फीस भरी, एग्जाम क्लियर, इंटर्नशिप भी पूरी, अब रजिस्ट्रेशन अटका

नर्सरी से 12वीं तक की लंबी पढ़ाई, फिर साढ़े पांच साल की मेहनत से बैचलर ऑफ होम्योपैथिक मेडिसिन एंड सर्जरी (बीएचएमएस) की डिग्री। परीक्षा पास, इंटर्नशिप पूरी और डिग्री हाथ में… इसके बावजूद डॉक्टर बनने का सपना अभी भी अधूरा। यह दर्द है राजधानी के एलबीएस होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज से पास हुए 127 छात्रों का, जिनका रजिस्ट्रेशन तीन साल से अटका पड़ा है। बिना रजिस्ट्रेशन के ये छात्र न नौकरी कर सकते हैं, न क्लिनिक खोल सकते हैं और न ही आगे एमडी की पढ़ाई कर सकते हैं।

मजबूर होकर छात्रों ने कॉलेज परिसर में प्रदर्शन तो किया है साथ ही मिसरोद थाने में एक शिकायती आवेदन भी किया है। इस आवेदन में 24 स्टूडेंट्स ने हस्ताक्षर भी किए। जिनमें विष्णु, अनुराधा, उर्वशी, राहुल, अदिति, सर्वजीत, शुभम राय, प्रदीप, आयुषी, मनीषा, प्रतीक्षा, पूजा, देशराज, प्रीतीश, अक्षय, उमंग, विनीत, दामिनी, सालेहा, निकिता, विनयलता, गणेश, साक्षी, शेखर, नीरज नगर, नीरज ठाकुर और शुभम राठौर के नाम शामिल हैं।

भविष्य बर्बाद, खर्च बेकार छात्रों का कहना है कि उन्होंने पढ़ाई के दौरान परिवार से तीन लाख रुपए से ज्यादा का खर्च कराया। अब हालात ऐसे हैं कि छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी घर पर निर्भर रहना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि यह सब कॉलेज की लापरवाही का नतीजा है।

आगे की पढ़ाई तक नहीं कर सकते

छात्रा दामिनी मिश्रा बताती हैं कि उन्होंने 2024 में बीएचएमएस पास किया और तुरंत रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया। एक साल बाद भी स्थिति जस की तस है। उन्होंने कहा कि कॉलेज जाते हैं तो कहते हैं यूनिवर्सिटी से दिक्कत है। यूनिवर्सिटी जाते हैं तो बोलते हैं कॉलेज से रिस्पॉन्स नहीं आता। बाद में पता चला कि हमारी डिटेल्स अपलोड ही नहीं की गई थीं। अब हम न जॉब कर सकते हैं, न प्रैक्टिस और न ही आगे की पढ़ाई।

तीन साल से बेरोजगार छात्र छात्र विष्णु साहू का दर्द और गहरा है। उन्होंने 2015-16 बैच में दाखिला लिया था और दिसंबर 2022 में पास हुए। उन्होंने कहा कि तीन साल से रजिस्ट्रेशन का इंतजार कर रहा हूं। नौकरी नहीं है, प्रैक्टिस नहीं कर सकता। कॉलेज डॉक्यूमेंटेशन में गड़बड़ी करता रहा और हमारी जिंदगी अटक गई।

कॉलेज का जवाब-हर बार लौटाया आवेदन इस मामले में एलबीएस कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. शैलेश महेश्वरी का कहना है कि कॉलेज लगातार कोशिश कर रहा है। पिछले तीन महीनों से हम मेडिकल यूनिवर्सिटी और राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग (एनसीएच) से संपर्क में हैं। अब तक तीन बार बच्चों के कागज भेजे जा चुके हैं, लेकिन हर बार किसी नई कमी का हवाला देकर आवेदन लौटा दिया जाता है। यह स्थिति सिर्फ एक नहीं बल्कि अन्य कॉलेजों की भी है। हमारा प्रयास है कि 15 दिनों में बच्चों को रजिस्ट्रेशन मुहैया कराया जाए। इसके लिए हमारी फैकल्टी मेंबर एनसीएच के लिए रवाना हो गए हैं।

मान्यता न मिलने का विवाद छात्रों ने थाने में दी शिकायत में लिखा है कि कॉलेज ने उन्हें बाद में बताया कि 2016-17 और 2017-18 बैच के लिए एनसीएच से मान्यता नहीं मिली थी। कॉलेज ने हाईकोर्ट में अपील की थी और एडमिशन की अनुमति पा ली थी। इसी विवाद के चलते अब उनका रजिस्ट्रेशन अटका है।

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