पूर्व मंत्री पारस जैन मीडिया से बोले- उज्‍जैन सीट से मेरा टिकट क्यों कटा, इसका जवाब चाहता हूं

 उज्जैन ।   छह बार के विधायक और प्रदेश सरकार में काबीना मंत्री रह चुके पारस जैन टिकट नहीं मिलने पर नाराज चल रहे हैं। बुधवार को लाेकशक्ति भवन में रखे भाजपा के दशहरा मिलन समारोह से उनकी दूरी ने ये स्पष्ट कर दिया।

पार्टी प्रत्‍याशी और नेता चिंतित

उनकी अनुपस्थिति ने पार्टी प्रत्याशी और नेताओं के चेहरे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। चुनावी समीकरण न गड़बड़ाए, इसके लिए शाम को पार्टी अध्यक्ष विवेक जोशी ने उनके उत्तम नगर स्थित बंगले पर पहुंचकर मान-मनौव्वल भी की। इसी दरमियानी जैन ने मीडिया से अपने मन की बातें सांझा की।

बोले-दुख इस बात का है

उन्‍होंने कहा कि मुझे इस बात का दुख नहीं कि मुझे टिकट न मिला। दुख इस बात का है कि छह बार का विधायक होने के बावजूद मुझसे एक बार भी टिकट बदलने को लेकर पूछा न गया। मुझे विश्वास में लेकर टिकट देते तो कोई हर्ज न होता। प्रत्याशी बनाए अनिल जैन कालूहेड़ा से मेरी कोई दुश्मनी नहीं। वो मेरा छोटा भाई है। मेरा कहना सिर्फ इतना है कि टिकट वितरण के लिए भाजपा द्वारा कराए गए सर्वे में यदि मेरा नाम सबसे ऊपर था तो टिकट काटने की क्या वजह रही।

वे बोले- मैं इसका जवाब चार लोगों से चाहता हूं। ये चार लोग हैं मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, चुनाव प्रभारी भूपेन्द्र यादव और प्रदेश संगठन मंत्री हितानंद शर्मा। जहां तक पार्टी के मिलन समारोह से दूरी का प्रश्न है तो मेरे घर दिनभर मेहमानों का आना-जाना लगा था। बेटा घर पर नहीं था, इसलिए मुझे ही सबका सत्कार करना पड़ा। अब घर आए मेहमान को छोड़कर पार्टी के मिलन समारोह में तो जाने से रहा।

मैं पार्टी का सिपाही

मैं पार्टी का सिपाही हूं, इसी पार्टी के साथ सदैव खड़ा रहूंगा। जनता समझदार है। उसे कोई नहीं खरीद सकता। सरकार बनाना और बिगाड़ना जनता का काम है। जनता चाहेगी तो भाजपा की सरकार बनेगी।

मालूम हो कि तीन दिन पहले ही उज्जैन-उत्तर से विधायक पारस जैन ने भाजपा द्वारा इस बार विधानसभा चुनाव का प्रत्याशी न बनाए जाने का दर्द फेसबुक पेज पर एक पोस्ट सांझा कर बयां किया था पोस्ट में लिखा है कि ‘मुझे इस बात का दुख नहीं है कि मुझे दोबारा चुनाव लड़ने का मौका नहीं मिला, क्योंकि अवसर सभी को मिलना चाहिए, लेकिन उज्जैन उत्तर से छह बार विधायक और एक वरिष्ठ कार्यकर्ता होने के नाते मुझसे एक बार पूछा जाता या मुझे विश्वास में लेकर बताया जाता तो मेरे सम्मान को इतनी ठेस नहीं पहुंचती।

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