इंदौर में दौड़ेगी केबल कार, ट्रैफिक और भीड़भाड़ से मिलेगी राहत

इंदौर: शहर के भीड़भाड़ वाले इलाकों में ट्रैफिक की समस्या को दूर करने के लिए केबल कार चलाई जाएगी। सरकार ने इसे बजट में रखकर प्रोजेक्ट को और पुख्ता कर दिया है। हालांकि फिजिबिलिटी सर्वे करने वाली कंपनी ने पहले सात रूट बनाए थे, लेकिन बाद में उसने दो रूट को उपयोगी बताया है। इन दो रूट पर कहां स्टेशन बनेंगे, इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा रही है। बाद में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर काम कराने के लिए टेंडर जारी किए जाएंगे। इंदौर में बढ़ती आबादी और ट्रैफिक को देखते हुए पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर जोर दिया जा रहा है। मेट्रो ट्रेन का काम चल रहा है, वहीं विदेशों की तर्ज पर हवा में केबल कार चलाने की संभावना तलाशी जा रही है। इसमें उन लोकेशन को लिया गया, जहां भीड़भाड़ है और आवाजाही आसान नहीं है। इसके फिजिबिलिटी सर्वे को लेकर वापकोस एजेंसी ने सात रूट की रिपोर्ट दी थी, जिसमें से सबसे उपयोगी दो रूट को पहले चरण में लिया जाएगा। केबल कार की नोडल एजेंसी इंदौर विकास प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में यह निर्णय लिया गया। इसके बाद एजेंसी ने कलेक्टर आशीष सिंह और आईडीए सीईओ आरपी अहिरवार के सामने प्रजेंटेशन दिया। सिंह ने दोनों रूट पर बनने वाले स्टेशनों और अन्य जरूरतों की जानकारी मांगी है, जिस पर एजेंसी काम कर रही है।

राजबाड़ा से पलासिया पर विचार

एजेंसी ने एक यलो रूट भी तैयार किया था, जो 5.52 किमी लंबा था और रामचंद्र नगर से बड़ा गणपति चौराहा, राजबाड़ा, इंदौर रेलवे स्टेशन होते हुए पलासिया तक था। इस रूट को राजबाड़ा से पलासिया चौराहा तक छोटा करके संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए गए हैं। माना जा रहा है कि पर्यटन की दृष्टि से इस रूट पर काफी आवाजाही होगी। मेट्रो ट्रेन के आने से इस पर क्या असर पड़ेगा जैसे बिंदुओं पर एजेंसी को रिपोर्ट देनी है।

ये हैं दो रूट

1. ग्रीन लाइन: 6.24 किमी

रूट: चंदन नगर चौराहा, लाबरिया भेरू चौराहा, मालगंज चौराहा, यशवंत रोड गुरुद्वारा, जवाहर मार्ग चौराहा, सरवटे बस स्टैंड, एमवाय अस्पताल से शिवाजी चौराहा।

2. ग्रे लाइन: 6.83 किमी

मार्ग: इंदौर रेलवे स्टेशन, मालवा मिल, पटनाईपुरा चौराहा, भमोरी चौराहा से विजय नगर चौराहा।

लागत लगभग 100 करोड़ प्रति Km 

केबल कार लगाने की लागत का भी अनुमान लगाया गया। इसके अनुसार प्रति किमी 100 करोड़ रुपए खर्च होंगे, जो सीईएन मानक स्तर के होंगे और जीएसटी अलग से लगेगा।

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