पौने तीन लाख रुपये का टिकट खरीदा, प्लेन में मिली टूटी कुर्सी और बदबूदार टॉयलेट, कोर्ट ने दिलाया 1.5 लाख का हर्जाना
नई दिल्ली: फ्लाइट में जब आप इंटरनेशनल रूट (International Flight) का टिकट खरीदते हैं तो आप चाहेंगे कि आपको यादगार सर्विस मिले। लेकिन जब आप अपनी सीट पर जाते हैं तो टूटी हुई कुर्सी मिलती है। सीट को आगे-पीछे करने वाला बटन काम नहीं करता है। 15 घंटे के हवाई सफर के दौरान आपका एंटरटेनमेंट सिस्टम खराब मिलता है। रास्ते में परोसा जाने वाला फूड और बीवरेज घटिया मिलता है। यही नहीं, आपको प्लेन में टॉयलेट भी बदबूदार और गंदा मिलता है। तो आप क्या करेंगे? दिल्ली के इस व्यक्ति ने तो कोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया। जानिए कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया।
कहां की है घटना
यह घटना दिल्ली के एक व्यक्ति के साथ घटी। उसने अपनी बेटी के साथ न्यूयॉर्क जाने और वहां से लौटने का रिटर्न टिकट एयर इंडिया की फ्लाइट में खरीदा था। उन्होंने मेक माई ट्रिप वेबसाइट से इकोनॉमी क्लास का रिटर्न टिकट खरीदने के लिए कुल 2,73,108 रुपये खर्च किया। वह 6 सितंबर 2023 को भारत से न्यूयॉर्क गए और 13 सितंबर 2023 को लौटे थे। दोनों शहरों के बीच 15 घंटे की लंबी फ्लाइट का सफर उनका सुहाना नहीं रहा। इसकी शिकायत कंपनी से की लेकिन वहां से उनका शमन नहीं हुआ। तब उन्होंने दिल्ली के कंज्यूमर कोर्ट (New Delhi District Consumer Commission-VI) का दरवाजा खटखटाया।
क्या परेशानी हुई
कोर्ट को दी गई शिकायत के मुताबिक उस व्यक्ति को फ्लाइट में टूटी हुई सीटें मिली। सीट को आगे-पीछे करने वाला बटन काम नहीं कर रहा थे। यही नहीं, फ्लाइट अटेंडेंट को बुलाने वाला बटन भी खराब था। उन्होंने यह भी दावा किया कि इन-फ्लाइट एंटरटेनमेंट के लिए फ्लाइट की सीट के सामने लगी मॉनिटर स्क्रीन भी खराब थीं। अब इतनी लंबी फ्लाइट में समय कैसे काटें? उनका कहना था कि विमान में बदबू आ रही थी और इसे ठीक करने के लिए कोई परफ्यूम या एयर फ्रेशनर का छिड़काव नहीं किया गया था। उन्होंने फ्लाइट की हालत की तस्वीरें भी कोर्ट में पेश की।
टॉयलेट की हालत तो और खराब
वह जब टॉयलेट गए तो वहां की हालत देख कर चौंक ही गए। विमान के वॉशरूम की स्थिति पब्लिक टॉयलेट से भी बदतर थी। उनमें बेसिक टॉयलेट स्प्रे तक नहीं था। वहां की बदबू असहनीय थी। यही नहीं, भोजन की गुणवत्ता में उन्होंने भारी अव्यवस्था पाई। चाय ठंडी थी, चीनी उपलब्ध नहीं थी, और चाय को मिलाने वाला स्टिरर भी नहीं दिया गया था। ऊपर से, विमान के समूचे स्टाफ की सेवा बिल्कुल घटिया थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि स्टाफ बहुत असभ्य था और उनकी किसी भी चिंता का समाधान करने में विफल रहा। ग्राहक का कहना है कि उन्होंने इन टिकटों को खरीदने पर कुल 2,73,108 रुपये खर्च किए। इसके अलावा, उन्होंने अपनी बेटी की यात्रा की तारीख बदलने के लिए भी 45,000 रुपये अतिरिक्त दिए। बेटी की टिकट पहले 20 सितंबर, 2023 के लिए थी, जिसे बदलकर 6 सितंबर, 2023 कर दिया गया था।
