बंगाल पंचायत चुनाव: TMC का दबदबा, BJP का वोट शेयर गिरा तो कांग्रेस-वाम ने सुधारा

Bengal Panchayat Election 2023: उम्मीद के मुताबिक सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने पश्चिम बंगाल में पंचायत प्रणाली के तीनों स्तरों पर 8 जुलाई को हुए चुनावों में जबरदस्त जीत दर्ज की.वहीं चुनाव में बीजेपी दूसरे स्‍थान पर रही.

2021 विधसभा चुनाव के मुकाबले बीजेपी का घटा वोट शेयर

बीजेपी जिला परिषद, पंचायत समिति और ग्राम पंचायत तीनों स्तरों पर दूसरे स्थान पर रही. हालांकि, भगवा खेमे के लिए चिंता की बात यह है कि 2021 के विधानसभा चुनावों की तुलना में उसके वोट शेयर में भारी गिरावट आई है. 2021 में बीजेपी का वोट शेयर 38 फीसदी से घटकर इस बार 22 फीसदी हो गया.

कांग्रेस समेत अन्य दलों का बढ़ा वोट शेयर

दूसरी ओर सीटों की संख्या के मामले में तीसरे स्थान पर होने के बावजूद कांग्रेस, वाम मोर्चा और ऑल इंडिया सेक्युलर फ्रंट (एआईएसएफ) गठबंधन के वोट शेयर 2021 विधानसभा चुनावों की तुलना में बढ़े हैं. इस तिकड़ी का वोट शेयर इस बार दोगुना से अधिक हो गया है. 2021 विधानसभा में यही प्रतिशत 10 प्रतिशत था जो अब बढ़कर 21 प्रतिशत हो गया है.

जिला परिषद चुनाव में भी तृणमूल ने मारी बाजी

तृणमूल ने 22 जिलों की सभी जिलपरिषद सीटों पर जीत हासिल कर लिया है. पंचायत प्रणाली में सबसे ऊंचा स्तर जिला परिषद का होता है. जिला परिषद के चुनाव में तृणमूल को सबसे ज्यादा 760 को सीटें मिलीं. उसके बाद बीजेपी 29, कांग्रेस 11, जबकि वाम मोर्चा और अन्य ने दो-दो सीटें हासिल कीं

पंचायत समिति में किसको कितनी सीट ?

दूसरे स्तर यानी पंचायत समितियों में तृणमूल ने 7,166 सीटें जीतकर अपना वर्चस्व बरकरार रखा है. इसके बाद बीजेपी को 1,007 सीट, कांग्रेस को 277 सीट, वाम मोर्चा को 175 सीट और अन्य151 सीटें मिलीं.

ग्राम पंचायत के सबसे नीचले स्तर पर भी तृणमूल का दबदबा

ग्राम पंचायतों के सबसे निचले स्तर पर तृणमूल को 42,622 सीटें मिलीं. उसके बाद बीजेपी को 9,777, वाम मोर्चा को 2,988, कांग्रेस को 2,576 और अन्य को 2,579 सीटें मिलीं. वहीं लगभग 350 सीटों पर बराबरी रही. बराबर रही सीटों पर बाद में सिक्का उछालकर विजेता का फैसला किया जाएगा.

तृणमूल ने जीत का श्रेय किसको दिया ?

तृणमूल ने इस जीत का श्रेय ग्रामीण बंगाल में जमीनी स्तर पर किए गए बड़े पैमाने पर विकास कार्यों के साथ-साथ ग्रामीण चुनावों से पहले पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी द्वारा किए गए दो महीने लंबे जन संपर्क कार्यक्रम के प्रभाव को दिया है.

हालांकि, विपक्षी दल दावा कर रहे हैं कि नतीजे 8 जून को मतदान की तारीख की घोषणा के बाद से हुई भारी हिंसा के बीच लोगों की सच्ची भावना को प्रतिबिंबित नहीं करते हैं. हिंसा में 44 लोगों की जान चली गई थी.
 

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