‘मोर गांव मोर पानी’ महाअभियान को मिल रही गति

बेमेतरा। कलेक्टर सुश्री प्रतिष्ठा ममगाईं एवं जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुश्री प्रेमलता पद्माकर के मार्गदर्शन में बेमेतरा जिले में ‘मोर गांव मोर पानी’ महाअभियान के तहत जल संरक्षण एवं ग्रामीण आजीविका संवर्धन के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत आजीविका डबरी निर्माण को प्राथमिकता देते हुए जिलेभर में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य संचालित हैं।

वर्तमान में जिले में 118 आजीविका डबरियों का निर्माण कराया जा रहा है। इन संरचनाओं का उद्देश्य वर्षा जल का संचयन, भू-जल स्तर में वृद्धि तथा ग्रामीण परिवारों को स्थायी आजीविका के अवसर उपलब्ध कराना है। डबरियों के माध्यम से किसानों को मत्स्य पालन, सब्जी उत्पादन एवं पशुओं के लिए पेयजल जैसी सुविधाएं प्राप्त होंगी, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

जल संरक्षण के साथ भू-जल संवर्धन को मिलेगा बढ़ावा

आजीविका डबरी निर्माण से वर्षा जल का संचयन होगा, जिससे आसपास के क्षेत्रों में भू-जल स्तर में सुधार आएगा। डबरियों में संचित जल का उपयोग सिंचाई, पशुपालन एवं अन्य कृषि गतिविधियों में किया जा सकेगा। इससे जल संकट की समस्या कम होगी और ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी।

मत्स्य पालन और सब्जी उत्पादन से बढ़ेगी किसानों की आय

डबरियों के माध्यम से हितग्राही किसान मत्स्य पालन, सिंघाड़ा उत्पादन तथा डबरी की मेड़ों पर सब्जी एवं अन्य फसलों का उत्पादन कर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकेंगे। यह पहल किसानों के लिए आय के नए स्रोत विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगी।

रोजगार सृजन का भी बन रहा माध्यम

मनरेगा के अंतर्गत संचालित इन कार्यों से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं। प्रत्येक डबरी निर्माण स्थल पर औसतन 1200 से 1500 मानव दिवस का रोजगार सृजित हो रहा है, जिससे जॉब कार्डधारी परिवारों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध हो रहा है। इससे ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति में सुधार के साथ-साथ पलायन की समस्या में भी कमी आएगी।

वंचित वर्गों को दी जा रही प्राथमिकता

योजना के अंतर्गत लघु एवं सीमांत किसानों, महिला मुखिया वाले परिवारों तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के हितग्राहियों को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे समाज के कमजोर वर्गों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में मदद मिल रही है।

आजीविका डबरी ग्रामीण विकास का प्रभावी मॉडल : सीईओ

जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुश्री प्रेमलता पद्माकर ने कहा कि “आजीविका डबरी केवल एक जल संरचना नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों के लिए स्थायी आजीविका का सशक्त मॉडल है। इससे एक ओर जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, वहीं दूसरी ओर किसानों की आय बढ़ाने के लक्ष्य को भी मजबूती मिलेगी।” उन्होंने बताया कि जिले की सभी जनपद पंचायतों के कार्यक्रम अधिकारियों एवं ग्राम पंचायतों को निर्देशित किया गया है कि मानसून पूर्व सभी निर्माण कार्यों को गुणवत्ता के साथ पूर्ण कराया जाए, ताकि आगामी वर्षा ऋतु में जल संचयन का अधिकतम लाभ ग्रामीणों को मिल सके।

जल संरक्षण और आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

‘मोर गांव मोर पानी’ महाअभियान के अंतर्गत संचालित आजीविका डबरी निर्माण कार्य जल संरक्षण, रोजगार सृजन एवं ग्रामीण आजीविका संवर्धन का एक प्रभावी उदाहरण बनकर उभर रहा है। यह पहल न केवल जल संकट के समाधान में सहायक होगी, बल्कि ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने और सतत विकास को गति देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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