साल के पहले दिन शर्मिंदा क्रिकेट, ईडन गार्डंस में हुआ दंगा, दर्शकों ने लगा दी थी स्टेडियम को आग

 कोलकाता के लोग खेलों के ऐसे एक्सपर्ट होते हैं कि फुटबॉल से लेकर हॉकी और क्रिकेट तक पर आपके साथ घंटों बहस कर सकते हैं। लेकिन किसी भी खेल में जरा भी अपने मनमाफिक काम नहीं होने पर उनके दंगे पर उतारू हो जाने का भी एक लंबा इतिहास है। इसका नजारा पिछले दिनों अर्जेंटीना के फुटबॉल सुपरस्टार लियोनल मेसी के कोलकाता टूर के दौरान साल्ट लेक स्टेडियम में दिखाई भी दे चुका है। ऐसा ही एक दंगे ने 58 साल पहले कोलकाता (तब कलकत्ता) में नए साल के पहले ही दिन क्रिकेट को शर्मसार कर दिया था। भारत और वेस्टइंडीज के बीच खेले जा रहे टेस्ट मैच के दूसरे दिन 1 जनवरी, 1967 को ईडन गार्डंस स्टेडियम में खचाखच भरी भीड़ अव्यवस्था पर भड़क गई। ऐसा दंगा मचा कि स्टेडियम के स्टैंड्स में आग लगा दी गई। पुलिस के लाठीचार्ज ने और ज्यादा हालात बिगाड़ दिए।

बिशन सिंह बेदी का था डेब्यू टेस्ट

कोलकाता में खेले गए इस टेस्ट मैच को क्रिकेट इतिहास में हमेशा दंगे जैसी शर्मनाक घटना के कारण याद किया जाता है, जबकि यह मुकाबला वर्ल्ड क्रिकेट के सबसे बेहतरीन खब्बू स्पिनरों में से एक बिशन सिंह बेदी के कारण यादगार होना चाहिए। बेदी ने इसी मैच के साथ अपने टेस्ट करियर का डेब्यू किया था। हालांकि इस मुकाबले में वे इकलौती पारी में गेंदबाजी करते हुए 36 ओवर में 92 रन देकर 2 ही विकेट ले सके थे।

क्षमता से ज्यादा टिकट बेच दिए थे आयोजकों ने

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्टेडियम में टेस्ट मैच देखने के लिए क्रिकेट प्रेमियों में जबरदस्त क्रेज था, जिसका फायदा उठाते हुए आयोजकों ने स्टेडियम की क्षमता से कई गुना ज्यादा टिकट बेच दिए थे। हालात ये थे कि दर्शक स्टैंड के भर जाने पर बाउंड्री के चारों तरफ घास पर आकर बैठ गए थे। बाउंड्री पर बैठे दर्शकों को हटाने के लिए पुलिस ने लाठी का सहारा लिया, जिससे भीड़ भड़क गई।

भीड़ को गुस्से में देखकर भाग गई पुलिस

ईएसपीएनक्रिकइंफो की रिपोर्ट के मुताबिक, भड़की हुई भीड़ ने पुलिसकर्मियों को ही पीटना शुरू कर दिया। इस पर पुलिसकर्मी स्टेडियम से भाग गए। तब तक दर्शक इतने ज्यादा भड़क चुके थे कि उन्होंने स्टैंड में कुर्सियां तोड़ना शुरू कर दिया। कुर्सियों और अन्य फर्नीचर में आग लगा दी गई। इससे मैदान में मौजूद खिलाड़ियों में भी खौफ फैल गया। भारत और वेस्टइंडीज, दोनों टीमों के खिलाड़ी अपनी जान बचाने के लिए भाग निकले। थोड़ी देर में स्टेडियम में पहुंचे भारी संख्या में पुलिस बल ने हालात काबू किए, लेकिन खिलाड़ियों ने मैच में आगे खेलने से इंकार कर दिया। कई घंटे तक चली कशमकश के बाद दिल्ली से केंद्र सरकार और कोलकाता में राज्य सरकार ने आगे ऐसी घटना नहीं होने देने का वादा किया, तभी वेस्टइंडीज की टीम खेलने के लिए तैयार हुई।

दो दिन बाद शुरू हुआ मैच, फिर भी पारी से हार गया भारत

मैच का दूसरा दिन दंगे के कारण बरबाद हो चुका था। तीसरा दिन रेस्ट-डे था, जिस पर खेलने से खिलाड़ियों ने इंकार कर दिया। दो दिन बाद 3 जनवरी को फिर से मैच शुरू हुआ। मैच के पहले दिन वेस्टइंडीज ने 4 विकेट पर 212 रन बनाए थे,जिसमें रोहन कन्हाई 78 रन बनाकर नॉटआउट थे। कन्हाई तो दोबारा मैच शुरू होने के बाद 90 रन पर आउट हो गए, लेकिन गैरी सोबर्स ने 85 गेंद में धुआंधार 70 रन बनाए, जबकि सैमूर नर्स ने 56 रन की पारी खेली। वेस्टइंडीज ने पहली पारी में 390 रन का स्कोर बनाया।

जवाब में भारतीय टीम एक समय 2 विकेट पर 98 रन बनाने के बाद गैरी सोबर्स और लांस गिब्स की गेंदबाजी के सामने महज 167 रन पर लुढ़क गई। गिब्स ने 5 विकेट लिए। टीम इंडिया 223 रन से पिछड़ चुकी थी। दूसरी पारी में भी 3 विकेट पर 105 रन स्कोर था, लेकिन फिर सोबर्स चमके और पूरी टीम 178 रन पर ऑलआउट होकर पारी व 45 रन के अंतर से मुकाबला हार गई। सोबर्स ने दूसरी पारी में 4 विकेट और लांस गिब्स ने 2 विकेट लिए। दो विकेट क्लाइव लॉयड के भी हिस्से में आए।
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