दिग्विजय के करीबी को राज्यसभा भेज कांग्रेस ने साधे दो बड़े समीकरण, बढ़ेगी सिंधिया की परेशानी!

ग्वालियर ।    कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव के उम्मीदवार के नाम पर सस्पेंस खत्म करते हुए बुधवार को मध्यप्रदेश से अशोक सिंह को मध्यप्रदेश से राज्यसभा उम्मीदवार घोषित कर दिया। पहले ऐसी अटकलें थीं कि कांग्रेस कमलनाथ को राज्यसभा भेज सकती है। हालांकि, मंगलवार को नाथ ने कहा कि उन्होंने राज्यसभा के बारे में कभी नहीं सोचा। अशोक सिंह ग्वालियर-चंबल क्षेत्र से आते हैं, तीन बार लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं। अशोक सिंह वर्तमान में मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष हैं और कोषाध्यक्ष भी हैं। सिंह मुख्य रूप से दिग्विजय सिंह खेमे के नेता माने जाते हैं, लेकिन अपने मिलनसार और व्यवसायी छवि की वजह से इनके संबंध में कांग्रेस के साथ ही भाजपा नेताओं के साथ भी मधुर ही रहे हैं। ग्वालियर से आने वाले अशोक सिंह यादव समाज से आते हैं। ऐसे में पार्टी ने यादव वर्ग से आने वाले नेता को राज्यसभा भेजकर इस वर्ग को साधने की कोशिश की है। क्योंकि भाजपा ने इसी वर्ग से आने वाले मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाया है। सिंह के नाम का एलान कर कांग्रेस ने एक तरह से चौंकाया है, क्योंकि उनका नाम दूर-दूर तक चर्चा में नहीं था। सिंह हर तरह के मैनजमेंट में माहिर माने जाते रहे हैं। पिछली बार भारत जोड़ो यात्रा जब मध्यप्रदेश आई, तब भी उसका मैनजमेंट अशोक सिंह ने ही संभाला था। दरअसल, कांग्रेस के राजमणि पटेल का राज्यसभा का कार्यकाल खत्म हो रहा है। पटेल ओबीसी वर्ग से आते हैं। ऐसे में पार्टी ने इसी वर्ग से जुड़े दूसरे नेता को राज्यसभा भेजने का फैसला किया है। राजमणि पटेल विंध्य अंचल से आते थे, जबकि अशोक सिंह ग्वालियर-चंबल से आते हैं। ऐसे में पार्टी ने जातिगत समीकरणों के साथ-साथ क्षेत्रीय समीकरण भी साधे हैं। हालांकि आज सुबह तक कांग्रेस से मीनाक्षी नटराजन और कमलेश्वर पटेल के नाम की चर्चा भी चल रही थी, लेकिन पार्टी ने सबको दरकिनार करते हुए अशोक सिंह के नाम पर सहमति बनाई है।

अशोक सिंह ग्वालियर लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस की तरफ से चार बार उम्मीदवारी कर चुके हैं, लेकिन सफलता हाथ नहीं लग सकी थी। 2007 के लोकसभा उपचुनाव मे पहली बार कांग्रेस के टिकट पर मैदान में उतरे अशोक सिंह को भाजपा की यशोधरा राजे सिंधिया ने 35 हजार वोट से हराया था। 2009 में दोबारा अशोक सिंह कांग्रेस से उम्मीदवार बने और यशोधरा राजे से महज 26 हजार वोट से हारे, वहीं 2014 की मोदी लहर में भी अशोक सिंह भाजपा के नरेंद्र सिंह तोमर से 29 हजार वोट से हार गए थे। दिग्विजय गुट के कांग्रेस नेता अशोक सिंह के दादा स्व. कक्का सिंह डोंगर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे और पिता राजेंद्र सिंह कांग्रेस से विधायक रहे। अशोक सिंह का परिवार कांग्रेसी रहा है और इससे पहले मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार में उन्हें अपेक्स बैंक का अध्यक्ष बनाया गया था। वे कांग्रेस की प्रदेश कमेटी में कोषाध्यक्ष का पद कुछ समय पहले संभाल रहे थे। कांग्रेस नेता अशोक सिंह का होटल व्यवसाय है और कृषि कार्य भी है। सिंह का परिवार कट्टर सिंधिया विरोधी माना जाता रहा है। अभी ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा के कोटे से मध्यप्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं।

अमर उजाला से चर्चा में कांग्रेस के नेता कहते हैं कि राज्यसभा सांसद बनने के बाद अशोक सिंह की जिम्मेदारी बढ़ जाएगी। क्योंकि उनका ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में अच्छा खासा दबदबा रहा हैं। वे खुद भी इस क्षेत्र की विधानसभा सीट से कई बार चुनाव लड़ चुके हैं। क्षेत्र के कार्यकर्ताओं के साथ साथ जमीनी राजनीति को वे बेहतर समझते हैं। ऐसे में कांग्रेस इन क्षेत्रों से जिन लोगों को लोकसभा का उम्मीदवार बनाती है, तो उन्हें भी जिताने की जिम्मेदारी सिंह के कंधे पर होगी। इससे पहले भाजपा ने बुधवार को पांच नामों की घोषणा की। इनमें मध्यप्रदेश से चार और ओडिशा से एक नाम शामिल है। केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन को मध्यप्रदेश से प्रत्याशी बनाया गया है। इसके अलावा रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को ओडिशा से कैंडिडेट बनाया गया है। मध्यप्रदेश से अन्य तीन नामों में उमेश नाथ महाराज, माया नारोलिया और बंसीलाल गुर्जर शामिल हैं। विधायकों की संख्या बल के हिसाब से देखें तो वर्तमान में चार सीटें भाजपा को मिलेंगी, जबकि एक सीट कांग्रेस के खाते में जाना तय है। 15 फरवरी नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख है।

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