शहर के बीचोबीच 25 फीट ऊंचा आग का बवंडर, 5 किलोमीटर दूर से दिखी लपटें, 30 मिनट में राख हो गया 1 करोड़ का प्लांट

भोपाल: रविवार शाम को एक करोड़ रुपये का बायोगैस प्लांट आग की चपेट में आकर पूरी तरह जलकर खाक हो गया। यह प्लांट यादगार-ए-शाहजहानी पार्क के पीछे स्थित था। शाम करीब 5:30 बजे लगी आग ने देखते ही देखते पूरे प्लांट को अपनी जद में ले लिया। आग बुझाने के लिए एक दर्जन से ज़्यादा फायर इंजन बुलाने पड़े और करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। आग इतनी भीषण थी कि 20 से 25 फीट ऊंची लपटें उठ रही थीं और पांच किलोमीटर दूर से भी काला धुआं दिखाई दे रहा था। गनीमत रही कि इस हादसे में किसी को चोट नहीं आई।

आग लगने की वजह साफ नहीं

सूत्रों के मुताबिक, प्लांट के पास, जो वेस्ट ट्रांसफर स्टेशन से सटा हुआ है, कुछ दिन पहले सूखी लकड़ियां और झाड़ियां जमा की गई थीं। आग लगने की वजह अभी साफ नहीं है, लेकिन माना जा रहा है कि इसी सूखी वनस्पति ने आग को तेज़ी से फैलाया और एक घंटे के अंदर पूरे प्लांट को अपनी चपेट में ले लिया।

2017-18 में बना था प्लांट

यह बायोगैस प्लांट 2017-18 में वेस्ट ट्रांसफर स्टेशन बनने के बाद लगाया गया था। इसका मकसद गीले कचरे से बायोगैस बनाकर दीनदयाल रसोई को उपलब्ध कराना था, जहां गरीबों को खाना खिलाया जाता है। प्लांट को रसोई से जोड़ने के लिए 100 मीटर पाइपलाइन भी बिछाई गई थी। हालांकि, यह प्लांट रोज़ाना सिर्फ कुछ मिनटों के लिए ही गैस बना पाता था और वह भी सिर्फ टेस्टिंग के लिए। इससे रोज़ाना 5,000 से 6,000 रुपये की एलपीजी की बचत का वादा पूरा नहीं हो सका।

कचरे की सप्लाई थी कम

प्लांट में 10 प्लास्टिक टैंक थे, हर एक की क्षमता 20,000 लीटर थी। इनमें से छह टैंक गीले कचरे को गैस में बदलने के काम आते थे, जबकि चार गैस स्टोर करने के लिए थे। जब आग इन टैंकों तक पहुंची तो जलते हुए प्लास्टिक से ज़हरीला काला धुआं निकला। प्लांट को रोज़ाना पांच टन गीले कचरे की ज़रूरत थी, जो पुराने शहर और एमपी नगर के सब्ज़ी बाजारों और होटलों से आता था। लेकिन कचरे की सप्लाई कम होने की वजह से प्लांट बंद पड़ा था, हालांकि कागजों में यह चालू दिखाया जा रहा था।

12 से ज्यादा फायर इंजन बुलाए गए

आग शाम 5:30 बजे लगी, लेकिन सबसे नज़दीकी फायर स्टेशनों, पुल बोगदा और फतेहगढ़ से फायर इंजन को पहुंचने में करीब 30 मिनट लग गए। बाद में 12 से ज़्यादा फायर इंजन बुलाए गए। फायर ऑफिसर सौरभ पटेल ने बताया कि लाल परेड ग्राउंड में एक कार्यक्रम की वजह से सड़कें बंद थीं, जिस कारण फायर इंजन को दूसरे रास्तों से आना पड़ा और करीब 20 मिनट की देरी हुई। इस मामले में बीएमसी के बड़े अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

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