तेल के अकूत भंडार से मालामाल है वेनेजुएला, भारत के लिए बनेगा दूसरा रूस? ईरान का खेल होगा खत्म
काराकास/नई दिल्ली: भारत के लिए वेनेजुएला तेल का नया निर्यातक देश बन सकता है। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद शायद भारत में सबसे ज्यादा चर्चा कच्चे तेल को लेकर ही हुई है। रूस से सस्ते दाम पर मिले कच्चे तेल ने भारत के आयात के तौर-तरीकों को बदल दिया। मॉस्को नई दिल्ली का सबसे बड़ा सप्लायर बन गया और उसने ग्लोबल स्तर पर कीमतों में उतार-चढ़ाव के असर से ग्राहकों को बचाने में मदद की। लेकिन अब ईरान युद्ध ने भारत को फिर काफी परेशान किया है। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से भारत को अपनी ऊर्जा रणनीति पर फिर से सोचने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
वेनेज़ुएला के कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज की भारत यात्रा के दौरान नई दिल्ली दीर्घकालिक ऊर्जा समझौतों के लिए वेनेजुएला के साथ बात कर रहा है। भारत की बातचीत सिर्फ तेल खरीदने को लेकर नहीं है बल्कि नई दिल्ली की कोशिश ऊर्जा आपूर्ति में विविधता लाना और भारत के ऊर्जा मानचित्र नये सिरे से खींचने के लिए है।
भारत कैसे अपना तेल का नक्शा बदल रहा है?
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 से 90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है जिससे ऊर्जा सुरक्षा उसकी सबसे बड़ी रणनीतिक कमदोरियों में से एक बन गई है। पारंपरिक रूप से भारत का ऊर्जा आयात मुख्य रूप से मध्य पूर्व, खासकर इराक, सऊदी अरब और यूएई से होता रहा है। 2022 से पहले भारत के कच्चे तेल के आयात में रूस की हिस्सेदारी बहुत कम थी। पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों और कीमत की सीमा तय होने के कारण रूसी तेल की कीमतें कम हुईं जिसके बाद भारतीय रिफाइनरियों ने खरीदारी बढ़ा दी और रूस भारत का सबसे बड़ा सप्लायर बन गया।लेकिन अब ‘द इकोनॉमिक टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक अधिकारी बता रहे हैं कि भारत कच्चे तेल के लिए दूसरे विकल्प तेजी से तलाश रहा है। भारत अब किसी एक देश पर अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए निर्भर नहीं रहना चाहता है। इसीलिए वेनेजुएला भारत के लिए एक मजबूत विकल्प के तौर पर उभर रहा है। वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणित तेल भंडार है जिसका अनुमान लगभग 303 अरब बैरल है। यह दुनिया के कुल भंडार का लगभग 17% है।
वेनेजुएला भारत के लिए क्यों अहम बन गया?
होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते भारत अपनी जरूरतों का 40 फीसदी से ज्यादा तेल और गैस मंगवाता रहा है। लेकिन होर्मुज बंद होने के बाद भारत को दूसरे विकल्पों की तरफ ध्यान देना पड़ रहा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक मई महीने में भारत वेनेज़ुएला के कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा आयातक बन गया और उसने हर दिन लगभग 4,27,000 बैरल तेल खरीदा। वेनेज़ुएला का कच्चा तेल तेजी से भारत के शीर्ष सप्लायरों की सूची में शामिल हो गया है और अब यह देश में आयात होने वाले तेल के सबसे अहम स्रोतों में से एक है।
दूसरी तरफ निकोलस मादुरो की सरकार के समय अमेरिका ने वेनेजुएला के तेल सेक्टर पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे जिससे अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए तेल खरीदना मुश्किल हो गया था। जैसे-जैसे प्रतिबंध कड़े होते गए भारतीय रिफाइनरियों ने आयात काफी कम कर दिया। इस साल स्थिति तब बदली जब अमेरिका ने प्रतिबंधों में ढील दी और कंपनियों को वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदने की इजाजत देने वाले लाइसेंस जारी किए।
क्या वेनेजुएला भारत के लिए रूस की जगह ले पाएगा?
शायद नहीं! उद्योग विश्लेषकों का कहना है कि वेनेजुएला को रूस के विकल्प के रूप में नहीं बल्कि विविधीकरण के एक विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। रूसी कच्चा तेल भारत के शोधन तंत्र में गहराई से समाया हुआ है और आर्थिक रूप से आकर्षक बना हुआ है। इसके विपरीत भारत की रणनीति अपने आपूर्तिकर्ता आधार को व्यापक बनाना प्रतीत होती है। हाल के वर्षों के अनुभवों से यह सबक मिलता है कि किसी एक स्रोत, चाहे वह खाड़ी देश हो, रूस हो या कोई अन्य, किसी एक पर अत्यधिक निर्भरता जोखिम भरी होती है। वेनेजुएला को शामिल करके भारत को अधिक लचीलापन और सौदेबाजी की शक्ति प्राप्त होती है।
