बसंत पंचमी पर करें ये अचूक उपाय, हर कार्य में मिलेगा लाभ; सफलता चूमेगी आपके कदम

उमंग उल्लास और सरस्वती पूजन का पर्व बसंत पंचमी 14 फरवरी को मनाया जाएगा. इस बार बसंत पंचमी शुभ योग की साक्षी रहेगी. बसंत पंचमी पर ज्ञान की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है. मान्यता है कि देवी सरस्वती की आराधना से सद्बुद्धि और ज्ञान की प्राप्ति होती है. सरस्वती पूजा माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को की जाती है.

अगर वास्तु शास्त्र के हिसाब से मां सरस्वती का पूजन करें तो इससे अपार धन व सफलता की प्राप्ति होती है. कुछ छोटे उपाय करने से सरस्वती माता का आशीर्वाद हमेशा बना रहता है. आइए उज्जैन के पंडित आनंद से जानते हैं वह कौन से उपाय हैं….

मां सरस्वती की कृपा के लिए करें ये अचूक उपाय
– बसंत पंचमी के दिन छात्र घर में देवी सरस्वती को लाल फूल विशेषकर गुड़हल या फिर गेंदे का फूल अर्पित करें. इससे उन्हें इच्छित क्षेत्र में सफलता मिलती है.
– स्टडी टेबल पर देवी सरस्वती की मूर्ति रखने से भी सफलता मिलेगी. साथ ही पढ़ाई करते समय विद्यार्थियों का मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए. वास्तु के अनुसार अध्ययन कक्ष घर की उत्तर-पूर्व दिशा में होना चाहिए. इससे शीघ्र सफलता मिलती है.
– अध्ययन कक्ष में दीवारों का रंग हल्का क्रीम या ऑफ-व्हाइट होना चाहिए. माना जाता है कि सफेद रंग माता सरस्वती को प्रिय होता है और इस रंग से एक शांत वातावरण का अनुभव होता है.

– बसंत पंचमी के दिन कमरे में एक विजन बोर्ड लगाएं. कहा जाता है कि ऐसा करने से माता सरस्वती ध्यान एकाग्र करने में मदद करती हैं और छात्रों के विजन को पूरा करती हैं.

– बिजनेस में सफलता के लिए टेबल का आकार नियमित होना चाहिए और बसंत पंचमी के दिन अपने कार्यालय के उत्तर-पूर्व कोने में देवी सरस्वती की मूर्ति रखने से व्यवसाय में वृद्धि होगी.

– यदि आपके घर/कार्यालय में कोई वास्तु दोष है, तो बसंत पंचमी के इस शुभ दिन पर उनका समाधान करने से जीवन में देवी का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

– आपके घर की उत्तर दिशा विकास के अवसरों और बढ़ी हुई कमाई का प्रतिनिधित्व करती है. इसलिए इस स्थान पर शयनकक्ष रखना लाभकारी रहेगा और धन का निरंतर प्रवाह बना रहेगा.

– आपके घर की दक्षिण दिशा व्यक्तियों के लिए नाम और प्रसिद्धि का प्रतिनिधित्व करती है. इस दिशा का उपयोग शयनकक्ष के साथ-साथ ध्यान के लिए भी किया जा सकता है.

– पश्चिम दिशा व्यापार वृद्धि में सहायक होती है, उद्यमियों को अपना शयनकक्ष इसी दिशा में रखना चाहिए. यह व्यापार वृद्धि और व्यावसायिक सफलता में मदद करेगा.
 

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