‘रेप करो, हत्‍या करो, जमानत मिल जाएगी’, Prakash Raj का सिस्‍टम पर तगड़ा तंज- बस नाम उमर खाल‍िद ना हो

अपनी बेबाक और बेधड़क बयानी के लिए मशहूर प्रकाश राज ने न्‍यायपालिका पर गहरा तंज कसा है। 61 साल दिग्‍गज एक्‍टर ने X पर पुणे पोर्श दुर्घटना से जुड़े एक पोस्‍ट पर टिप्‍पणी करते हुए JNU छात्र और कार्यकर्ता उमर खालिद का नाम लिया है। प्रकाश राज ने देश की अदालतों के फैसलों पर निराशा जाहिर करते हुए लिखा है कि यहां रेप करने वाले, हत्‍या करने वाले, हेट स्‍पीच देने वालों, यहां तक कि सड़क पर दुर्घटना में लोगों की जान लेने वालों को आसानी से जमानत मिल जाती है, बशर्ते कि नाम उमर खालिद ना हो।

पांच बार नेशनल फिल्‍म अवॉर्ड जीत चुके प्रकाश राज का यह पोस्‍ट न सिर्फ देश की न्यायपालिका की व्यंग्यात्मक आलोचना है, बल्‍क‍ि गंभीर मामलों में प्रभावशाली लोगों को आसानी से मिलने वाली जमानत पर भी तंज है। एक्‍टर की यह टिप्‍पणी ऐसे समय में आई है, जब उमर खालिद साल 2020 से ही जेल में कैद हैं और उनकी न‍ियमित जमानत याचिका को लगातार खारिज किया जाता रहा है। जबकि हाल ही पुणे पोर्श दुर्घटना मामले में नाबालिग आरोपी के पिता और कई मुख्‍य आरोपियों को जमानत दी गई। इसके बाद उन्‍हें जमानत का जश्‍न मनाते हुए, पार्टी करते हुए देखा गया।

प्रकाश राज का X पर पोस्‍ट, निशाने पर न्‍याय व्‍यवस्‍था

‘वांटेड’, ‘सिंघम’ और ‘KGF 2’ फेम एक्‍टर ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, ‘आप बलात्कार कर सकते हैं, हत्या कर सकते हैं, नफरती भाषण दे सकते हैं, दुर्घटनाओं में लोगों की जान ले सकते हैं… हमारी न्यायपालिका आपको जमानत जरूर दे देगी। लेकिन… लेकिन… लेकिन… आपका नाम उमर खालिद नहीं होना चाहिए।’

प्रकाश राज ने पुणे पोर्श केस वाले पोस्‍ट पर दी प्रतिक्रिया

प्रकाश राज ने जिस पोस्ट पर अपनी प्रतिक्रिया दी है, उसमें एक यूजर ने मई 2024 में पुणे में हुई पोर्श दुर्घटना का विवरण दिया है। इसमें कथित तौर पर एक नाबालिग ने नशे में गाड़ी चलाई, जिस कारण दो सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की मौत हो गई। यूजर ने लिखा, ‘2 सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की हत्या की, वह शराब के नशे में था, उससे एक निबंध लिखने को कहा गया, माता-पिता ने खून के नमूनों से छेड़छाड़ की, पिता 22 महीने तक जेल में रहे, फिर सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी और एक हीरो की तरह जश्न मनाया गया और स्वागत किया गया।’

कौन हैं उमर खालिद, वह जेल में क्‍यों हैं?

उमर खालिद एक सामाजिक कार्यकर्ता, मानवाधिकार रक्षक और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के पूर्व छात्र नेता हैं। वह सरकार की नीतियों के आलोचक रहे हैं और ‘यूनाइटेड अगेंस्ट हेट’ अभियान के संस्थापक हैं। फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों के सिलसिले में गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत उमर खालिद को गिरफ्तार किया गया है और वह तिहाड़ जेल में बंद हैं। उन पर हिंसा के पीछे ‘बड़ी साजिश’ रचने का आरोप है। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें नियमित जमानत देने से इनकार कर दिया था, हालांकि उन्हें अपनी बीमार मां की देखभाल के लिए तीन दिनों की अंतरिम जमानत दी गई थी।

उमर खालिद कब से जेल में हैं?

