जल जीवन मिशन में करप्शन… 280 एजेंसियां ब्लैकलिस्ट:सीएस के निर्देश पर 22 ठेकेदार भी ब्लैकलिस्ट, 141 अफसरों को मिला नोटिस

जल जीवन मिशन में हजारों करोड़ रुपए के करप्शन के आरोपों पर की गई जांच के बाद सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। मिशन कार्यों में अनियमितता पाए जाने पर 280 एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट किया गया है, जबकि 22 ठेकेदारों के अनुबंध निरस्त कर उन्हें भी ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है।

इसके अलावा गलत डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) बनाने वाले 141 पीएचई अधिकारियों और 187 एजेंसियों को नोटिस जारी किए गए हैं। साथ ही टेंडर प्रक्रिया का उल्लंघन करने वाले 10 अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है।

मुख्य सचिव अनुराग जैन ने फर्जी बैंक गारंटी जमा करने वाले ठेकेदार का अनुबंध समाप्त कर मामला सीबीआई को सौंपने का आदेश भी दिया है। इन कार्रवाइयों से कांग्रेस और विपक्ष द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों की पुष्टि भी होती प्रतीत हो रही है।

30 करोड़ की पेनाल्टी, 8358 योजनाओं का परीक्षण

मुख्य सचिव ने मंत्रालय में जल जीवन मिशन की समीक्षा बैठक में 30 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाने की जानकारी दी। उन्होंने पुनरीक्षण योजना परीक्षण समिति गठित करते हुए 8358 एकल ग्राम नल-जल योजनाओं का पुनरीक्षण परीक्षण करने के निर्देश जारी किए।

उन्होंने कहा कि शेष योजनाओं पर तेजी से काम किया जाए ताकि हर गांव के हर घर तक स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जा सके। क्वालिटी कंट्रोल पर सख्ती और सभी स्तरों पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने के निर्देश भी दिए गए। बैठक में बताया गया कि अब तक 80 लाख 52 हजार 82 घरों तक नल कनेक्शन दिए जा चुके हैं, जो कुल लक्ष्य का 72% से अधिक है।

280 एजेंसियां ब्लैकलिस्ट, 22 ठेकेदार बाहर

प्रमुख सचिव पीएचई पी. नरहरि ने बताया,

  • कामों में देरी और गड़बड़ियों के कारण 280 एजेंसियां ब्लैकलिस्ट
  • 22 ठेकेदारों के अनुबंध निरस्त व ब्लैकलिस्ट
  • फर्जी बैंक गारंटी मामले को सीबीआई को सौंपा गया
  • गुणवत्ताहीन कार्यों और टेंडर प्रक्रिया उल्लंघन पर 10 अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई

अब तक कुल 30 करोड़ रुपए की पेनाल्टी विभिन्न एजेंसियों पर लगाई जा चुकी है।

141 अधिकारी और 187 एजेंसियां नोटिस पर

पुनरीक्षण समिति की रिपोर्ट में सामने आया कि कई ग्रामों की मूल डीपीआर बेहद त्रुटिपूर्ण थी,

  • 141 पीएचई अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस
  • 187 एजेंसियों को डीपीआर में लापरवाही पर नोटिस

कई एकल ग्राम नल-जल योजनाओं में मजरे–पारे–टोले छूटने से ग्रामीण परिवारों को नल कनेक्शन नहीं मिल पाए थे। इस लापरवाही को गंभीर मानकर अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई शुरू की गई है।

पूर्व विधायक ने लगाए थे 1000 करोड़ के करप्शन के आरोप

पूर्व विधायक किशोर समरीते ने प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखकर पीएचई मंत्री और विभागीय इंजीनियरों पर बड़े पैमाने पर कमीशनखोरी और टेंडर अनियमितताओं के आरोप लगाए थे। पीएमओ ने इस मामले की जांच के निर्देश दिए थे।

समरीते ने आरोप लगाया था कि मिशन में 1000 करोड़ रुपए तक का भ्रष्टाचार हुआ है।तब सरकार ने उन्हें क्लीन चिट दी थी, लेकिन अब की गई सख्त कार्रवाई के बाद इन आरोपों की सच्चाई की पुष्टि होती दिखाई दे रही है।

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