दिल्ली जिमखाना क्लब ने सरकार से दूसरी जगह जमीन मांगी

नई दिल्ली, केंद्र सरकारी की 113 साल पुराने दिल्ली जिमखाना क्लब को लेकर बनाई गई जनरल कमेटी ने सोमवार को सरकार से अपील की है कि क्लब का कामकाज प्रभावित न किया जाए। कमेटी ने कहा कि अगर सरकार कब्जे की कार्रवाई आगे बढ़ाती है तो क्लब को दूसरी जगह जमीन दी जाए।

दरअसल, लुटियंस दिल्ली स्थित ऐतिहासिक क्लब पर करीब 48 करोड़ रुपए का ग्राउंड रेंट बकाया है। लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस (L&DO) ने सितंबर 2025, मार्च 2026 और अप्रैल 2026 में क्लब प्रबंधन को नोटिस भेजे थे।

अप्रैल में जारी आखिरी नोटिस में एक हफ्ते के भीतर बकाया राशि जमा करने को कहा गया था। साथ ही चेतावनी दी गई थी कि भुगतान नहीं होने पर क्लब की 27.3 एकड़ जमीन वापस ले ली जाएगी। इसके बाद 22 मई को क्लब को 5 जून तक कैंपस खाली करने का ऑर्डर दिया है।

दिल्ली जिमखाना क्लब की स्थापना ब्रिटिश काल में हुई थी। 1913 में यह इम्पीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब नाम से शुरू हुआ था। आजादी के बाद इसका नाम बदलकर दिल्ली जिमखाना क्लब कर दिया गया। मौजूदा भवन 1930 के दशक में बनाए गए थे।

क्लब बोला- 4 साल में वित्तीय हालत सुधारी

जनरल कमेटी ने कहा कि अप्रैल 2022 में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के आदेश के बाद से वह क्लब का संचालन संभाल रही है। पिछले 4 साल में क्लब की प्रशासनिक और आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है।

2021-22 में क्लब को 12.39 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था, जबकि 2023-24 में 9.25 करोड़ रुपए के मुनाफे का अनुमान है। यह सुधार बिना नई सदस्यता बढ़ाए किया गया।

कमेटी ने यह भी कहा कि मंत्रालय द्वारा नियुक्त सदस्य मानद आधार पर काम कर रहे हैं और उन्हें किसी तरह का वेतन या वित्तीय लाभ नहीं मिलता।

कमेटी के मुताबिक:

  • प्रशासनिक प्रक्रियाओं को व्यवस्थित किया गया।
  • अलग-अलग विभागों में स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर लागू किए गए।
  • लंबित कानूनी मामलों और श्रम विवादों को कम किया गया।
  • सदस्यता रिकॉर्ड को डिजिटल करने का काम शुरू हुआ। 2022 में करीब 43% रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं थे।

सदस्यों ने कार्रवाई को बताया अवैध

सोमवार को हुई बैठक में क्लब सदस्यों ने कब्जे की कार्रवाई को अवैध बताया। उनका कहना है कि उन्हें पहले बकाया और नोटिसों की जानकारी नहीं दी गई। सदस्यों ने कहा कि क्लब सिर्फ जमीन नहीं, बल्कि खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़ी विरासत है। उन्होंने क्लब बंद करने की बजाय प्रशासनिक सुधार की मांग की।

जनरल कमेटी ने कहा कि क्लब को दूसरी जगह शिफ्ट करने पर पुराना इंफ्रास्ट्रक्चर दोबारा बनाने में भारी खर्च आएगा। इससे क्लब से जुड़े करीब 600 कर्मचारियों के रोजगार पर भी असर पड़ सकता है। क्लब को मौजूदा जगह पर बनाए रखने के लिए L&DO और शहरी विकास मंत्रालय के अधिकारियों से लगातार बातचीत की जा रही है।

क्लब हाई-सोसायटी स्टेटस का प्रतीक

पिछले 113 सालों से यह क्लब हाई-सोसायटी स्टेटस का प्रतीक रहा है। यह क्लब लंबे समय से नौकरशाहों, सेना प्रमुखों, जजों, राजनेताओं, उद्योगपतियों और पुराने कारोबारी परिवारों का पसंदीदा अड्डा रहा है। यहां की सदस्यता को किसी बड़े सरकारी पद जितना प्रतिष्ठित माना जाता है।

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