‘भारत जोड़ो यात्रा’ के बाद तेलंगाना में कुछ मजबूत हुई कांग्रेस की स्थिति : केशव राव

हैदराबाद। तेलंगाना की सियासत में भले ही भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) का कांग्रेस से छत्तीस का आंकड़ा है लेकिन प्रदेश की सत्तारूढ़ पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने ‘भारत जोड़ो यात्रा’ पर निकले राहुल गांधी की सराहना की है। बीआरएस संसदीय दल के नेता व पार्टी के राज्यसभा सदस्य के केशव राव का मानना है कि इस यात्रा के तेलंगाना से गुजरने के बाद राज्य में कांग्रेस की स्थिति कुछ मजबूत हुई है। 
उन्होंने कहा कि दक्षिण के इस राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कितना भी कुछ कर ले उसकी दाल नहीं गलने वाली है। उल्लेखनीय है कि अगले साल होने वाले तेलंगाना विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा ने इस राज्य में आक्रामक प्रचार अभियान छेड़ रखा है। आंध्र प्रदेश (संयुक्त) की लगातार तीन सरकारों में कैबिनेट मंत्री रहे के केशव राव ने कहा यह सही है कि भाजपा ने कुछ उपचुनावों में जीत हासिल की है लेकिन इसका अर्थ यह नहीं निकाला जाना चाहिए कि वह राज्य की सत्ता हासिल कर लेगी। दक्षिण के इस राज्य में उसका प्रवेश नहीं होगा। उन्होंने कहा राज्य में बीआरएस के लिए न भाजपा चुनौती है और न कांग्रेस। 
भाजपा ने तेलंगाना की 119 सदस्यीय विधानसभा में जीत के लिए 90 सीट का लक्ष्य तय किया है और उसने अपनी रणनीति को अंजाम तक पहुंचाने के लिए  मिशन-90 पर काम करना शुरू कर दिया है तथा इस कड़ी में कई कार्यक्रमों की रूपरेखा भी बनाई है। यह पूछे जाने पर कि क्या वह कांग्रेस के कमजोर होने का लाभ कुछ अन्य राज्यों की तरह तेलंगाना में भी भाजपा को मिलता देख रहे हैं राव ने कहा कांग्रेस हमारे लिए कोई चुनौती नहीं है लेकिन उनकी यात्रा (राहुल गांधी की अगुवाई में भारत जोड़ो यात्रा) के बाद वह कुछ मजबूत जरूर हुई है। 
गौरतलब है कि तेलंगाना में कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा 24 अक्टूबर को शुरू हुई थी और महाराष्ट्र में प्रवेश करने से पहले करीब 350 किलोमीटर की दूरी तय कर सात नवंबर को समाप्त हुई। हालांकि इसके बाद कांग्रेस की तेलंगाना इकाई में कलह भी सामने आई। प्रदेश अध्यक्ष रेवंत रेड्डी के खिलाफ प्रदेश कांग्रेस नेताओं के एक वर्ग ने मोर्चा खोल दिया जिसे सुलझाने के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह को हस्तक्षेप करना पड़ा था। कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान पर बीआरएस के एक धड़े का मानना है कि कांग्रेस का अत्यधिक कमजोर होना उसके लिए अच्छा संकेत नहीं है क्योंकि इसका फायदा भाजपा को मिल सकता है। 

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