चार लाख से अधिक सदस्य रणवीर सिंह के साथ काम नहीं करेंगे, क्योंकि उन्होंने फरहान अख्तर की फिल्म ‘डॉन 3’ से आखिरी समय में किनारा कर लिया था, जिसका निर्माण तीन साल से चल रहा था। अब इस घटना ने बड़ी बहस छेड़ दी है और लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या ‘धुरंधर’ और ‘धुरंधर 2’ एक्टर रणवीर सिंह अब फिल्म इंडस्ट्री में काम ही नहीं कर पाएंगे? यहां बता दें कि फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज ने रणवीर सिंह के खिलाफ ‘नॉन-कोऑपरेशन डायरेक्टिव’ जारी कर दिया है।

आइए जानते हैं FWICE द्वारा लगाए गए प्रतिबंध का क्या मतलब है? FWICE के बैन का मतलब ये सरकार द्वारा लगाया गया बैन नहीं है और न ही यह कानूनी रूप से किसी एक्टर को फिल्में साइन करने से रोकता है। कोई लीगल एक्शन नहीं बल्कि पूरी फिल्म इंडस्ट्री की तरफ से असहयोग का निर्देश है। इसका मतलब ये है कि जो लोग इससे जुड़े हैं और अन्य लोगों से अनुरोध किया जा रहा है कि वे एक्टर के साथ आगे शूटिंग या प्रॉडक्शंस में किसी तरह का सहयोग न करें। अब चूंकि फिल्म निर्माण का काम इन लोगों पर बड़े पैमाने पर डिंपेंड करता है, इसलिए ऐसे कदम से मौजूदा और भविष्य के काम में काफी दिक्कतें आ सकती हैं।

रणवीर सिंह या उनके प्रोजेक्ट्स के साथ सहयोग नहीं करेंगे

एक्टर के खिलाफ नॉन-कोऑपरेशन डायरेक्टिव का मतलब यह है कि फेडरेशन से जुड़े सदस्य, टेक्नीशियन और वर्कर्स फिलहाल रणवीर सिंह या उनके प्रोजेक्ट्स के साथ सहयोग नहीं करेंगे। साथ ही निर्माता संगठनों से भी इस मामले में साथ देने की अपील की गई है।

25 मई को रणवीर सिंह के खिलाफ असहयोग का आदेश जारी

रिपोर्ट्स के मुताबिक, रणवीर सिंह भी भारत में नई फिल्मों की शूटिंग या प्रॉडक्शन तब तक नहीं कर पाएंगे जब तक कि वह और डॉन 3 के मेकर्स किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच जाते। फिल्म संस्था ने सोमवार, 25 मई को रणवीर सिंह के खिलाफ असहयोग का आदेश जारी किया। संस्था का कहना है कि एक्टर ने व्यक्तिगत रूप से पेश होकर अपना पक्ष रखने के कई अनुरोधों का जवाब नहीं दिया। वहीं ‘डॉन 3’ का निर्माण कर रही कंपनी एक्सेल एंटरटेनमेंट ने रणवीर सिंह से ये फिल्म छोड़ने से पहले हुए प्री-प्रोडक्शन पर हुए खर्चों के मुआवजे के तौर पर 45 करोड़ रुपये की मांग की है।

‘फिल्म इंडस्ट्री एक भरोसे पर चलने वाली व्यवस्था’

इसी बीच एफडब्ल्यूआईसीई के चीफ एडवाइजर अशोक पंडित ने आईएएनएस से बातचीत में पूरे विवाद को विस्तार से समझाया और इंडस्ट्री में बढ़ रहे इस ट्रेंड पर चिंता जताई। अशोक पंडित ने कहा, ‘फिल्म इंडस्ट्री एक भरोसे पर चलने वाली व्यवस्था है। यहां जब कोई निर्माता किसी अभिनेता को साइन करता है, तो उसके बाद पूरी टीम उसी के अनुसार काम शुरू कर देती है। फिल्म की तैयारी, शूटिंग की प्लानिंग, लोकेशन, तकनीकी टीम, सेट और बाकी सभी चीजों पर करोड़ों रुपए खर्च किए जाते हैं।’

‘शूटिंग की प्लानिंग हो चुकी थी और यूनिट लगभग रवाना होने वाली थी’

