मोदी दे रहे ग्रीन मोबिलिटी पर जोर, फिर भी भोपाल में ई-बाइक प्रोजेक्ट हुआ फेल
भोपाल। देशभर में लगातार बढ़ते पेट्रोल-डीजल के दामों के बीच केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लगातार ईवी और ग्रीन ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देने की बात कर रहे हैं। दूसरी ओर राजधानी भोपाल में करीब 3 करोड़ रुपये खर्च कर शुरू किया गया। ई-बाइक और पब्लिक साइकिल प्रोजेक्ट आज पूरी तरह बंद पड़ा है। कभी “ग्रीन भोपाल” की पहचान बताई गई यह योजना अब बंद स्टैंड, गायब साइकिलों और कबाड़ बन चुकी ई-बाइकों तक सिमटकर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है।
तीन करोड़ रुपये किए खर्च
- साल 2017 में स्मार्ट सिटी भोपाल के तहत शुरू की गई यह देश की पहली स्वचालित साइकिल शेयरिंग प्रणाली थी। परियोजना पर करीब तीन करोड़ रुपये खर्च किए गए थे और जर्मनी से लगभग 500 साइकिलें मंगाई गई थीं। शहर के प्रमुख स्थानों पर स्टैंड बनाए गए थे। शुरुआत में इसे लेकर काफी प्रचार हुआ और दावा किया गया कि इससे पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम होगी तथा लोग छोटे सफर के लिए साइकिल और ई-बाइक का उपयोग करेंगे।
- लेकिन कुछ ही वर्षों में योजना की वास्तविक तस्वीर सामने आ गई। कई स्टैंड खाली पड़े हैं, अधिकांश साइकिलें खराब हो चुकी हैं और ऐप आधारित डिजिटल सिस्टम भी लगभग निष्क्रिय हो गया है। नगर निगम ने चुपचाप अधिकांश साइकिलों और ई-बाइकों को वापस अपने गोदामों में रखवा दिया।
- विशेषज्ञों और शहरवासियों का मानना है कि इस योजना की असफलता के पीछे खराब प्लानिंग के साथ लोगों की कम रुचि भी एक बड़ा कारण रही। हालांकि योजना को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता अभियान चलाए गए, लेकिन इसके बावजूद आम नागरिकों का अपेक्षित समर्थन नहीं मिल सका।
लोगों की दिखी कम रुचि
इन रूट्स पर फिर से शुरू होगी साइकिल सेवा
- एमपी नगर
- छह नंबर मार्केट
- 10 नंबर मार्केट
- नर्मदापुरम रोड
- कोलार रोड
फिर से साइकिल शुरू करने की योजना
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शुरू की गईं साइकिलें नुकसान में चल रही थीं, जिस कारण उन्हें वापस ले लिया था। जिन रूट्स पर प्रॉफिट हो रहा था उन्हें चिह्नित कर अब फिर से साइकिल शुरू करने की योजना बनाई जा रही है। अंजू अरुण कुमार, सीईओ स्मार्ट सिटी
