गुरुवार के दिन करें ये उपाय, होगी भाग्य में वृद्धि

हिंदू धर्म में हफ्ते का हर दिन किसी न किसी देवता की पूजा अर्चना को समर्पित किया गया हैं। वही गुरुवार का दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु और देवों के गुरु बृहस्पति की पूजा आराधना के लिए श्रेष्ठ माना गया हैं।

इस दिन भक्त प्रभु को प्रसन्न करने के लिए उनकी विधि विधान से पूजा करते हैं और व्रत आदि भी रखते हैं लेकिन इसी के साथ ही अगर आज के दिन भगवान बृहस्पति का ध्यान करते हुए प्रभु के 108 नामों का मन ही मन जाप किया जाए तो उत्तम परिणाम की प्राप्ति होती है साथ ही भाग्य भी चमक जाता है तो आज हम आपके लिए लेकर आए हैं भगवान बृहस्पति के 108 नाम।

। अथ श्री बृहस्पति अष्टोत्तर शतनामावली ।

ॐ गुरवे नमः,
ॐ गुणाकराय नमः,
ॐ गोप्त्रे नमः,
ॐ गोचराय नमः,
ॐ गोपतिप्रियाय नमः,
ॐ गुणिने नमः,
ॐ गुणवतां श्रेष्ठाय नमः,
ॐ गुरूणां गुरवे नमः,
ॐ अव्ययाय नमः,
ॐ जेत्रे नमः,
ॐ जयन्ताय नमः,
ॐ जयदाय नमः,
ॐ जीवाय नमः,
ॐ अनन्ताय नमः,
ॐ जयावहाय नमः,
ॐ आङ्गीरसाय नमः,
ॐ अध्वरासक्ताय नमः,
ॐ विविक्ताय नमः,
ॐ अध्वरकृत्पराय नमः,
ॐ वाचस्पतये नमः,
ॐ वशिने नमः,
ॐ वश्याय नमः,
ॐ वरिष्ठाय नमः,
ॐ वागविचक्षणाय नमः,
चित्तशुद्धिकराय नमः,
ॐ श्रीमते नमः,
ॐ चेत्रय नमः,
ॐ चित्रशिखण्डिराजाय नमः,
ॐ बृहद्रथाय नमः,
ॐ बृहद्भानवे नमः,
ॐ बृहस्पतये नमः,
ॐ अभीष्टयाय नमः,
ॐ सुराचार्याय नमः,
ॐ सुराध्यक्षाय नमः,
ॐ सुंरकार्यकृतोद्यमाय नमः,
ॐ गीर्वाणपोषकाय नमः,
ॐ कमण्डलुधराय नमः,
ॐ गीष्पतये नमः,
ॐ गिरिशाय नमः,
ॐ अनघाय नमः,
ॐ धीवराय नमः,
ॐ धिषणाय नमः,
ॐ दिव्यभूषणाय नमः,

ॐ देवपूजिताय नमः,
ॐ धनुर्द्धराय नमः,
ॐ दैत्यहन्त्रे नमः,
ॐ दयासाराय नमः,
ॐ दयाकराय नमः,
ॐ दारिद्यनाशनाय नमः,
ॐ धन्याय नमः,
ॐ दक्षिणायनसंभवाय नमः,
ॐ धनुर्वीराधिपाय नमः,
ॐ देवाय नमः,
ॐ धनुर्बाणधरय नमः,
ॐ हरये नमः,
ॐ आङ्गिः कुलसंभवाय नमः,
ॐ आङ्गिरशाब्दसञजाताय नमः,
ॐ सिन्धुदेशाधिपाय नमः,
ॐ धीमते नमः,
ॐ स्वर्णकायाय नमः,
ॐ चतुर्भुजाय नमः,
ॐ हेमङ्गदाय नमः,
ॐ हेमवपुषे नमः,
ॐ हेमभूषणभूषिताय नमः,
ॐ पुष्यनाथाय नमः,
ॐ सर्ववे दान्तविदुषे नमः,
ॐ पुष्पयरागमणिमण्डनमण्डिताय नमः,
ॐ पुष्पसमानाभाय नमः,
ॐ इन्द्रादिदेवदेवेशाय नमः,
ॐ असमानबलाय नमः,
ॐ सत्वगुणसम्पद्विभावसवे नमः,
ॐ भूसुराभीष्टफलदाय नमः
ॐ भूरियशसे नमः,
ॐ पुण्यविवर्धनाय नमः,
ॐ धर्मरूपाय नमः,
ॐ धनाध्यक्षाय नमः,
ॐ धनदाय नमः,
ॐ धर्मपालनाय नम:,
ॐ सर्वदेवार्थतत्त्वज्ञाय नमः,
ॐ सर्वापद्विनिवारकाय नमः,
ॐ सर्वपापप्रशमनाय नमः,
ॐ स्वमतानुगतामराय नमः
ॐ ऋग्वेदपारगाय नमः,
ॐ ऋक्षराशिमार्गप्रचारवते नमः,
ॐ सदानन्दाय नमः,
ॐ सुराचार्यायनमः,
ॐ सत्यसधाय नमः,
ॐ सर्वागमज्ञायनमः ,
ॐ सर्वज्ञाय नमः,
ॐ ब्रह्मपुत्रय नमः,
ॐ ब्राह्मणेशाय नमः,
ॐ ब्रह्मविद्याविशारदाय नमः,
ॐ समानाधिकनिंर्भुक्ताय नमः,
ॐ सर्वलोक वंशवदाय नमः,
ॐ सुरासुरगन्धर्ववन्दिताय नमः,
ॐ सत्यभाषणाय नमः,
ॐ सुरकार्यहितकराय नमः
ॐ दयावते नमः,
ॐ शुभलक्षणाय नमः,
ॐ लोकत्रयगुरवे नमः ,
ॐ तपोनिधये नमः,
ॐ सर्वगाय नमः,
ॐ सर्वतोविभवे नमः,
ॐ सर्वेशाय नमः,
ॐ सर्वदातुष्टाय नमः,
ॐ सर्वगाय नमः,
ॐ सर्वपूजिताय नमः,
ॐ सत्य संङ्गल्पमानसाय नमः।
। इति श्री बृहस्पति अष्टोत्तर शतनामावली ।

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