आउट सोर्स पर भरोसा, मंत्रि परिषद के फैसले पर पांच साल बाद अमल नहीं

भोपाल । प्रदेश में सरकारी भर्ती को लेकर सरकार से लेकर शासन तक बेहद असंवेदनशील बना हुआ है। फिर मामला भले ही मंत्रियों से लेकर आला अफसरों से जुड़ा हुआ भी क्यों न हो। दरअसल मामला है गृह विभाग के अधीन आने वाले स्टेट गैरिज का। दरअसल इसी संस्थान द्वारा मंत्रियों से लेकर आला अफसरों के लिए वहान से लेकर उसके चालकों तक की व्यवस्था की जाती है। हालत यह है कि संस्थान के पास सरकारी वाहन चालकों का टोटा अना हुआ है। ऐसे में संस्थान में वाहन चालाकों की स्थाई भर्ती के लिए पांच साल पहले कैबिनेट ने मंजूरी प्रदान की थी, लेकिन इसकी फाइल पर अब तक अमल ही नहीं किया गया है। इसकी वजह से संस्थान को वाहन चालकों की कमी के संकट का सामना करना पड़ रहा है। हालत यह है कि संस्थान का आउट सोर्स कर्मचारियों से काम चलाना पड़ रहा है। ऐसे में सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। जानकारी के अनुसार वर्ष 2018 के दौरान स्टेट गैरिज में वाहन चालकों के 34 पद भरने की मंजूरी दी गई थी। इसके बाद माना जा रहा है था कि इन पदों पर जल्द ही भर्ती की जाएगी। लेकिन अब तो निणर्य हुए पांच साल से अधिक का समय हो चुका है, लेकिन भर्तियां ही नहीं की गई हैं। यह हाल तब है जबकि स्टेट गैरिज द्वारा इन पदों की भर्ती के लिए लगातार पत्राचार करता रहा है। भर्ती के लिए वाहन चालकों के संगठनों ने सभी आला अफसरों से लेकर विभाग के मंत्रियों तक से मिलकर पक्ष रखा, लेकिन यह कवायद भी बेकाम ही रही है।

काम का बढ़ रहा बोझा


वर्तमान में काम कर रहे वाहन चालकों का कहना है कि पदों की पर्ति नहीं होने के कारण हर रोज उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्हें तय समय से अधिक ड्यूटी करनी पड़ती है। जिसकी वजह से सेहत से लेकर सुरक्षा तक पर असर पड़ता है। यही नहीं कई बार तो उन्हें आराम करने तक का मौका नहीं मिलता था। इस संस्थान के जिम्मे ही मंत्रियों से लेकर विभागाध्यक्षों की गाडिय़ों को चलातने का जिम्मा है। ऐसे में अगर किसी को अति आवश्यक काम आ जाता है या फिर बीमार हो जाता है, तो उसे अवकाश तक मिलने में बेहद मुश्किल होती है। इसकी वजह है उसके स्थान पर कोई दूसरा विकल्प नहीं होना। वाहन चालकों का आरोप है कि विभाग भर्ती की जगह आउट सोर्स को बढ़ावा दे रहा है। जिसकी वजह से ही कैबिनेट के निर्णय पर अमल भी नहीं किया जा रहा है।

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