BJP के लिए बिहार का CM चुनना आसान नहीं, 3 ऑप्शन पर अंदर ही अंदर विरोध, UGC एक्ट पर आक्रोश को बुझाने का ‘प्लान’
पटना: सीएम नीतीश कुमार राज्यसभा जा रहे हैं, ये कन्फर्म हो गया। बेटे निशांत अब बिहार में पिता की खाली जगह भरेंगे (बतौर MLC और डिप्टी सीएम), ये भी करीब-करीब तय हो चुका है। लेकिन बिहार का सीएम कौन होगा। NBT संवाददाता को रात में ही सूत्रों ने बता दिया था कि तीन नाम आगे किए जा चुके हैं। पहला नाम दिलीप जायसवाल का है, तो दूसरा नाम सम्राट चौधरी का। तीसरा नाम नित्यानंद राय का है।
बिहार का अगला सीएम कौन?
यही सबसे बड़ा प्रश्न है जिसको लेकर बीजेपी के अंदर कुछ भी साफ-साफ नहीं दिख रहा। नाम तो कई हैं लेकिन NBT संवाददाता को सूत्रों ने देर रात ही साफ-साफ तीन नामों पर प्रस्ताव के बारे में बता दिया था। लेकिन गुरुवार की सुबह होते-होते इन तीनों नामों को लेकर बीजेपी के अंदर ही अंदर विरोध भी दिखना शुरू हो गया। ये अलग बात है कि विरोध सतह पर नहीं बल्कि पार्टी के अंदर चल रही चर्चा में है। कार्यकर्ता से लेकर नेताओं तक का ख्याल रखना अहम माना जा रहा है। अब क्यों है ये विरोध और क्या कारण हैं, इसके लिए हमने अपने अलग-अलग सूत्रों से बात की। कई जगह बात करने के बाद ये समझना मुश्किल नहीं कि तीन नामों की दावेदारी के साथ उनकी जाति, पॉलिटिकल बैकग्राउंड से जुड़ा पेंच भी है। आपको बारी-बारी से नेताओं के नाम के साथ समझाते हैं।
पहले दावेदार की अड़चन कहां
इसमें कोई दो राय नहीं कि नीतीश कुमार की राज्यसभा सीट संभालते ही बीजेपी से सीएम पद के पहले दावेदार दिलीप जायसवाल की छवि ठीक-ठाक है। वो सीएम पद के एक अच्छे दावेदार भी हैं। लेकिन यहां पेच जाति का है। दिलीप जायसवाल वैश्य समाज से आते हैं और दिक्कत यहीं है। बिहार में बीजेपी का एक धड़े का कहना है कि ऑलरेडी बीजेपी के बिहार अध्यक्ष संजय सरावगी हैं। ऐसे में वैश्य जाति के दो नेताओं को ऊंची कुर्सी देने से पार्टी के वोट बैंक में गलत मैसेज जाएगा। यही वो बात है जो दिलीप जायसवाल और सीएम की कुर्सी के बीच बड़ी अड़चन है।
दूसरे दावेदार का नाम- सम्राट चौधरी
सम्राट चौधरी का नाम भी बीजेपी की तरफ से सीएम पद के लिए चर्चा में है और ये टॉप लीडरशिप की पसंद हैं, ये भी पूरी तरह कन्फर्म है। लेकिन बीजेपी में संघ से आए कार्यकर्ताओं की एक बड़ी जमात उनके रास्ते का रोड़ा हैं। इस धड़े का कहना है कि सम्राट चौधरी राजद छोड़कर बीजेपी में आए। वो शुरू से बीजेपी के कार्यकर्ता नहीं रहे हैं, ऐसे में बीजेपी में उन्हें डिप्टी सीएम का पद देकर पार्टी ने उन्हें ऊंचाई देने में परहेज नहीं किया। लेकिन वो सीएम बन जाएंगे तो बीजेपी के शुरुआती दौर से ही कार्यकर्ता रहे नेताओं में मायूसी फैल जाएगी। यही बात सम्राट चौधरी की राह का कांटा है।
तीसरे दावेदार का नाम- नित्यानंद राय
तीसरे दावेदार नित्यानंद राय फिलहाल उजियारपुर सीट से लोकसभा सांसद हैं। वो पीएम मोदी के करीबी भी हैं। नित्यानंद राय को बिहार में लालू के माय समीकरण को तोड़ने के लिए आगे बढ़ाया गया था। लेकिन उसमें वो बहुत कामयाबी हासिल नहीं कर पाए। वो भी बिहार के सीएम पद के उम्मीदवार हैं। लेकिन बीजेपी का एक और धड़ा ये भी मानता है कि नित्यानंद राय के जरिए अब भी बिहार में यादवों को साधना मुश्किल है, क्योंकि ये भी एक सच है जो चुनावों में वोटिंग पैटर्न से साफ झलकता है कि यादवों के लिए एक ही नेता हैं और वो हैं लालू प्रसाद यादव। ऐसे में नित्यानंद राय की राह में कांटे तो नहीं लेकिन यादव वोटों को खींचने में उनकी परफॉर्मेंस ही रोड़ा है। लेकिन इसमें भी कोई दो राय नहीं है कि नित्यानंद राय संगठन के समर्पित चेहरों में से एक हैं। एक सूत्र ने एक ही लाइन हमें कही ‘सबकी राय, नित्यानंद राय।’
अब सवाल ये कि बीजेपी से कौन सीएम बनेगा?
हमारे एक सूत्र ने बताया कि ऐसे में दो तरीके हैं। पहला तरीका है वोटिंग, बीजेपी अपने विधायकों के बीच इन तीनों का नाम रख दे और वोटिंग के जरिए ये फैसला करे कि विधायक दल का नया नेता कौन होगा जो बिहार का मुख्यमंत्री भी बनेगा। दूसरा तरीका है चौंकाने वाला। यकीनन बीजेपी ने हाल के 5 सालों में कई ऐसे फैसले लिए हैं जो चौंकाने वाले रहे हैं। उज्जैन के विधायक मोहन लाल यादव को सीधे मध्य प्रदेश का सीएम बनाना या फिर पटना के एक विधायक नितिन नवीन को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना देना। लेकिन इसके लिए भी बीजेपी बिहार के सारे समीकरण ध्यान में रखेगी। UGC एक्ट पर उपजे आक्रोश को देखते हुए बीजेपी किसी सवर्ण को भी बिहार का मुख्यमंत्री बना दे तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए। फैसला अचानक होगा, अब ये भी तय हो चुका है।
