कांग्रेस के मजबूत दुर्ग को तोड़ने अमित शाह ने बनाई रणनीति…..

रायपुर। कांग्रेस के सबसे मजबूत गढ़ दुर्ग संभाग की 20 विधानसभा सीट पर बढ़त बनाने के लिए अब भाजपा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की रणनीति पर काम करेगी। कभी भाजपा का दुर्ग रहे इस संभाग में पिछले चुनाव में कांग्रेस ने अप्रत्याशित प्रदर्शन करते हुए 20 में से 18 सीटें जीत ली थीं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल दुर्ग संभाग की पाटन विधानसभा सीट से विधायक हैं। राज्य सरकार के 12 में से छह मंत्री दुर्ग संभाग के हैं।

इस संभाग की 13 सीटें ऐसी हैं, जहां भाजपा जीतती रही है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और दुर्ग संभाग के छह मंत्रियों की सीट पर भी भाजपा को पिछले तीन चुनावों में जीत मिलती रही है। कोई भी ऐसी सीट नहीं है, जहां चारों चुनाव कांग्रेस के विधायक ही जीते हों। पिछले चुनाव में दुर्ग गंवाने के बाद अब यहां भाजपा को अमित शाह की रणनीति का ही सहारा है। शाह ने यहां सभा के बाद संभाग के पदाधिकारियों के साथ करीब आधे घंटे चर्चा की। इस चर्चा के बाद 20 सीटों के लिए विशेष रणनीति बनाई गई है।

जीत के लिए शाह की यह है रणनीति

राज्य गठन के बाद दुर्ग संभाग की जिन 13 सीटों पर दो या तीन चुनाव भाजपा जीती है, उनके लिए शाह ने स्थानीय नेता, स्थानीय मुद्दा का फार्मूला दिया है। प्रदेश स्तर और केंद्रीय स्तर की एक विशेष टीम इस अभियान की मानिटरिंग करेगी। इसकी महीने में एक बार अमित शाह की टीम समीक्षा करेगी।

अगले एक महीने में हर सीट पर कम से कम पांच मजबूत नेताओं की पहचान करके जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। बताया जा रहा है कि इन पांच नेताओं में से एक को विधानसभा का टिकट दिया जाएगा। इसमें सांसद, पूर्व सांसद और पूर्व विधायक शामिल हैं। भाजपा ने पिछले चुनाव में कई विधायकों के टिकट काटे थे। उनका परफार्मेंस अच्छा पाया गया, तो वह उम्मीदवार हो सकते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में सामाजिक और जातिगत समीकरण का भी ध्यान रखा जाएगा।

शाह के दुर्ग आने के मायने

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नौ साल पूरे होने पर हर संभाग में केंद्रीय मंत्री पहुंच रहे हैं। लेकिन अमित शाह का दौरा सबसे कठिन संभाग दुर्ग में हुआ है। भाजपा की राजनीति के चाणक्य माने जाने वाले शाह के आने से न सिर्फ कार्यकर्ताओं में उत्साह है, बल्कि प्रदेश में सरकार बनाने के उनके दावे से दुर्ग संभाग की सीटों पर अब नए समीकरण बनेंगे। 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रदेश की सिर्फ दुर्ग लोकसभा सीट पर भाजपा को हार मिली थी, लेकिन शाह की रणनीति से 2019 में बाजी पलटी और भाजपा प्रत्याशी विजय बघेल ने सबसे बड़ी जीत दर्ज की।जबकि लोकसभा चुनाव के आठ महीना पहले ही कांग्रेस की लहर देखने को मिली थी।

इन 13 सीटों पर दो चुनाव जीती है भाजपा

राजनांदगांव, डोंगरगढ़, नवागढ़, अहिवारा, भिलाई, वैशाली नगर, गुंडरदेही, डोंडीलाेहारा, संजारी बालोद, पंडरिया, कवर्धा, बेमेतरा, डोंगरगांव।

दुर्ग संभाग में इस तरह चलेगा कैंपेन

-सामाजिक क्षेत्र की प्रमुख हस्तियों को पार्टी के साथ लाना।

-अलग-अलग समाज के प्रमुख नेताओं और धर्मगुरुओं के साथ संवाद।

-आरक्षित सीट पर सरंपच और जनपद प्रतिनिधियों को पार्टी की नीतियों से जोड़ना।

-पिछले चुनाव के बाद पार्टी से दूर हुए प्रभावशाली नेताओं की वापसी कराना।

-केंद्र सरकार की नीतियों का लाभ लेने वालों से सीधा संवाद।

-हर विधानसभा के मुद्दे तैयार करना और उसके आधार पर राज्य सरकार को घेरना।

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