चुनाव नजदीक आते ही राजनेताओं का उज्‍जैन पहुंचने का क्रम बढ़ा, नवरात्र में तांत्रिक अनुष्‍ठान की अग्रिम बुकिंग

उज्जैन ।    भगवान महाकाल की नगरी उज्जयिनी तंत्र साधकों का भी बड़ा केंद्र है। मां हरसिद्धी और भगवान कालभैरव का यह नगर रात गहराते ही तंत्र साधना का साक्षी बनता है। चुनाव नजदीक आते ही यहां राजनीति से जुड़े लोगों का आना-जाना तेज हो जाता है।

कई बड़े नेता कराते हैं तांत्रिक अनुष्ठान

टिकट पाने, चुनाव जीतने और जीत के बाद मंत्री बनने की इच्छा पूर्ति के लिए कई बड़े नेता भी यहां तांत्रिक अनुष्ठान कराते रहे हैं। इस बार चुनाव से पहले नवरात्र है। नवरात्र में अनुष्ठान के लिए कई माह पहले से कुछ राजनीतिज्ञों ने अग्रिम बुकिंग करा ली है।

घट स्थापना के साथ राजनेताओं के गुप्त अनुष्‍ठान आरंभ होंगे

पुजारियों- तांत्रिकों के अनुसार 15 अक्टूबर को शारदीय नवरात्र पर घट स्थापना के साथ राजनेताओं के गुप्त अनुष्ठान शुरू होंगे। इसमें जपात्मक, हवनात्मक व तांत्रिक अनुष्ठान शामिल हैं। उज्जैन में शक्तिपीठ हरसिद्धि, गढ़ कालिका का तथा काल भैरव क्षेत्र में इस तरह के गुप्त अनुष्ठान होंगे। तांत्रिक अनुष्ठान में प्रत्यंगिरा व बगलामुखी की साधाना तथा शतचंडी व लक्ष्यचंडी यज्ञ प्रमुख है। इसमें देवी दुर्गा के बीज मंत्र के संपुट लगाकर दुर्गा सप्तशति के पाठ किए जाते हैं। साथ ही मंत्रों के द्वारा दुर्गा के भेद अनुसार यज्ञ में विशिष्ट सामग्री की आहुति दी जाती है।

एक करोड़ रुपये तक खर्च करते हैं नेता

अनुष्ठानकर्ता पं. रूपेश मेहता ने बताया राजनेता टिकट प्राप्त करने से लेकर चुनाव में जीत तथा मंत्री पद प्राप्त करने के लिए अनुष्ठान कराते हैं। अनुष्ठान कराने में एक लाख से एक करोड़ रुपये तक का खर्च आता है जिसे नेता खुशी खुशी खर्च करते हैं। ज्योतिषाचार्य पं. अमर डब्बावाला ने बताया तंत्र, मंत्र व यंत्र साधना कार्यसिद्धि व मनोवांछित फल प्रदान करती है। नवरात्र में दस महाविद्या के अलग-अलग स्वरूप की साधना मनोरथ पूर्ण कराती है। इसमें प्रत्यंगिरा व बगलामुखी की साधना प्रमुख है। .

काबीना मंत्री से बड़े बद के लिए कराया अनुष्ठान

सूत्र बताते हैं हाल ही में मालवा क्षेत्र के एक कैबिनेट मंत्री ने और बड़े पद के लिए उज्जैन में गुप्त अनुष्ठान कराया है। इंदौर व देवास रोड के बीच एक आश्रम में अनुष्ठान संपन्न हुआ है। अनुष्ठान के लिए दक्षिण भारतीय विद्वानों को बुलाया गया था। अनुष्ठान संपन्न होते ही इन्हें विशेष वाहनों से यथा स्थान भेज दिया गया।

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