कंपनी को की शिकायत
शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने 3 और 9 नवंबर, 2023 को एयरलाइन को कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। फिर उन्होंने नई दिल्ली डिस्ट्रिक कंज्यूमर फोरम में एयरलाइन के खिलाफ यह शिकायत दर्ज कराई। कोर्ट ने इस मामले पर 14 जनवरी, 2026 को फैसला सुनाया।
फैसले में क्या कहा गया
नई दिल्ली कंज्यूमर कोर्ट की अध्यक्ष पूनम चौधरी और सदस्य शेखर चन्द्र ने इस मामले में एयर इंडिया को सेवा में दोषी माना। उपभोक्ता आयोग ने माना कि एयरलाइन ने उनसे 2.7 लाख रुपये टिकट के लिए लिए थे, लेकिन उन्हें घटिया सेवा दी।
एयरलाइन ने क्या कहा
एयरलाइन ने जवाब दिया कि उन्होंने मानक प्रक्रिया का पालन किया है। एयरलाइन के अनुसार, उनकी इंजीनियरिंग टीम ने उनकी यात्रा के लिए उपयोग किए गए एयरक्राफ्ट का निरीक्षण किया और कोई स्पष्ट समस्या नहीं पाई। इसके अलावा, एयरलाइन ने उल्लेख किया कि चेक-इन के दौरान, वह और उनकी बेटी स्टाफ के पास पहुंचे और पूछा कि क्या उनकी सीटों को बिजनेस क्लास में अपग्रेड किया जा सकता है, क्योंकि वे उनकी एयरलाइन के फ्रिक्वेंट फ्लायर (Frequent Flyer) हैं। स्टाफ ने विनम्रता से अनुरोध अस्वीकार कर दिया, शिकायतकर्ता और उनकी बेटी को समझाया कि वे उनकी वफादारी को महत्व देते हैं, लेकिन उस समय अपग्रेड संभव नहीं था क्योंकि बिजनेस क्लास पूरी तरह से भरा हुआ था। एयरलाइन का कहना है कि बोर्डिंग के बाद ही शिकायतकर्ता और उनकी बेटी ने अपने शुरुआती व्यवहार के विपरीत व्यवहार दिखाया, गलत तरीके से दावा किया कि पर्सनल टेलीविजन (PTV) सिस्टम खराब था, भले ही वे इसका उपयोग करने में अनिच्छुक लग रहे थे। एयरलाइन के मुताबिक इन-फ्लाइट स्टाफ ने आरोप पर विनम्रता से प्रतिक्रिया दी, शिकायतकर्ता और उनकी बेटी को PTV को अपनी संतुष्टि के अनुसार संचालित करने में मदद की।
कोर्ट ने हर्जाना भरने को कहा
कंज्यूमर कोर्ट ने माना कि एयरलाइन सेवा में कमी की दोषी थी। हालांकि उन्होंने एयर इंडिया को टिकट के पैसे लौटाने को नहीं कहा। लेकिन, कोर्ट ने नोट किया कि एयरलाइन ने खराब सुविधाओं और सेवाओं के बारे में गंभीर आरोपों का कोई विशिष्ट या विश्वसनीय जवाब नहीं दिया, और कानूनी नोटिस के जवाब में उसकी चुप्पी उसके खिलाफ गई। उपभोक्ता आयोग ने दोहराया कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत, एयरलाइंस सेवा प्रदाता हैं और यात्री उपभोक्ता हैं, और अनिवार्य सुविधाएं प्रदान करने में विफलता सेवा में कमी मानी जाती है। इसलिए शिकायतकर्ता और उसकी बेटी को मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न के लिए 50-50 हजार रुपये का हर्जाना दिलवाया। इसके साथ ही मुकदमेबाजी के खर्च के लिए भी उन्हें कंपनी से 50,000 रुपये दिलवाए
