कोहरे पर भारी भोपाल की ‘हाईटेक’ लैंडिंग, महानगरों जैसा सिस्टम लगा; अब जीरो विजिबिलिटी में भी नहीं भटकेंगे विमान
सिस्टम की मदद से उड़ानें लैंड
कुछ समय पहले तक रनवे विजुअल रेंज (आरवीआर) रनवे पर लगी लाइटिंग की मदद से 550 मीटर तक दृश्यता होने पर विमान लैंड हो पाते थे। इससे कम दृश्यता होने पर विमानों को अक्सर निकटतम एयरपोर्ट पर डायवर्ट कर दिया जाता था। अब नया इंट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम स्थापित किया गया है। इसकी मदद से 350 मीटर दृश्यता होने पर भी विमान लैंड हो रहे हैं। जनवरी में ऐसे अवसर भी आए, जब दृश्यता 200 से 250 मीटर तक थी। ऐसे समय में भी नए सिस्टम की मदद से उड़ानें लैंड करवाई गईं। यदि यह सिस्टम न होता तो उड़ानों को डायवर्ट करना पड़ता।
एयरपोर्ट अथॉरिटी के अनुसार वर्तमान में दिल्ली, मुंबई सहित देश के चुनिंदा एयरपोर्ट पर ही भोपाल से अपग्रेड आईएलएस सिस्टम लगा है। भोपाल मध्यप्रदेश का पहला ऐसा एयरपोर्ट है, जहां अत्याधुनिक अपग्रेडेड आईएलएस सिस्टम स्थापित है। अब रनवे सेंट्रल लाइन का उपयोग शुरू हो गया है। पायलटों को सेफ लैंडिंग में मदद मिल रही है। इसकी मदद से विमानों को ट्रैफिक क्षेत्र में आते ही रनवे नजर आ रहा है, जिससे सुरक्षित लैंडिंग हो रही है।
दिसंबर एवं जनवरी माह में भोपाल की उड़ानें डायवर्ट नहीं
एयरपोर्ट डायरेक्टर रामजी अवस्थी के अनुसार लंबे अर्से बाद इस बार दिसंबर एवं जनवरी माह में भोपाल की उड़ानें डायवर्ट नहीं हुईं। दूसरे शहरों की उड़ानें डायवर्ट होकर भोपाल में लैंड हुईं।
