फोर्ब्स और टाइम की पावरफुल महिलाओं की लिस्ट में रहता था नाम, आखिर अर्श से फर्श पर आई चंदा कोचर

नई दिल्ली: पद्म भूषण से नवाजी गई चंदा कोचर और विडियोकॉन लोन केस से जुड़े अहम किरदार ऐसे रहे हैं, इंडिया इंक जिनकी कसमें खाया करता था। जिनकी दी पार्टियों की रौनक मंत्री और अभिनेता बढ़ाया करते थे। कोचर के अलावा इस कहानी में उनके पति और विडियोकॉन इंडस्ट्रीज के चेयरमैन वेणुगोपाल धूत के नाम भी जुड़े हैं।

इस तरह चमका करियर

चंदा कोचर ने 1984 में एक ट्रेनी के रूप में ICICI बैंक जॉइन किया था। कोचर और ICICI बैंक की तरक्की का सफर लगभग एकसाथ बढ़ा एक छोटी फाइनैंशल सर्विसेज कंपनी से बढ़कर ICICI बैंक जहां भारत में बैंकिंग का एक जानामाना नाम बन गया। वहीं, चंदा कोचर को भी 2009 में ICICI बैंक का एमडी और सीईओ बना दिया गया। बैंक की ग्रोथ बढ़ाने में कोचर ने जो काम किए, उससे काफी तारीफ हुई फोर्ब्स की दुनिया की 100 ताकतवर महिलाओं की लिस्ट में लगातार 7 बार उन्हें जगह दी गई। टाइम मैगजीन ने साल 2015 में 100 सबसे प्रभावशाली महिलाओं की लिस्ट में उन्हें शामिल किया।

कैसे आरोपों में घिरीं चंदा कोचर?

CBI ने आरोप लगाए थे कि 2009 से 2011 के बीच ICICI बैंक ने विडियोकॉन ग्रुप को 1875 करोड़ रुपये के 6 लोन मंजूर किए थे। तब चंदा ही बैंक की सर्वेसर्वा थी। साल 2017 तक ये लगभग सारे ही लोन डूब गए और बैंक को 1730 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। बैंक की आंतरिक जांच शुरू होने के बाद कोचर ने 2018 में इस्तीफा दे दिया।

ED ने क्या कहा था?

साल 2019 में एन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट ने कोचर, उनके पति दीपक कोचर और विडियोकॉन के चेयरमैन वेणुगोपाल धूत के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया। आरोप लगाया कि विडियोकॉन ग्रुप को लोन मंजूर करने के बदले कोचर और उनके परिवार ने रिश्वत ली। ईडी ने कहा था कि कोचर के पति दीपक कोचर की कंपनी न्यूपावर रिन्यूएबल्स को कई शेल कंपनियों के जरिए विडियोकॉन ग्रुप से 64 करोड़ रुपये मिले थे।

दीपक कोचर क्या करते थे?

एक नेवी ऑफिसर के बेटे दीपक कोचर ने मुंबई यूनिवर्सिटी से ग्रैजुएशन किया और फिर जमनालाल बजाज इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट से फाइनैंस में मास्टर डिग्री ली थी। वहीं उनकी मुलाकात चंदा कोचर से हुई थी, जो तब चंदा आडवाणी हुआ करती थीं। दीपक ने 2008 में न्यूपावर रिन्यूएबल्स की शुरुआत
की। इसमें दीपक और वेणुगोपाल धूत की बराबर की हिस्सेदारी थी। लेकिन कुछ ही दिनों बाद धूत ने अपना हिस्सा ढाई लाख रुपये में बेच दिया और वह
हिस्सा खरीदा उनके ही एक सहयोगी महेश चंद्र पंगलिया ने।

2010 में विडियोकॉन ग्रुप की कंपनी सुप्रीम एनर्जी ने न्यूपावर को 64 करोड़ रुपये का लोन दिया ताकि यह अपना सोलर बिजनेस बढ़ा सके। अप्रैल 2013 में दीपक कोचर के पिनैकल ट्रस्ट ने सुप्रीम एनर्जी को खरीद लिया। इस सौदे में 64 करोड़ रुपये की वह देनदारी भी शामिल थी। हालांकि 64 करोड़ रुपये जब दिए गए, उसके कुछ ही दिनों पहले ICICI बैंक ने विडियोकॉन को लोन मंजूर किया था। इस पर एक शेयरहोल्डर अरविंद गुप्ता ने हितों के टकराव का सवाल उठाया था और उन्होंने 2016 में पीएमओ को लेटर भी लिखा था। 2018 में सीबीआई ने इसमें प्रीलिमिनरी इंक्वायरी दर्ज की थी।

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