यूरोप को भारत की जरूरत… डेनमार्क के एंबेसडर ने बताया क्यों जरूरी है FTA

नई दिल्लीः भारत में डेनमार्क के एंबेसडर रासमस एबिल्डगार्ड क्रिस्टेंसन का कहना है कि ईयू-भारत एफटीए दोनों पक्षों के लिए एक विन विन समझौता होगा। जहां यूरोप के पास इनोवेशन, फंडिंग और टेक कंपनियां हैं तो भारत के पास ना सिर्फ बड़ा बाजार बल्कि तकनीकी क्षमताएं भी हैं । ये दोनों इकोनमीज के लिए एक दूसरे का पूरक होना है । ऐसे में इसे और आगे बढ़ाने को लेकर हम जो कर सकते हैं, वो करेंगे लेकिन ये एक बड़ी डील है । ऐसे में दोनों पक्षों को इस दिशा में काफी मेहनत करनी पड़ेगी। जिससे कि सारी जटिलताओं और रुकावटों को दूर किया जा सके।

ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप का किया जिक्र

उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष इसकी महत्ता को समझते हैं। ऐसे में अगर कुछ जटिलताएं हैं, तो आखिरकार कुछ मुद्दों पर दोनों को समझौता करना होगा। लेकिन ध्यान देने वाली बात ये है कि दोनों पक्षों में इसे लेकर गहरी सदेच्छा है, दोनों जानते हैं कि उन्हें एक दूसरे की जरूरत है। इसके अलावा, उन्होंने दोनों देशों के बीच ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों देश लगातार व्यापक सहयोग की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। ये सहयोग दिल्ली ही नहीं बल्कि कुछ राज्यों में साफ तौर पर दिखता है। उन्होंने कहा कि फिलहाल 220 डैनिश कंपनियां भारत में काम कर रही हैं, जो कि सीधे एक लाख लोगों को सीधे रोजगार दे रही हैं। राजदूत का मानना है कि एफटीए के बाद व्यापारिक रिश्ते और गहरे होंगे। उम्मीद है कि ये एफटीए ये साल खत्म होने से पहले हो जाए।

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