उमर खालिद को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 14 सितंबर, 2020 को गिरफ्तार किया था। नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के विरोध प्रदर्शनों के दौरान सांप्रदायिक हिंसा भड़काने में कथित भूमिका के लिए उन पर भारतीय दंड संहिता (IPC), शस्त्र अधिनियम और UAPA की कई धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं। इसी साल 5 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया। फैसले में यह कहा गया कि अभियोजन पक्ष ने जो सबूत दिखाए हैं, उससे पहली नजर में केस बनता है। कोर्ट का यह सख्‍त रुख UAPA की धारा 43D(5) पर आधारित है।

पुणे पोर्श क्रैश केस क्‍या है?

पुणे पोर्श केस 19 मई 2024 की घटना है। यह पुणे के कल्याणी नगर में हुई एक दुखद कार दुर्घटना से जुड़ा है। एक 17 साल का नाबालिग जो कथित तौर पर नशे की हालत में था, उसने अपनी तेज रफ्तार लग्‍जरी पोर्श कार से दो IT प्रोफेशनल्स (अनीश अवधिया और अश्विनी कोष्टा) को टक्कर मार दी, जिससे उनकी मौत हो गई। इस मामले ने सिस्टम में मौजूद विशेषाधिकार, भ्रष्टाचार और न्याय व्यवस्था की अमीर अपराधियों से निपटने के तरीके को लेकर देशभर में गुस्‍से का माहौल बनाया। दुर्घटना के 15 घंटे के भीतर ही जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (JJB) ने उस नाबालिग को जमानत दे दी। जमानत की शर्तों में से एक शर्त उसे सड़क सुरक्षा पर 300 शब्दों का निबंध लिखना था। इसको लेकर जनता के बीच भारी गुस्सा भड़का।

पुणे पोर्श केस में ताजा अपडेट

  • जनता के भारी विरोध के बाद पुलिस ने नाबालिग की जमानत का विरोध किया। JJB ने अपने आदेश में बदलाव किया और उस नाबालिग को एक जुवेनाइल ऑब्जर्वेशन होम में भेज दिया।
  • कथित तौर पर ससून जनरल हॉस्पिटल में उस नाबालिग के खून के सैंपल उसकी मां के सैंपल से बदल दिए गए थे, ताकि यह बात छिपाई जा सके कि उसने शराब पी रखी थी।
  • पुलिस ने नाबालिग आरोपी के पिता (विशाल अग्रवाल), उसकी मां और उसके दादा को साजिश रचने और अपने परिवार के ड्राइवर पर दोष अपने ऊपर लेने का दबाव डालने की कोशिश करने के आरोप में गिरफ्ता किया।
  • दो डॉक्टरों और अस्पताल के एक कर्मचारी को भी कथित तौर पर रिश्वत लेने और फॉरेंसिक सबूतों से छेड़छाड़ करने के आरोप में गिरफ्ता किया गया। दो बार मालिकों और कर्मचारियों पर भी नाबालिग को शराब परोसने के आरोप में केस दर्ज किया गया।
  • सबूतों से छेड़छाड़ और अन्य आरोपों के सिलसिले में हिरासत में लगभग 22 महीने बिताने के बाद, नाबालिग के पिता को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई। कोर्ट ने जेल में बिताए गए लंबे समय का हवाला दिया और इसमें शामिल ‘पालन-पोषण की विफलता’ की कड़ी आलोचना की।
  • अग्रवाल परिवार का अपने पिता के जेल से रिहा होने का जश्न मनाते हुए एक वीडियो वायरल हो गया। इससे पूरे देश में कानूनी व्यवस्था की कथित खिल्ली उड़ाए जाने और पीड़ितों के परिवारों को अब भी झेलने पड़ रहे दुख को लेकर एक नई बहस छिड़ गई।
  • पुणे पोर्श क्रैश मामले में पीड़ितों में से एक के पिता ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा आरोपी को जमानत दिए जाने की कड़ी आलोचना की। उन्होंने वायरल वीडियो की निंदा की और आरोप लगाया है कि अपराध रोकने में सिस्टम पूरी तरह से नाकाम रहा है।
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