आजादी के 79 साल बाद भी विकास की राह देख रहा कोत्तापल्ली

बीजापुर। जिले के उसूर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत पुजारी कांकेर का आश्रित गांव कोत्तापल्ली आजादी के 79 वर्ष बाद भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का इंतजार कर रहा है। सीमावर्ती क्षेत्र में स्थित यह गांव सड़क, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल और मोबाइल नेटवर्क जैसी मूलभूत सुविधाओं से अब भी वंचित है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से जनप्रतिनिधियों और प्रशासन का ध्यान इस गांव की ओर नहीं गया, जिससे यहां के लोग अनेक समस्याओं का सामना करने को मजबूर हैं।
 कोत्तापल्ली गांव तक पहुंचने के लिए आज भी कोई पक्की सड़क उपलब्ध नहीं है। भीमाराम और रायपुरम के बीच स्थित एक बिंदु से गांव की दूरी लगभग 20 से 25 किलोमीटर है, जहां तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों को पथरीले रास्तों, नदी-नालों और जंगलों से होकर गुजरना पड़ता है। बरसात के दिनों में नदी-नाले उफान पर होने से आवागमन और भी कठिन हो जाता है। ऐसे समय में ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर सरकारी कार्यों के लिए लगभग 52 किलोमीटर दूर आवापल्ली ब्लॉक मुख्यालय पहुंचने को मजबूर होते हैं।

ग्रामीणों के अनुसार गांव में प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का पहुंचना बेहद दुर्लभ रहा है। 25 मार्च 2017 को पहली बार गांव में एक प्रशासनिक शिविर आयोजित किया गया था। इसके बाद भी गांव की समस्याओं के स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई।
ग्रामीणों का कहना है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने उसूर से तेलंगाना के पुसगुप्फा तक सड़क निर्माण कराया है, लेकिन कोत्तापल्ली को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाली सड़क आज तक नहीं बन सकी। जबकि क्षेत्र में नक्सल प्रभाव पहले की तुलना में काफी कम हो चुका है।
ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से गांव तक सर्व मौसम सड़क, स्वास्थ्य सुविधा, बिजली, शिक्षा और संचार व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि कोत्तापल्ली भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ सके।
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