मास्टर प्लान में देरी से भोपाल-इंदौर सहित 5 शहरों का बिगड़ा हुलिया, कैग रिपोर्ट में खुलासा

भोपाल। मध्य प्रदेश में विकास योजना (मास्टर प्लान) न बनने से भोपाल, इंदौर सहित पांच बड़े शहरों का अनियोजित विकास होता रहा। भारत के नियंत्रक महालेखापरीक्षक (कैग) ने संचालक नगर तथा ग्राम निवेश संचालनालय (टीएंडसीपी) की इस कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आपत्ति जताई है।

कैग ने संचालक टीएनसीपी और टीएंडसीपी के पांच जिलों (भोपाल, ग्वालियर, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन) के कार्यालयों एवं इन जिलों की नगर निगमों के अप्रैल 2018 से मार्च 2023 तक की अवधि के अभिलेखों की जांच की।जांच में कैग ने पाया कि संचालक टीएंडसीपी ने बीना पेट्रोकेमिकल्स एवं औद्योगिक प्रदेश के अलावा, प्रादेशिक योजनाएं तैयार नहीं की। प्रादेशिक योजना का प्रारूप मार्च 2012 में प्रकाशित किया गया था लेकिन अंतिम अधिसूचना दिसंबर 2024 तक लंबित थी।

विकास योजनाओं की तैयारी के लिए संयुक्त संचालक, टीएंडसीपी उज्जैन, जबलपुर, इंदौर एवं ग्वालियर द्वारा हितधारकों से प्रासंगिक रिपोर्ट, इनपुट का संग्रह नहीं किया गया।

इन पांच शहरों में मलीन बस्तियां भी बढ़ी। विकास योजना तैयार करते समय शासकीय विभागों, स्थानीय प्राधिकरणों एवं सार्वजनिक संस्थानों से प्रासंगिक प्रतिवेदन (विकास योजना के कार्यान्वयन के लिए विभिन्न विभागों द्वारा किए जाने वाले कार्य) प्राप्त नहीं किए थे।

मास्टर प्लान तैयार करते समय जिला योजना समिति के किसी भी पंचवर्षीय एवं वार्षिक विकास योजना के प्रारूप पर विचार नहीं किया। प्रादेशिक योजना तैयार नहीं होने से प्राकृतिक संसाधनों, जैव विविधिता के संरक्षण, अनियोजित विकास पर नियंत्रण, भूमि के नियोजित उपयोग की योजना प्रभावित हुई।

नगर निगमों ने पर्यवेक्षण शुल्क पर जीएसटी एकत्र नहीं किया, जिसके परिणामस्वरूप 96.78 लाख के राजस्व का नुकसान हुआ। भोपाल, ग्वालियर, इंदौर एवं उज्जैन नगर निगमों ने सर्वेक्षण में 1586 अनधिकृत कॉलोनियों की पहचान की, लेकिन अनधिकृत विकास, निर्माण को हटाने एवं पुलिस अधिकारियों के पास शिकायत दर्ज कराने के लिए प्रभावी कार्रवाई नहीं की। टीएंडसीपी जिला कार्यालयों में मानव शक्ति की भारी कमी देखी।

ये सभी दर्शाते हैं कि नगर तथा ग्राम निवेश विभाग काफी हद तक निष्क्रिय था। हालांकि सरकार ने इस बात को स्वीकारते हुए आश्वासन दिया है कि भविष्य में सभी प्रादेशिक योजनाओं को तैयार करने पर गंभीरता विचार करेेगी। कैग ने इसको लेकर अनुशंसाएं भी की है।

21 वर्ष में 175 प्रतिशत बढ़ी अवैध कालोनियांभोपाल नगर निगम सीमा में वर्ष 1991 की तुलना में 2011 की जनसंख्या में 77 प्रतिशत वृद्धि हुई। वर्ष 2000 की तुलना में 2021 में अनधिकृत कालोनियां 175 प्रतिशत बढ़ी। टीएंडसीपी ने अतिक्रमणों एवं अधिकतम भूमि सीमा की जानकारी भी नहीं दी।

मास्टर प्लान के अभाव में सरकार के पास जनसंख्या वृद्धि, बढ़ते अनियोजित विकास एवं अनधिकृत कालोनियों से निपटने कोई माडल आधारित योजना नहीं है।

शासन ने 11 बार लौटाया भोपाल का मास्टर प्लान1975 से शासन ने केवल भोपाल के दो मास्टर प्लान को मंजूरी दी। भोपाल का पहला मास्टर प्लान 1991 में बना था। 195 ग्रामों को शामिल कर 2005 में दूसरा मास्टर प्लान बनाकर अधिसूचना जारी की गई। टीएंडसीपी ने भोपाल मास्टर प्लान 2021 का तृतीय प्रारूप प्रकाशित किया, अगस्त 2009 में मास्टर प्लान में संशोधन की बात कही गई।

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