यूपी में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से हालात हुए बदतर, उत्पादन घटा, आपूर्ति प्रभावित, ऊर्जा मंत्री ने दी बर्खास्तगी की चेतावनी

लखनऊ । उप्र में 23 साल बाद हुई विद्युत विभाग के कर्मियों की हड़ताल से कई जिलों की विद्युत आपूर्ति चरमरा गयी है। वहीं हड़ताल का उत्पादन पर भी असर पड़ा है। इस बीच सरकार ने हड़ताल पर सख्त रवैया अपनाया है। ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने कहा है कि मुख्यमंत्री को पूरे मामले से अवगत कराया गया है। विद्युत कर्मचारी संघर्ष समिति के 22 नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जा रही है। इन लोगों के खिलाफ एस्मा के तहत कार्रवाई होगी। इनमें से छह को निलंबित किया जा रहा है। वहीं अब तक 1332 की सेवा समाप्त की गई है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि हड़ताल का कोई असर नहीं है।
यूपी में कर्मचारियों की हड़ताल से खड़े हुए बिजली संकट पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ हुई बैठक के बाद ऊर्जा मंत्री ने बताया कि संविदाकर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है। अब तक 1332 की सेवा समाप्त की गई है। शाम तक अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई होगी। किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। सभी से अपील है कि जनता और अपने परिवार के हित में काम पर लौटें। चार घंटे का समय दे रहे हैं। शाम छह बजे तक नहीं लौटने वालो को बर्खास्त कर दिया जाएगा। जहां बर्खास्त कर रहे हैं। वहां दूसरी एजेंसी, इंजीनियरिंग कॉलेज से छात्रों को ले रहे हैं। नए लोगों की सेवाएं लेंगे।
उधर, बिजली कर्मियों की हड़ताल का असर विद्युत उत्पादन इकाइयों पर जबर्दस्त ढंग से पड़ा है। दूसरे दिन शनिवार को 1720 मेगावाट उत्पादन प्रभावित हो गया। ओबरा की सभी इकाइयां बंद हो गईं। अनपरा में सुबह 9ः25 बजे 500 मेगावाट की 5वीं इकाई भी बंद हो गई। जबकि 500 मेगावाट की 4वीं इकाई अनुरक्षण के लिए पहले से बंद चल रही है यानी अनपरा-बी परियोजना से उत्पाद शून्य हो गया है। इससे राज्य में विद्युत व्यवस्था चरमरा सकती है। हड़ताल के पहले दिन शुक्रवार को अनपरा में 210-210 मेगावाट की दो इकाइयों व ओबरा की 200-200 मेगावाट की दो इकाइयों से उत्पादन ठप हो गया था। ओबरा में शनिवार की सुबह 7ः16 बजे उत्पादनरत 200 मेगावाट क्षमता की 12वीं इकाई व सुबह करीब 7ः50 बजे 13वीं इकाई कोल फीडिंग न हो पाने के कारण बंद हो गई। परियोजना की इन दोनों इकाइयों से 220 मेगावाट उत्पादन हो रहा था। इस तरह ओबरा में 800 मेगावाट उत्पादन प्रभावित हुआ है। अनपरा में 920 मेगावाट उत्पादन प्रभावित है।
वहीं दूसरी ओर ऊर्जा मंत्री ने कहा कि कुछ संगठन पांच दिन से हड़ताल पर हैं। उनसे बात करने का लगातार प्रयास कर किया जा रहा है। वार्ता के द्वार खुले है। कई संगठन जनता के हितों की रक्षा कर रहे हैं। वे निष्ठा के साथ काम कर रहे हैं। इन सभी का आभार है। कई निजी कंपनियों ने उत्पादन इकाई में मदद की है। उत्पादक क्षमता 28 मेगावाट की है। जरूरत कम है। 24 घंटे में अंधी तूफान की वजह से काम प्रभावित हो रहा है। कुछ जगह कर्मचारियों ने समस्या खड़ी की जिसे निष्प्रभावी कर दिया गया है। हड़ताल का कोई असर नहीं है। तार फीडर में हुई गड़बड़ी सही की गई है। कई जगह शार्ट सर्किट करने का प्रयास किया गया। देवरिया व आजमगढ़ में कुछ वारदात हुई है। उन सभी के नाम आ गए है। सभी के खिलाफ सख्त करवाई होगी। राष्ट्रीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों को छोड़ा नहीं जाएगा। कर्मचारियों की अनर्गल मांगें पूरी नहीं की जा सकती हैं। संघर्ष समिति को बार-बार बता रहे हैं। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि हड़ताल जनहित के विरुद्ध है। यह अवमानना भी है। कोर्ट के आदेश से सभी को अवगत करा दिया गया है। इसके बाद भी कर्मचारी हड़ताल पर हैं। अब कार्पोरेशन उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए विवश है। संघर्ष समिति हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं कर रहा है। नेताओं के करीबियों के तीन चार वीडियो भी सामने आए हैं। इसका मतलब है कि उन्हें जनता की तकलीफ से कोई मतलब नहीं हैं। इन नेताओं को किसी की फिक्र नहीं है। ऐसी परिस्थिति में यह राष्ट्रहित के खिलाफ है। इसके पहले, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार दोपहर ऊर्जा मंत्री एके शर्मा सहित विभाग के अफसरों के साथ बैठक की। उन्होंने प्रदेश में 24 घंटे बिजली आपूर्ति के निर्देश दिए हैं और कहा कि हड़ताल पर जाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

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