मेरा गांव मेरी पहचान योजना के तहत रायपुर में एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन

रायपुर। सभी विभागों की जनकल्याणकारी योजनाओं को दूरस्थ क्षेत्रों के अंतिम घर तक पहुँचाने और ज़िले के हर गांव को विशिष्टता के साथ आदर्श ग्राम बनाने तथा उनकी सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक पहचान को संजोने के उद्देश्य से रायपुर जिला प्रशासन द्वारा "मेरा गांव मेरी पहचान" योजना शुरू की गई है। योजनांतर्गत आज एकदिवसीय कार्यशाला रेडक्रॉस सभा कक्ष, कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित की गई।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन और कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के नेतृत्व में इस अभिनव योजना की शुरुआत की गई है, जिसका उद्देश्य ग्रामों की छुपी हुई विशेषताओं को उजागर कर उन्हें एक विशिष्ट पहचान दिलाना है। अलग-अलग विभाग द्वारा न सिर्फ योजनाओं का लाभ अंतिम हितग्राही तक पहुँचाया जाएगा, इसके साथ ही किसी एक या एक से अधिक ग्राम का चयन कर उसे विशेष तौर पर एक पहचान प्रदान करने की कोशिश की जाएगी जैसे कृषि विभाग द्वारा किसी ग्राम को पूर्ण दलहन, तिलहन ग्राम या महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा किसी ग्राम को पूर्णतः कुपोषण मुक्त बनाना, अन्य विभागों द्वारा किसी ग्राम में ग्रामीणों को किसी विशिष्ट योजना के माध्यम से लाभान्वित करना। इस योजना के तहत जिले के 78 गांवों का चयन किया गया है।

कार्यशाला के दौरान कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने कहा, “हमें गांवों की अनूठी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विशेषताओं को पहचान कर उन्हें संरक्षित करना है, शासकीय भवनों में आवश्यक सुधार करना तथा इसके साथ ही गांवों को नई तकनीकों से जोड़ना भी हमारा लक्ष्य है, ताकि ग्रामीण जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सके।”

उन्होंने सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि हर पात्र ग्रामीण को राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, शिक्षा, वृद्धावस्था पेंशन, जाति व निवास प्रमाण पत्र जैसी योजनाओं का लाभ समय पर और पारदर्शिता के साथ मिले।

इस योजना के अंतर्गत जिन ग्रामीणों ने किसी क्षेत्र में विशेष उपलब्धि प्राप्त की है — जैसे कृषि में नवाचार, शासकीय पुरस्कार से सम्मानित इत्यादि, उनकी पहचान और जानकारी भी सार्वजनिक की जाएगी, जिससे समाज प्रेरित हो। इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ  कुमार बिश्वरंजन सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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