उपार्जन में लापरवाही: MP में फटे बारदानों में भरा जा रहा गेहूं, रिकॉर्ड खरीदी के बीच वेयरहाउसों में बढ़ी परेशानी
भोपाल। प्रदेश में समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी के लिए नए बारदानों की कमी के चलते सरकार ने आनन-फानन में पुराने बारदाने खरीदे, पर इनकी हालत ठीक नहीं है। कई जिलों में वेयरहाउस में फटे या पैच लगे बारदाने आपूर्ति किए गए, जिससे गेहूं भरने में दिक्कत आई।
जबलपुर सहित कई जिलों में फटे बारदाने आपूर्ति किए जाने की शिकायतें आई हैं।
अधिकारी बोले- बंडल खोलकर जांच करना कठिन
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम के एमडी अनुराग वर्मा ने बताया कि 50-50 बोरों का बंडल रहता हैं। ऐसी व्यवस्था बनाना कठिन हो जाएगा कि उन्हें खोलकर जांच की जाए, इसलिए सीधे वेयरहाउस में भेज दिए जाते हैं।
बंडल खोलने पर पता चलता है कि वे फटे हैं तो आपूर्ति करने वाली कंपनी को उसकी जगह दूसरा देना होता है। इस शर्त के लिए पहले से अनुबंध है।
13 लाख किसानों से खरीदा गया 103 लाख टन गेहूं
बता दें कि प्रदेश में अभी तक 13 लाख से अधिक किसानों से 103 लाख टन गेहूं की खरीदी की जा चुकी है, जबकि लक्ष्य सौ लाख का था। कोरोना संक्रमण काल छोड़ दें तो न्यूनतम समर्थन मूल्य के अंतर्गत इतना गेहूं पिछले 10 वर्ष में कभी नहीं खरीदा गया। पहले 78 लाख टन गेहूं खरीदी का लक्ष्य था।
राज्य सरकार के प्रयास के बाद केंद्र ने कोटा बढ़ाकर 100 लाख टन कर दिया था। जो किसान स्लाट बुक कर चुके हैं उनसे 28 मई तक खरीदी की जाएगी।
तय लक्ष्य से अधिक खरीदी का अनुमान
अधिकारियों के अनुसार 105 लाख टन गेहूं खरीदी की संभावना है। निर्धारित 100 लाख टन से अतिरिक्त खरीदी के लिए राज्य की तरफ से केंद्र को प्रस्ताव भेजकर कोटा बढ़ाने की मांग की जाएगी।
बता दें कि किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस सहित 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं का उपार्जन किया जा रहा है।
