नारायणपुर में 2025 का अबूझमाड़ पीस हाफ मैराथन, 5000 से अधिक प्रतिभागियों की होगी भागीदारी

मैराथन: बस्तर ओलिंपिक की सफलता के बाद अब नारायणपुर में अबूझमाड़ पीस हाफ मैराथन 2025 का आयोजन किया जा रहा है। दो मार्च को होने वाली मैराथन में पांच हजार से अधिक प्रतिभागी शामिल होंगे। विगत वर्ष दिसंबर में पहली बार आयोजित बस्तर ओलिंपिक में एक लाख 65 हजार युवाओं ने हिस्सा लिया था। इसकी प्रशंसा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात में भी की थी। उन्होंने सुकमा जिले की बेटी पायल कवासी का जिक्र करते हुए उनकी बहादुरी की तारीफ की थी। इसके बाद नईदुनिया से खास बातचीत में पायल ने कहा था कि मेरी जैसे कई युवा है, जिनके अंदर प्रतिभा तो है, लेकिन उन्हे सही मंच नहीं मिल रहा है।

हाफ मैराथन में प्रतिभा दिखाएंगे युवा
इसमें हाफ मैराथन 21 किमी, 10 किमी और पांच किमी की होगी। तीन श्रेणियों में होने वाली मैराथन में एथलीटों, पहली बार भाग लेने वालों और स्थानीय प्रतिभाओं को हिस्सेदारी का अवसर मिलेगा। अत्याधुनिक टाइमिंग सिस्टम, पेसर्स, चिकित्सा सहायता और हाइड्रेशन स्टेशनों के साथ यह आयोजन सभी प्रतिभागियों के लिए एक यादगार अनुभव साबित होगा। प्रतिभागियों की सुविधा के लिए कई व्यवस्थाएं की गई हैं। पार्किंग, आवास और भोजन की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

धावकों के लिए की जाएंगी ये व्यवस्थाएं
धावकों के लिए रिकवरी और आराम करने के लिए टेंट भी लगाए जाएंगे। लाइव ट्रैकिंग सिस्टम से प्रतिभागियों को रीयल-टाइम अपडेट प्राप्त होंगे और मार्ग को एलईडी संकेतकों से स्पष्ट रूप से चिह्नित किया जाएगा। मैराथन से पहले 28 फरवरी को ‘बैंड दायरा’ द्वारा जादू बस्तर कान्सर्ट होगा।

एक मार्च को एक भव्य ड्रोन शो होगा। अबूझमाड़ मल्लखंब टीम की ओर से करतब दिखाए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, पारंपरिक नृत्य, स्थानीय कला प्रदर्शनियां और बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाने वाले अन्य कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। जिसमें स्थानीय युवाओं को प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा।

मैराथन का उद्देश्य स्वास्थ्य, एकता और शांति का संदेश
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पीस हाफ मैराथन को आशा का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि खेल की सार्वभौमिक भाषा के माध्यम से लोगों को एकसाथ लाकर शारीरिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देना चाहते हैं। इसके साथ ही शांति और एकता का एक महत्वपूर्ण संदेश भी देना चाहते हैं। अबूझमाड़ को अब नक्सलवाद से नहीं बल्कि यहां के लोगों की क्षमता और प्रतिभा से पहचाना जाएगा।

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