उन्होंने कहा कि जैसे ही किसी फिल्म की तैयारी शुरू होती है, निर्माता का पैसा लगातार लगना शुरू हो जाता है। ऐसे में अगर कोई एक्टर आखिरी समय में फिल्म छोड़ देता है तो उसका असर सिर्फ प्रड्यूसर पर नहीं बल्कि सैकड़ों वर्कर्स और टेक्नीनीशियनों पर भी पड़ता है। उन्होंने आगे कहा कि ‘डॉन 3’ फिल्म की तैयारियां काफी आगे बढ़ चुकी थीं। शूटिंग की प्लानिंग हो चुकी थी और यूनिट लगभग रवाना होने वाली थी। लेकिन, तभी रणवीर सिंह ने अचानक प्रोजेक्ट से पीछे हटने का फैसला लिया। चाहे वजह कुछ भी रही हो, लेकिन इस तरह आखिरी समय पर फिल्म छोड़ देना इंडस्ट्री के लिए एक खतरनाक ट्रेंड बन सकता है।

फेडरेशन ने उन्हें कई बार नोटिस और रिमाइंडर भेजे

अशोक पंडित ने कहा, ‘जब यह मामला हम तक पहुंचा तो फेडरेशन ने पहले इसे शांतिपूर्वक सुलझाने की कोशिश की। रणवीर सिंह को बुलाकर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया। फेडरेशन ने उन्हें कई बार नोटिस और रिमाइंडर भेजे, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं आया। बाद में जब प्रेस कॉन्फ्रेंस की घोषणा हुई, तब रणवीर की टीम की ओर से एक ईमेल भेजा गया, जिससे फेडरेशन संतुष्ट नहीं है।’

‘बल्कि पूरी इंडस्ट्री के भरोसे और काम करने के तरीके से जुड़ा मुद्दा’

उन्होंने कहा, ‘फेडरेशन चाहता था कि रणवीर सिंह खुद सामने आकर बात करें, क्योंकि इतना बड़ा मामला केवल मैनेजर या प्रतिनिधि के जरिए हल नहीं किया जा सकता। यह सिर्फ एक फिल्म का मामला नहीं है, बल्कि पूरी इंडस्ट्री के भरोसे और काम करने के तरीके से जुड़ा मुद्दा है। इंडस्ट्री इमोशनल बॉन्डिंग और ट्रस्ट फैक्टर पर काम करती है। निर्माता, निर्देशक, एक्टर और टेक्नीनीशियन एक-दूसरे पर भरोसा करके काम करते हैं। अगर यह भरोसा टूटने लगे तो भविष्य में निर्माता किसी बड़े स्टार पर निवेश करने से डरेंगे। इससे पूरी इंडस्ट्री प्रभावित हो सकती है। यह खतरनाक ट्रेंड बन सकता है।’

कियारा आडवाणी भी फिल्म का हिस्सा थीं

पूरा विवाद फिल्म ‘डॉन 3’ से जुड़ा है। इस फिल्म की घोषणा साल 2023 में हुई थी, और इसमें रणवीर सिंह को लीड रोल में लिया गया था। पहले कियारा आडवाणी भी फिल्म का हिस्सा थीं, लेकिन बाद में उन्होंने प्रेग्नेंसी और ब्रेक के कारण प्रोजेक्ट छोड़ दिया। इसके बाद फिल्म की शूटिंग लगातार टलती रही। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रणवीर सिंह स्क्रिप्ट में कुछ बदलाव चाहते थे, लेकिन मेकर्स इसके लिए तैयार नहीं थे। इसी बीच रणवीर ने फिल्म छोड़ दी। इसके बाद फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी की कंपनी एक्सेल एंटरटेनमेंट ने दावा किया कि उन्हें करीब 45 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।

आमिर खान ने भी बीच-बचाव करने की कोशिश की

बताया जा रहा है कि इस विवाद को सुलझाने के लिए इंडस्ट्री के कई बड़े लोगों ने कोशिश की थी। यहां तक कि आमिर खान ने भी बीच-बचाव करने की कोशिश की, लेकिन कोई हल नहीं निकल सका। फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज’ (एफडब्ल्यूआईसीई) भारत में फिल्म और टेलीविजन वर्कर्स का प्राइमरी ट्रेड यूनियन और शीर्ष संगठन है। इसकी वेबसाइट के मुताबिक, इस संगठन की स्थापना साल 1956 में हुई थी। अपने सदस्यों के हितों की देखभाल करने के अलावा, यह संस्था कलाकारों, टेकनीशियनों और प्रोडक्शन स्टूडियो के बीच होने वाले विवादों में मध्यस्थता करने का काम भी करती है।

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