कब्रिस्तान में हजारों लोगों के शव दफनाए जाते हैं, फिर जगह कम क्यों नहीं पड़ती

एक सवाल कई बार आपके मन में आया होगा कि कब्रिस्तान में हर साल हजारों लोगों के शव दफनाए जाते हैं, फिर जगह कम क्यों नहीं पड़ती ? इसके पीछे कई तरह के जवाब भी आपने सुने होंगे।

तमाम मिथक भी हैं। कुछ दावे तो यहां तक किए जाते हैं कि कब्रिस्तानों में शोक मनाने के लिए लोग भी किराए पर मिल जाते हैं लेकिन हकीकत क्या है ?

  अंतिम संस्कार करवाने वाले एक शख्स ने इसके बारे में खुलासा किया, जिसे जानने के बाद आपको अपने कई सवालों के जवाब मिल जाएंगे। हालांकि, ये खुलासे उन्होंने अमरीका के कब्रिस्तान के बारे में किए हैं, भारत के कब्रिस्तानों में इससे अलग नियम हो सकते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार अमरीका के एक यूनरल डायरेक्टर विक्टर एम. स्वीनी ने यू-ट्यूब पर एक वीडियो शेयर कर सभी सवालों के जवाब दिए। ‘ब्यूरियल सपोर्ट’ नामक इस वीडियो को अब तक 5 लाख से अधिक बार देखा जा चुका है। विक्टर से एक यूजर ने सवाल किया कि कब्रिस्तानों में कभी जगह की कमी क्यों नहीं होती? जवाब में विक्टर ने कहा, ‘‘यह सही नहीं है। कभी-कभी कब्रिस्तानों में जगह की कमी हो जाती है लेकिन इसका एक तरीका निकाला गया है। महानगरों में जहां हर साल तमाम लोगों की मौत होती है, अक्सर ऐसा होता है कि कमी हो जाती है। ऐसे में परिवार के लोग अपने किसी प्रियजन की मौजूदा कब्र के ऊपर अपने लोगों को दफना देते हैं।’’

 किराए पर भी मिलती कब्र विक्टर ने जर्मनी की एक स्टडी के बारे में बताया, जहां कब्र किराए पर मिलती है, यानी आपकी कब्र वाली जगह हमेशा के लिए आपकी मां या आपके पिता की नहीं होती, कुछ वर्षों में किराया खत्म होते ही संस्था अवशेषों को खोदती है और उन्हें आमतौर पर एक सामान्य कब्र में डाल देते हैं। कुछ लोगों ने पूछा कि क्या अंत्येष्टि के दौरान आंसू बहाने के लिए भी लोग किराए पर मिलते हैं ? जवाब में विक्टर ने कहा, ‘‘कुछ जगह ऐसी व्यवस्था है, लेकिन मुझे नहीं पता कि मैं अपने अंतिम संस्कार के लिए पेशेवर शोक मनाने वालों को नियुक्त करना चाहूंगा या नहीं। लोग अपनी भावनाएं दिखा सकें तो यह विचार मुझे पसंद आएगा मगर इसके लिए पैसे खर्च करना ठीक नहीं लगता।’

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